खबर शहर , यूपी: आलू की बुवाई से पहले बीज उपचार क्यों है जरूरी, उद्यान विशेषज्ञ ने किसानों को दी ये सलाह – INA

आलू की फसल को बीजजनित रोगों से बचाने और पौधों की शुरुआती वृद्धि बेहतर करने के लिए बुवाई से पहले बीज-कंदों का उपचार जरूरी है। कृषि विज्ञान केंद्र के उद्यान विशेषज्ञ अनुपम दुबे ने किसानों को बीज उपचार की विधि बताते हुए स्वस्थ और रोगमुक्त कंदों के चयन पर जानकारी दी है।

अनुपम दुबे ने बताया कि कोल्ड स्टोरेज से आलू निकालने के तुरंत बाद बीज उपचार न करें। कंदों को सात से 10 दिन तक ठंडी और छायादार जगह पर रखने के बाद उपचारित करें। इसके लिए सबसे पहले स्वस्थ कंदों का चयन करें और कटे हुए कंदों को छाया में सुखाएं। इसके बाद 0.25 प्रतिशत मैंकोजेब या कार्बेन्डाजिम के घोल में 10 से 15 मिनट तक डुबोकर रखें। इस प्रक्रिया के बाद कंदों को सुखाकर बुवाई करें।

उन्होंने बताया कि कंदों को तीन प्रतिशत बोरिक अम्ल के घोल में आधे घंटे तक डुबोने से भी सड़न और फफूंदजनित रोगों से बचाव में मदद मिलती है। जैविक खेती करने वाले किसान ट्राइकोडर्मा विरिडे या स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस जैसे जैविक विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं। उद्यान विशेषज्ञ के अनुसार, बीज उपचार से बीजजनित रोगों का संक्रमण कम करने और पौधों की शुरुआती वृद्धि बेहतर करने में मदद मिलती है। इससे फसल की सेहत और उत्पादन में सुधार की संभावना रहती है।


Credit By Amar Ujala

Back to top button