खबर शहर , Agra News: चंबल में सावन के गीतों सा सुकून देती हैं सेवन सिस्टर बर्ड्स की चहचाहट – INA

बाह। चंबल सेंक्चुअरी की बाह रेंज में प्रजनन सीजन (जुलाई-सितंबर) में जंगल बेबलर की चहचाहट सावन के गीत जैसा सुकून दे रही है। सिमराई की स्नेह कुमारी, पार्वतीपुरा की संगीता कहती हैं कि बीहड़ से लेकर गांव के बाग-बगीचे तक फुदकती इन चिड़ियों के दृश्य मंत्रमुग्ध कर देते हैं।
भारत, नेपाल, भूटान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका में पाई जाने वाली जंगल बेबलर को 7 से अधिक के समूह में रहने की वजह से अंग्रेजों ने सेवन सिस्टर बर्ड्स नाम दिया है। चंबल क्षेत्र में इन्हें सतबहना नाम से जाना जाता है। चंबल सेंक्चुअरी के रेंजर कुलदीप सहाय पंकज ने बताया कि जंगल बेबलर का वैज्ञानिक नाम आर्ग्या स्ट्रिएटा है, जबकि स्थानीय नाम घेंघा है।
जैतपुर के रेंजर राजवीर सिंह ने बताया कि प्रजनन सीजन होने की वजह से बेबलर चिड़ियों का बीहड़ से लेकर गांव तक फुदकते हुए दिखना आम बात है। भूरे मटमैली सी रंगत लिए जंगल बेबलर की आंखें पीली होती हैं। आंखों में काले रंग का मोती होता है। शरीर रुई के समान पंख जैसा दिखता है। नर-मादा एक से होते हैं। इनकी लंबाई 9 से 24 सेमी तक होती है। कीड़े, अनाज और छोटे फल इनका भोजन होते हैं। कीट पतंगे इन्हें नुकसान नहीं पहुंचा पाते हैं।
ये भी हैं चंबल में मौजूद
ग्रे बेबलर- इनका वैज्ञानिक नाम अर्ग्या माल्कोमी है। इनकी पूंछ लंबी, शरीर भूरे रंग का होता है। पंख मलाईदार होते हैं। पंखों पर सफेद धारियां होती हैं।
कॉमन बेबलर- इनका वैज्ञानिक नाम आर्ग्या कॉडाटा है। पूंछ लंबी, पतली, भूरे रंग की होती है, ऊपरी पंख पर धारियां होती हैं। नीचे का भाग बिना धारी वाला हल्के रंग का होता है।