Nation- 35 लाख रुपए में 200 साल पहले बनी थी लाल बारादरी… इतिहासकार ने बताई पूरी कहानी- #NA

लखनऊ विश्वविद्यालय कैंपस में स्थित ऐतिहासिक लाल बारादरी के मस्जिट का गेट बंद होने कारण कल छात्रों ने जमकर हंगामा किया था. छात्रों ने आरोप लगाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन मस्जिद को सील कर रहा है. लाल बारादरी का निर्माण 1827 के आस-पास नवाब नसीरुद्दीन हैदर द्वारा कराया गया था. उस समय यह इमारत करीब 35 लाख में बनकर तैयार हुई थी.
इतिहासकार रवि भट्ट के बताया कि लाल ईंटों से बने 12 दरवाजों वाला भवन होने के कारण इसे लाल बारादरी नाम दिया गया था. सत्तर के दशक में लखनऊ विश्वविद्यालय के ही छात्र रहे हैं रवि भट्ट, नब्बे के दशक में प्राध्यापक भी रहे थे. उन्होंने कहा कि कभी इस भवन को लेकर कोई विवाद नहीं रहा. इसके भीतर बैंक, स्टाफ हॉल और कैंटीन भी हुआ करती थी.
उन्होंने बताया कि नमाज पढ़ने की बात पहले भी सुनी, लेकिन तक जर्जर नहीं थी और कभी कोई विवाद भी नहीं हुआ. लखनऊ में लाल बारादरी में छतर मंदिर के सामने असली लाल बारादरी है, जिसे छठे नवाब शादत अली खान ने बनवाया था जहां नवाबों की ताजपोशी भी हुई थी.
बादशाह बाग बुलाते थे नवाब नसरुद्दीन हैदर
रवि भट्ट के अनुसार लखनऊ विश्वविद्यालय में जो लाल बारादरी है. उसे नवाब नसरुद्दीन हैदर बादशाह बाग बुलाते थे. उन्होंने इसे बनवाया था और ये 1827 में बनकर तैयार हुआ था.
35 लाख रुपए में बनी थी लाल बारादरी
उन्होंने बताया कि इसको बनाने में तब 35 लाख रुपए का खर्च आया था. तब ये बारादरी बादशाह बाग का एक हिस्सा हुआ करता था. 1857 में भारत के स्वतंत्रता सेनानियों का इस पर कब्जा हुआ था. इतिहास में मस्जिद होने का कोई जिक्र नहीं है, लेकिन जिस तरह का स्ट्रक्चर है. इसमें नमाज की कोई जगह हो सकती है.
जर्जर है इमारत
रवि भट्ट के बताया कि लाल बारादरी आम लोगों के द्वारा दिया गया नाम है. नसीरुद्दीन हैदर अवध के आठवें नवाब थे. उन्होंने बताया कि बिल्डिंग को बहुत पहले ही खतरनाक घोषित किया जा चुका है. इसका 70 फीसदी हिस्सा कभी भी गिर सकता है.
35 लाख रुपए में 200 साल पहले बनी थी लाल बारादरी… इतिहासकार ने बताई पूरी कहानी
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