Sport : Explainer: क्रिकेट में कैसे आया था डकवर्थ लुइस नियम? जानें कैसे करता है काम #INA

Explainer: क्रिकेट अपने नियमों के हिसाब से खेला जाता है. यह एक ऐसा खेल है जिसके हर पहलू के लिए लिखित नियम मौजूद हैं. इस खेल को खेलने के लिए कई नियम बनाए हैं, जिसमें डकवर्थ-लुईस नियम भी शामिल है. जब भी बारिश या किसी और कारण से मैच प्रभावित होता है तो डकवर्थ-लुईस नियम सुनते को मिलता है. हर क्रिकेट फैंस को डकवर्थ-लुईस के नियम के बारे में पता होगा कि यह कब इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि डकवर्थ-लुईस नियम कब बना था और यह काम कैसा करता है, तो चलिए इस ऑर्टिकल में जानते हैं.
1992 क्रिकेट वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल रहा था विवादित
साल 1992 क्रिकेट वर्ल्ड कप का ऐतिहासिक सेमीफाइनल मैच इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका के बीच ऑस्ट्रेलिया के सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (SCG) में खेला गया था. इस मैच में साउथ अफ्रीका ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया था. जिसके बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड की टीम ने निर्धारित 45 ओवरों में 6 विकेट खोकर 252 रन बनाए. यह मुकाबला 50 ओवर का ही खेला जाना था, लेकिन साउथ अफ्रीका की धीमी ओवर गति और टूर्नामेंट के एक और अजीबोगरीब नियम के कारण इसे घटाकर 45 ओवर का कर दिया गया था. दरअसल 1992 वर्ल्ड कप का नियम यह था कि पहली पारी के लिए निर्धारित समय खत्म होने तक बॉलिंग करने वाली टीम जितनी ओवर डाल पाएगी, उतने ही ओवर का मैच कर दिया जाएगा. साउथ अफ्रीका 45 ओवर ही डाल सकी थी.
‘मोस्ट प्रोडक्टिव ओवर्स’ की वजह से साउथ अफ्रीका को मिली थी हार
इंग्लैंड के दिए 253 रनों की लक्ष्य का पीछा करने उतरी साउथ अफ्रीका ने मजबूत स्थिति में नजर आ रही थी. एंड्रयू हडसन (46 रन) और जोंटी रोड्स (43 रन) ने अच्छी पारी खेली थी. वहीं ब्रायन मैकमिलन और डेविड रिचर्डसन क्रीज पर खड़े थे. जब साउथ अफ्रीका को जीत के लिए 13 गेंदों पर 22 रनों की जरूरत थी, तभी तेज बारिश शुरू हो गई. उस वक्त ‘डकवर्थ-लुईस नियम’ नहीं था. तब ‘मोस्ट प्रोडक्टिव ओवर्स’ (Most Productive Overs – MPO) का नियम लागू था.
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विवादित था ‘मोस्ट प्रोडक्टिव ओवर्स’ का नियम
‘मोस्ट प्रोडक्टिव ओवर्स’ नियम काफी विवादित था. ‘मोस्ट प्रोडक्टिव ओवर्स’ नियम के चलते बारिश के कारण जितने ओवरों में कटौती की जाती थी, उतने ही ओवर विपक्षी टीम के उन ओवरों से घटा दिए जाते थे, जिनमें उन्होंने सबसे कम रन बनाए. इंग्लैंड ने अपनी पारी के 2 ओवर में सबसे कम रन बनाए थे. एक ओवर मेडन रहा था, जबकि दूसरे ओवर में सिर्फ एक रन बनाए थे.
साउथ अफ्रीका को 1 गेंद पर मिला था 22 रनों का लक्ष्य
‘मोस्ट प्रोडक्टिव ओवर्स’ के हिसाब से बारिश के कारण साउथ अफ्रीका के 2 ओवर यानी 12 गेंद कम कर दिए गए, लेकिन टारगेट में सिर्फ एक रन घटाया गया. मैच जब दोबारा शुरू हुआ तो साउथ अफ्रीका को जीत के लिए सिर्फ 1 गेंद पर 22 रनों का लक्ष्य मिला, जिसे हासिल करना नामुमकिन था. नतीजा यह हुआ कि साउथ अफ्रीका को सेमीफाइनल मैच में 19 रनों से हार का सामना करना पड़ा था. जबकि इंग्लैंड फाइनल में पहुंच गई, जहां पाकिस्तान ने इमरान खान की कप्तानी में इंग्लैंड को हराकर पहला वर्ल्ड कप जीता था. इस घटना के बाद क्रिकेट जगत में इस नियम की भारी आलोचना हुई थी. क्रिकेट फैंस ‘मोस्ट प्रोडक्टिव ओवर्स’ नियम से काफी नाराज थे.
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डकवर्थ-लुईस नियम कब बना?
इसके बाद डकवर्थ-लुईस नियम आया. ब्रिटिश सांख्यिकी विशेषज्ञ फ्रैंक डकवर्थ और टोनी लुईस ने मिलकर आंकड़ों का विश्लेषण कर एक नया गणितीय फॉर्मूला तैयार किया. क्रिकेट के इस फॉर्मूला को 1997 में आधिकारिक तौर पर अपनाया गया. इसके बाद साल 1999 में इसे आईसीसी से मंजूरी मिल गई. फिर यह ‘डकवर्थ-लुईस नियम’ बन गया.
साल 2014 में डकवर्थ-लुईस नियम बना DLS
वहीं साल 2014 में इस नियम में कुछ सुधारों के बाद इसका नाम DLS कर दिया गया. दरअसल साल 2014 में जब फ्रैंक डकवर्थ और टोनी लुईस रिटायर हो गए, तब ऑस्ट्रेलियाई डेटा विशेषज्ञ स्टीवन स्टर्न इसके कस्टोडियन बने. उन्होंने आधुनिक क्रिकेट (विशेषकर टी-20 क्रिकेट) के हिसाब से इस फॉर्मूले को अपडेट किया, जिसके बाद फ्रैंक डकवर्थ और टोनी लुईस के सम्मान में ‘S’ जोड़कर इसका नाम DLS नियम कर दिया गया.
कैसे काम करता है डकवर्थ-लुईस नियम?
डकवर्थ-लुईस (DLS) नियम बचे हुए ओवर और बचे हुए विकेट के गणित के फॉर्मूला पर काम करता है. मैच की शुरुआत में दोनों टीमों के पास 100% संसाधन होते हैं. जब भी बारिश के कारण मैच रुकता है, तो आईसीसी का कंप्यूटर सॉफ्टवेयर यह देखता है कि बाधा के समय किस टीम के पास कितने ओवर और कितने विकेट बचे थे. आसान भाषा में कहे तो किस टीम के पास कितने प्रतिशत संसाधन बाकी थे. अगर पहली पारी के बाद दूसरी टीम के ओवर कम कर दिए जाते हैं, तो उसके कम हुए संसाधनों के अनुपात में जीत का लक्ष्य भी घटा दिया जाता है. वहीं अगर दूसरी पारी के बीच में ही मैच रूक जाए, तो सॉफ्टवेयर उस समय के विकेट और ओवर के हिसाब से एक सुरक्षित स्कोर (पार स्कोर) तय करता है और जो टीम उस स्कोर से आगे होती है, उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है.
6 साल पहले ग्रीम स्मिथ ने DLS पर दी थी अपनी राय
साउथ अफ्रीका के पूर्व कप्तान ग्रीम स्मिथ ने 6 साल पहले एक बयान दिया था, जिसमें उन्होंने ‘डकवर्थ-लुईस नियम’ को लेकर अपनी राय दी थी. ग्रीम स्मिथ ने कहा था “मुझे लगता है कि डकवर्थ-लुईस का समय अब पूरा हो चुका है. मेरा मानना है कि बढ़ते हुए स्कोर, लोगों की सोच और आज के समय में जो लक्ष्य हासिल किए जा रहे हैं, उन्हें देखते हुए खेल अब इस नियम से काफी आगे निकल चुका है. विशेष रूप से टी20 मैचों में इस नियम की रिव्यू करने की सख्त जरूरत है.”
Graeme Smith, SA’s director of cricket, feels the rain rule is at least two decades out of datehttps://t.co/gOBKY4ptvS pic.twitter.com/vNaprSIQzE
— ESPNcricinfo (@ESPNcricinfo) August 18, 2020
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