Sport : 'मेरे पैदा होने से पहले ही…', मुकुल चौधरी ने खुद सुनाई संघर्ष की कहानी, कैसे आर्थिक तंगी से उबरकर हासिल किया ये मुकाम #INA

कोलकाता नाइट राइडर्स के साथ खेले गए मुकाबले में लखनऊ सुपर जायंट्स की जीत के हीरो रहे मुकुल चौधरी. 21 साल के मुकुल चौधरी का नाम सुर्खियों में बना हुआ है और हर तरफ उनकी तारीफ हो रही है. गुरुवार की रात KKR के खिलाफ मुकुल ने छक्के-चौकों की बारिश कर 54 रन बनाए और LSG को सीजन की दूसरी जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई. इस प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच के अवॉर्ड से नवाजा गया. फिर मुकुल ने POTM अवॉर्ड को जीतने के बाद पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन में स्ट्रल की कहानी सुनाई. उन्होंने बताया कैसे वह इस मुकाम तक पहुंचे हैं…
मुकुल चौधरी ने सुना संघर्ष की कहानी
कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ मैच विनिंग प्रदर्शन करने वाले मुकुल चौधरी ने 27 गेंदों पर 54 रन बनाए, जिसमें उन्होंने 7 छक्के और 2 चौके लगाए. इस मैच जिताऊ पारी के लिए जब मुकुल चौधरी को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया, तब उन्होंने अपनी स्ट्रगल स्टोरी के बारे में बताया. कैसे उन्होंने आर्थिक तंगी के कारण 12-13 साल की उम्र से क्रिकेट खेलना शुरू किया और फिर आज वह इस मुकाम तक पहुंचे.
पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन में मुकुल चौधरी ने कहा, “मेरी क्रिकेट की जर्नी तो मेरे जन्म लेने से भी पहले शुरू हो गई थी. मेरे पिता का सपना था कि उनका बेटा एक दिन क्रिकेट खेलेगा. लेकिन उस समय हमारी पारिवारिक आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, इसलिए मैं जल्दी क्रिकेट खेलना शुरू नहीं कर पाया. मैंने लगभग 12-13 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया. उस समय ज्यादा क्रिकेट एकेडमी नहीं थीं.”
𝗔𝗕𝗦𝗢𝗟𝗨𝗧𝗘𝗟𝗬 𝗦𝗘𝗡𝗦𝗔𝗧𝗜𝗢𝗡𝗔𝗟 😮
One word for this knock?
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— IndianPremierLeague (@IPL) April 9, 2026
“सीकर में एक अकादमी थी, SBS क्रिकेट अकादमी, जो अभी-अभी खुली थी और मैंने वहां लगभग 5-6 साल तक ट्रेनिंग की. उसके बाद मैं जयपुर चला गया क्योंकि अगर आपको हाई लेवल पर खेलना है, तो आपको आगे बढ़ना ही होगा. मैं पिछले चार सालों से जयपुर में प्रैक्टिस कर रहा हूं. फिर पिछले साल मुझे लगा कि टी20 क्रिकेट, खासकर इस स्तर पर, काफी तेज हो गया है, इसलिए मुझे और मैच का अनुभव चाहिए था. मैं 3-4 महीने गुरुग्राम में रहा और दिल्ली में मैच खेले, जिससे मुझे तेज गति वाले क्रिकेट के अनुकूल ढ़लने में काफी मदद मिली. यही मेरी यात्रा रही है.”
पिता को कब हुआ अहसास
आपके पिताजी को कब एहसास हुआ कि वह कुछ बड़ा बन सकते हैं? इसपर मुकुल ने कहा, “मेरे पिताजी मुझे उत्तर प्रदेश के खिलाफ एक अंडर-19 मैच के बारे में बताते हैं – यह कम स्कोर वाला मैच था, उस मैच में किसी और ने खास प्रदर्शन नहीं किया, लेकिन मैंने रन बनाए. उस दिन उन्हें पूरा भरोसा था कि मैं यह कर सकता हूं.”
Mukul Choudhary dedicated his yesterday’s knock . his father and his idol MS Dhoni. 🥹❤️ pic.twitter.com/WGkGKQ9dvi
— ` (@WorshipDhoni) April 10, 2026
इससे पहले लाइट्स के नीचे ज्यादा न खेलने के बारे में बात करते हुए मुकुल ने कहा, “लाइट्स के नीचे यह मेरा सिर्फ दूसरा मैच है. प्रेशर तो है, सर. लेकिन मुझे लगता है कि भगवान ने मुझे यह मौका दिया है, इसलिए मुझे अपनी काबिलियत पर पूरा भरोसा है. यह एक ऐसा मौका है जहां आप कुछ बड़ा बन सकते हैं या अपना नाम कमा सकते हैं. इसलिए मैं मौके पर ध्यान देता हूं, दबाव पर नहीं.”
बचपन से ही विस्फोटक बल्लेबाजी करते हैं मुकुल
Pressure? What pressure? 🤷♂️
🎥 🗣️ It’s all about belief and rising . the occasion for Mukul Choudhary 🙌
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— IndianPremierLeague (@IPL) April 9, 2026
छक्के मारने की तैयारी के बारे में मुकुल ने कहा, “बचपन से ही मैं आक्रामक क्रिकेट खेलता आया हूं. मैं हमेशा से ही हिट करने वाला खिलाड़ी रहा हूं. अब मैं अपने खेल को बेहतर समझता हूं. अगर गेंद मेरे एरिया में आती है, तो मुझे पता है कि मुझे उसे हिट करना ही है.”
झुंझुनू के बहुत से लोग भारतीय सेना में सेवा करते हैं और आज रात आपने एक जवान की तरह खेला.. “इसपर मुकुल ने कहा, जी हां… यह मेरे खून में है. मैं यहां खेल रहा हूं, लेकिन वे सीमा पर देश की सेवा करते हैं.”
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'मेरे पैदा होने से पहले ही…', मुकुल चौधरी ने खुद सुनाई संघर्ष की कहानी, कैसे आर्थिक तंगी से उबरकर हासिल किया ये मुकाम
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