खबर शहर , UP: एनओसी के फेर में फंसा बैराज और यमुना रिवरफ्रंट, बजट भी हुआ आवंटित; सीएम योगी से ये है आगरा की मांग – INA

 सीएम साहब, ताजमहल के डेढ़ किमी. . नौ साल पहले आपने ही नगला पैमा में रबर डैम का शिलान्यास किया था, लेकिन एनओसी न मिल पाने के कारण पहले रबर डैम का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया। वहीं अब बैराज भी एनओसी के चक्रव्यूह में उलझा हुआ है। ताज से रामबाग के बीच यमुना नदी पर रिवरफ्रंट बनाने और स्टेडियम की योजनाएं फाइलों में ही अटकी हैं।

शहर के पर्यटन उद्यमियों और पर्यावरणप्रेमियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगरा आगमन से पहले नगला पैमा में यमुना नदी पर बैराज बनाने का काम जल्द शुरू कराने और ताज से रामबाग के बीच यमुना रिवरफ्रंट बनाने की मांग उठाई है। टूरिज्म गिल्ड ऑफ आगरा के अध्यक्ष रहे राजीव सक्सेना ने कहा कि नौ साल पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ही शिलान्यास किया था और 250 करोड़ रुपये का बजट अब तक आवंटित किया जा चुका है, लेकिन एक ईंट भी नहीं लग पाई। मुख्यमंत्री बैराज का काम जल्द शुरू कराएं।

होटल एसोसिएशन अध्यक्ष राकेश चौहान के मुताबिक केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा सरकार है, लेकिन 9 साल में एनओसी नहीं मिल पाई। केंद्रीय जल आयोग ने 9 साल बाद रबर डैम की जगह बैराज बनाने का सुझाव दिया। अब फिर से बैराज के लिए एनओसी लेनी होगी, जिसमें फिर से समय लगेगा। यह आगरा से छलावा है।

गाइड एसोसिएशन अध्यक्ष शमशुद्दीन के मुताबिक यमुना नदी पर रिवरफ्रंट बनाने के लिए नौ साल पहले ताजमहल पर किए गए दौरे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए थे। तब पर्यटन विभाग ने यमुना नदी के दोनों किनारों पर रिवरफ्रंट बनाने की योजना बना ली, लेकिन इसकी डीपीआर फाइलों से बाहर निकल ही नहीं पाई। ताजगंज प्रोजेक्ट बनाने वाले आर्किटेक्ट आशीष श्रीवास्तव से रिवरफ्रंट गार्डन का सर्वे कराकर योजना बनवाई गई थी, लेकिन नौ साल से प्रस्ताव और योजना का पता नहीं। यही हाल अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम का है, जिसे बीसीसीआई की सहमति के बाद भी आगरा में बनाया नहीं गया। बीसीसीआई ने आगरा में जमीन देने के लिए कहा था, जबकि निर्माण का खर्च बोर्ड उठाने वाला था।

10 साल बाद भी शिवाजी म्यूजियम अधूरा

वर्ष 2016 में ताजमहल पूर्वी गेट रोड पर सपा सरकार ने मुगल म्यूजियम का निर्माण शुरू कराया था, लेकिन सरकार बदलते ही इसका नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी म्यूजियम कर दिया गया। यह 10 साल में भी पूरा नहीं हो पाया। इसका काम अगले साल तक पूरा होने के आसार हैं।

 


Credit By Amar Ujala

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