Nation- मोबाइल ऐप के जरिए निवेश, 3200 करोड़ की ठगी…नोएडा से ऋषिकेश राय अरेस्ट; फर्जीवाड़े की पूरी कहानी- #NA

ऋषिकेश राय नोएडा से गिरफ्तार
मोबाइल ऐप पर कुछ ही महीनों में निवेश की रकम कई गुना बढ़ती दिखती थी. स्क्रीन पर मुनाफा लगातार ऊपर जा रहा था, निवेशक खुश थे और नए लोगों को भी जोड़ रहे थे. लेकिन एक दिन अचानक ऐप बंद हो गया, निकासी रुक गई और मध्य प्रदेश सहित देश के हजारों लोगों के करोड़ों रुपये हवा हो गए. लगभग 3200 करोड़ रुपये की ऐसे ठगी की गई है. स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े ऋषिकेश राय को नोएडा से गिरफ्तार कर लिया है. कोर्ट ने उसे सात दिन की रिमांड पर भेज दिया है.
जांच में सामने आया है कि यॉर्कर एफएक्स और यॉर्कर कैपिटल नाम से फर्जी निवेश योजनाएं चलाई जा रही थीं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और टेलीग्राम ग्रुप के जरिए लोगों को 6 से 8 प्रतिशत फिक्स रिटर्न का लालच दिया जाता था. शुरुआत में निवेश के लिए 18 हजार रुपये की रजिस्ट्रेशन फीस ली जाती थी. ऐप पर निवेश की गई रकम तेजी से बढ़ती हुई दिखाई जाती थी. महज दो से तीन महीनों में 18 हजार रुपये को बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये तक दिखाया जाता, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत होता और वे और पैसा लगाने लगते.
3200 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी
लेकिन जैसे ही निवेशक मुनाफा निकालने की कोशिश करते, प्लेटफॉर्म तकनीकी समस्या का हवाला देकर बंद हो जाता. कुछ समय बाद ऐप पूरी तरह गायब कर दिया जाता. एसटीएफ के अनुसार, इस तरह देशभर से 3200 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई. जांच में यह भी सामने आया है कि करीब 1000 करोड़ रुपये का लेनदेन रैनेट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी के जरिए हुआ. इसी कंपनी से ऋषिकेश राय का नाम जुड़ा है. उस पर 30 हजार रुपये का इनाम घोषित था.
ऋषिकेश को पकड़ने के लिए एसटीएफ की टीम ने दिल्ली-एनसीआर में कई दिनों तक सर्च ऑपरेशन चलाया. दिल्ली, गुरुग्राम और नोएडा में लगातार छापेमारी की गई. किन्डेंट बिजनेस सॉल्यूशन और रैनेट टेक्नोलॉजी से जुड़े ठिकानों पर दबिश दी गई. इससे पहले किन्डेंट के डायरेक्टर राहुल यादव और पंकज गुंजन समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. हालांकि ऋषिकेश करीब पांच महीने तक फरार रहकर एजेंसियों को चकमा देता रहा.
कैसे हुआ खुलासा?
जांच एजेंसियों के मुताबिक, पूरे नेटवर्क का मुख्य सरगना लविश चौधरी है, जो दुबई से इस गिरोह को संचालित कर रहा था. उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया है. बताया जा रहा है कि जब एक प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई हुई, तो गिरोह ने तुरंत नया ऐप और नया सिस्टम तैयार कर लिया. इस बड़े घोटाले का खुलासा इंदौर निवासी ईशान सलूजा की शिकायत से हुआ, जिन्होंने 20.18 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगाया था. इसी शिकायत ने राष्ट्रीय स्तर पर फैले 3200 करोड़ रुपये के निवेश घोटाले की परतें खोल दीं. अब तक इस मामले में 9 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और कई राज्यों में जांच जारी है.
मोबाइल ऐप के जरिए निवेश, 3200 करोड़ की ठगी…नोएडा से ऋषिकेश राय अरेस्ट; फर्जीवाड़े की पूरी कहानी
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