SC ने I-PAC रेड मामले पर लगातार दूसरे दिन सुनवाई:बंगाल सरकार बोली- भाजपा कोर्ट कार्यवाही को सोशल मीडिया पर हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही- INA NEWS

सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन I-PAC रेड मामले पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ ED की याचिका पर सुनवाई जारी है। ED की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें पेश कीं। बंगाल सरकार की ओर से सीनियर एडवोक्ट मेनका गुरुस्वामी पेश हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक राजनीतिक पार्टी कोर्ट की कार्यवाही को सोशल मीडिया पर हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कोर्ट से इस पर रोक लगाने की मांग की। जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कल कहा था कि जब कोई मुख्यमंत्री किसी केंद्रीय एजेंसी की चल रही जांच में दखल देता है, तो इसे केंद्र और राज्य सरकार के बीच का विवाद नहीं कहा जा सकता। दरअसल 8 जनवरी को ED ने कोलकाता स्थित पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी I-PAC डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और दफ्तर पर छापा मारा था। इस दौरान ममता वहां पहुंचीं और कुछ फाइलें लेकर चली गईं। इसके बाद ED जांच में बाधा डालने के आरोप में ममता और बंगाल पुलिस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची। ममता की 4 दलीलें सुप्रीम कोर्ट के 4 कमेंट ऐसे समझें… तृणमूल के लिए I-PAC इतनी जरूरी क्यों I-PAC रेड मामला : 2,742 करोड़ का मनी लॉन्ड्रिंग केस I-PAC यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी है। यह राजनीतिक दलों के लिए बड़े स्तर पर चुनावी अभियानों का काम करती है। कंपनी और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन पर करोड़ों रुपए के कोयला चोरी घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। CBI ने इस मामले में 27 नवंबर 2020 को FIR दर्ज की थी। पूरा मामला ₹2,742 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। आरोप है कि ₹20 करोड़ हवाला के जरिए I-PAC तक ट्रांसफर हुए। ED ने 28 नवंबर 2020 को इसकी जांच शुरू की थी। 8 जनवरी 2026 को ED ने कोलकाता में I-PAC और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर छापा मारा था।
Source link
यह पोस्ट सबसे पहले भस्कर डॉट कोम पर प्रकाशित हुआ हमने भस्कर डॉट कोम के सोंजन्य से आरएसएस फीड से इसको रिपब्लिश करा है |


