MP News: ‘स्कूल बस ड्राइवर को चलाने से रोका, दुकान से भी नहीं दे रहे सामान…’ बालाघाट के इस गांव में 10 परिवारों का बहिष्कार – INA

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के लांजी थाना क्षेत्र के घोटीनंदोरा गांव में 10 विशेष समुदाय के परिवारों के कथित सामाजिक बहिष्कार का गंभीर मामला सामने आया है. आरोप है कि जनवरी में आयोजित एक धार्मिक सम्मेलन में विशेष समुदाय के खिलाफ दिए गए बयान के बाद गांव में लेन-देन बंद कर दिया गया.

बताया जा रहा है कि नंदोरा गांव में एक सम्मेलन का आयोजन किया गया था, जिसमें विशेष समुदाय के विरोध में बयान दिए गए. इसके बाद विशेष समुदाय के लोगों ने इसका विरोध दर्ज कराया था. इसके बाद एक और बयान सामने आया, जिसका वीडियो भी लोगों के बीच में है. इस वीडियो में विशेष समुदाय के साथ खाना-पीना और लेन-देन पूरी तरह बंद करने की अपील की गई है. साथ ही जरूरत के लिए भी केवल एक समाज से ही मदद करने या मांगने की अपील की है.

वीडियो के वायरल होने के बाद से ही गांव में विशेष समुदाय के 10 परिवारों के सामाजिक बहिष्कार की बात तेज हो गई है. जानकारी के अनुसार, बीते जनवरी में लांजी थाना क्षेत्र के घोटी-नंदोरा गांव में 27 जनवरी को हुए एक धार्मिक सम्मेलन के समापन के बाद, सम्मेलन में दिए गए विशेष समुदाय विरोधी बयान को लेकर उस समाज के लोग आपत्ति दर्ज कराने पहुंचे थे. इसके बाद मामला पुलिस थाने तक जा पहुंचा. इसी बीच गांव में एक बैठक रखी गई, जिसका एक वीडियो वायरल हुआ है.

वीडियो में कहा गया कि एक खास वर्ग के सम्मेलन में गांव के ही दूसरे समाज के लोगों ने विघ्न डाला और गाली-गलौच की. इसी को लेकर सम्मेलन करने वाले धर्म के लोग नाराज हैं. इसी वजह से विशेष समुदाय के परिवारों से लेना-देना, खाना-पीना बंद करने की बात कही गई और सभी जरूरतें केवल अपने समाज से ही पूरी करने का आह्वान किया गया. इसके बाद गांव के हालात बदल गए और विशेष समुदाय के 10 परिवारों को कथित बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है. इससे उन परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी और आजीविका पर सीधा असर पड़ा है. गांव का माहौल तनावपूर्ण हो गया है और गलियां सुनसान पड़ी हैं.

विशेष समुदाय के बहिष्कार के बाद उस समाज के एक बस चालक को स्कूल बस चलाने से रोक दिया गया है. साथ ही एक इलेक्ट्रिशियन भी पिछले 7 दिनों से बेरोजगार हैं. उन्हें काम नहीं दिया जा रहा है, जिससे उन्हें लॉकडाउन जैसा महसूस हो रहा है.

महिला खैरून निशा ने बताया कि उस दिन मुस्लिम समाज को लेकर दिए गए वक्तव्य पर चर्चा करने के लिए वे लोग वहां गए थे. उन्होंने कहा कि वहां जाना उनकी गलती थी. उन्होंने बताया कि आज तक गांव का माहौल कभी ऐसा नहीं रहा. सभी लोग मिल-जुलकर रहते थे, लेकिन उस घटना के बाद बहिष्कार किए जाने से उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

दूसरी ओर, सम्मेलन में कथित तौर पर विशेष समुदाय के विरोध में खड़े होने और बहिष्कार का समर्थन करने वाले नेतराम तिड़के ने बहिष्कार की बात से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि गांव में विशेष समुदाय के किसी भी व्यक्ति का बहिष्कार नहीं किया गया है. विशेष समाज के लोगों ने स्वयं अपनी गलती स्वीकार की है और यह उनकी मानसिक सोच है. उन्होंने दावा किया कि गांव में सभी लोग मिल-जुलकर रह रहे हैं.

हालांकि, परिवारों के बहिष्कार के मामले में पूर्व विधायक किशोर समरिते ने आपत्ति दर्ज कराई है. उन्होंने घोटीनंदोरा गांव में 10 परिवारों के कथित सामाजिक बहिष्कार को गंभीर बताते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय से जांच कराने की मांग की है.

पूर्व विधायक ने अपने बयान में कहा कि ग्राम घोटी और नंदोरा पिछले दो वर्षों से गौहत्या और गोमांस से जुड़े मामलों को लेकर चर्चा में रहे हैं, लेकिन अब 10 परिवारों के सामाजिक बहिष्कार का मामला सामने आना अत्यंत चिंताजनक है. उन्होंने आरोप लगाया कि गांव में विशेष समुदाय को किराने का सामान देने से मना किया जा रहा है, नाई द्वारा दाढ़ी या बाल काटने से इनकार किया जा रहा है और कोटवार के माध्यम से गांव में मुनादी कर सामाजिक बहिष्कार की घोषणा कराई गई है.

पूर्व विधायक ने पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने, बहिष्कृत परिवारों को संविधान द्वारा प्रदत्त नागरिक अधिकार तत्काल बहाल कराने और दंगा भड़काने की कोशिश करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है.

‘स्कूल बस ड्राइवर को चलाने से रोका, दुकान से भी नहीं दे रहे सामान…’ बालाघाट के इस गांव में 10 परिवारों का बहिष्कार


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