Sport : Explainer: जब पैसे न होने पर इस एक्ट्रेस ने बचाया था भारतीय महिला क्रिकेट टीम का अस्तित्व, हवाई टिकट के लिए दी थी पूरी फीस #INA

- शुरुआत में BCCI के अंतर्गत नहीं आती थी भारतीय महिला क्रिकेट टीम
- शुरुआती दौर में भारतीय महिला क्रिकेट का था बुरा हाल
- भारतीय महिला क्रिकेट टीम की संकटमोचन बनी मंदिरा बेदी
- मंदिरा बेदी ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम को दान की थी अपनी पूरी फीस
- मंदिरा बेदी ने बिना किसी पब्लिसिटी के महिला क्रिकेट को दिया आर्थिक सहायता
- मंदिरा बेदी ने क्रिकेट में की थी महिला एंकरिंग की शुरुआत
- साल 2006 में BCCI का हिस्सा बनी भारतीय महिला क्रिकेट टीम
- भारतीय महिला क्रिकेट टीम को पुरुषों की तरह मिलता है सुविधा
Explainer: भारतीय महिला क्रिकेट टीम हर दिन सफलता की एक नई कहानी लिख रही हैं और ग्लोबल स्टेड पर अपनी धाक जमा रही है. पिछले साल भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की, जब भारतीय टीम हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में महिला वनडे वर्ल्ड कप 2025 का खिताब जीतकर वर्ल्ड चैंपियन बनी. बीसीसीआई अब पुरुषों की तरह ही महिला क्रिकेट टीम को भी मैच फीस और पूरी सुविधाएं देती है, लेकिन एक वक्त था जब भारतीय महिला क्रिकेट टीम का अस्तित्व में था और उसे बचाने के लिए एक एक्ट्रेस सामने आई थी. हम बात कर रहे हैं मंदिरा बेदी की, जिनका भारतीय महिला क्रिकेट टीम को बनाए रखनें में सबसे बड़ा योगदान रहा है.
शुरुआत में BCCI के अंतर्गत नहीं आती थी भारतीय महिला क्रिकेट टीम
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की शुरुआत साल 1973 में हुई थी. उस वक्त महिला क्रिकेट टीम भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अंतर्गत नहीं आता था. साल 1973 में महिला क्रिकेट टीम के लिए एक संघ बनाया गया था, जिसका नाम ‘भारतीय महिला क्रिकेट संघ’ (WCAI) था. इसके संस्थापक सचिव महेंद्र कुमार शर्मा थे. इस संगठन का हेड क्वार्टर लंबे समय तक लखनऊ में रहा. शुरुआती दौर, या यूं कहें कि साल 2006 तक भारतीय महिला क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों को बुनियादी सुविधाओं और पैसों के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता था.
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शुरुआती दौर में भारतीय महिला क्रिकेट का था बुरा हाल
साल 2000 दशक की बात है जब कोई भी भारतीय महिला क्रिकेट टीम स्पॉन्सर या सपोर्ट नहीं कर रहा था. खिलाड़ियों को मूल सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ता था. तब एक्ट्रेस मंदिरा बेदी सामने आईं थी और उन्होंने महिला क्रिकेट टीम के अस्तित्व को बनाए रखने में अपनी अहम भूमिका निभाईं.
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की संकटमोचन बनी मंदिरा बेदी
मंदिरा बेदी ने पर्दे के पीछे या यूं कहें कि ‘इनविजिबल स्पॉन्सर’ बनकर भारतीय महिला क्रिकेट के वजूद को बनाए रखने में बड़ा योगदान दिया था. साल 2003 से 2005 तक जब भारतीय महिला क्रिकेट बड़ी आर्थिक तंगी से गुजर रही थी, तब मंदिरा बेदी ने बिजनेस जगत में अपने संपर्कों का इस्तेमाल किया और महिला क्रिकेट को स्पॉन्सर दिलाया था.
मंदिरा बेदी ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम को दान की थी अपनी पूरी फीस
बात साल 2003 की है जब भारतीय महिला क्रिकेट टीम को फोर-नेशन टूर्नामेंट यानी 4 देशों की सीरीज के लिए इंग्लैंड के दौरे पर जाना था, लेकिन WCAI के पास खिलाड़ियों के पास हवाई टिकट के लिए पैसे नहीं थे. यह बात मंदिरा बेदी को पता चली. वो एक प्रसिद्ध ज्वैलरी ब्रांड (Asmi) की ब्रांड एंबेसडर बनीं. उस विज्ञापन से हुई अपनी पूरी कमाई को मंदिरा बेदी ने महिला क्रिकेट टीम को दान कर दिया, ताकि टीम सीरीज के लिए इंग्लैंड जा सकें. इस तरह मंदिरा बेदी पर्दे के पीछे रहकर महिला टीम की स्पॉन्सर बनी रहीं, ताकि टीम का मनोबल ना टूटे और टीम को बिखरने से बचाया जा सके.
मंदिरा बेदी ने बिना किसी पब्लिसिटी के महिला क्रिकेट को दिया आर्थिक सहायता
मंदिरा बेदी के बिना किसी पब्लिसिटी के किए गए सपोर्ट दशकों तक एक अनसुनी कहानी बना रहा, क्योंकि उन्होंने कभी भी पब्लिसिटी पाने की कोशिश नहीं की. बहुत सालों के बाद पूर्व महिला क्रिकेटरों और खेल विश्लेषकों ने इस बात का खुलासा किया कि यदि संकट के दौर में मंदिरा बेदी ने आर्थिक सहायता नहीं की होती तो शायद आज भारतीय महिला क्रिकेट का अस्तित्व खतरे में पड़ जाता.
मंदिरा बेदी ने क्रिकेट में की थी महिला एंकरिंग की शुरुआत
मंदिरा बेदी को क्रिकेट से काफी लगाव था. उन्होंने उसी साल 2003 पुरुष क्रिकेट वर्ल्ड कप में ‘एक्स्ट्रा इनिंग्स’ शो होस्ट (मेजबानी) करके क्रिकेट एंकरिंग की शुरुआत की थी. हालांकि उस समय क्रिकेट को पूरी तरह से पुरुषों का खेल माना जाता था. ऐसे में एक महिला एंकर होने की वजह से मंदिरा बेदी को काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था, लेकिन उन्होंने अपनी आलोचनाओं पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और शानदार काम करती रहीं. उनके शानदार काम से देखते हुए महिलाओं में ना सिर्फ क्रिकेट देखने का बल्कि खेलने का भी क्रेज बढ़ा. दुनिया में महिला क्रिकेट को देखने को नजरिया भी बदला.
साल 2006 में BCCI का हिस्सा बनी भारतीय महिला क्रिकेट टीम
इसके बाद इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल ने इसमें हस्तक्षेप किया. ICC के निर्देशों के बाद ‘भारतीय महिला क्रिकेट संघ’ यानी WCAI को नवंबर 2006 में आधिकारिक तौर पर बीसीसीआई में विलय किया गया है. यानी WCAI पूरी तरह से BCCI का हिस्सा बन गया. इसके बाद से भारतीय महिला क्रिकेट टीम पूरी तरह बीसीसीआई के अंतर्गत आ गई.
भारतीय महिला क्रिकेट टीम को पुरुषों की तरह मिलता है सुविधा
इसके बाद महिला क्रिकेट टीम को भी बेहतर ट्रेनिंग सुविधाएं मिलने लगी. खिलाड़ियों को नेशनल क्रिकेट एकेडमी (NCA) में जाने की अनुमति भी मिली. साल 2015 में बीसीसीआई ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम के लिए सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट जैसी सुविधाएं शुरू की. आज के वक्त में महिला टीम को भी पुरुष टीम की तरह मैच फीस भी दी जाती है. भारतीय महिला टीम दुनियाभर में देश का नाम रौशन कर रही हैं. इसी महीने 12 जून से महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत होगी. अब वनडे वर्ल्ड कप के बाद भारतीय महिला क्रिकेट टीम की नजर टी20 वर्ल्ड कप पर होगी. हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारतीय टीम इस टूर्नामेंट में खिताब जीतने के इरादे से उतरेगी.
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- शुरुआत में BCCI के अंतर्गत नहीं आती थी भारतीय महिला क्रिकेट टीम
- शुरुआती दौर में भारतीय महिला क्रिकेट का था बुरा हाल
- भारतीय महिला क्रिकेट टीम की संकटमोचन बनी मंदिरा बेदी
- मंदिरा बेदी ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम को दान की थी अपनी पूरी फीस
- मंदिरा बेदी ने बिना किसी पब्लिसिटी के महिला क्रिकेट को दिया आर्थिक सहायता
- मंदिरा बेदी ने क्रिकेट में की थी महिला एंकरिंग की शुरुआत
- साल 2006 में BCCI का हिस्सा बनी भारतीय महिला क्रिकेट टीम
- भारतीय महिला क्रिकेट टीम को पुरुषों की तरह मिलता है सुविधा
Explainer: जब पैसे न होने पर इस एक्ट्रेस ने बचाया था भारतीय महिला क्रिकेट टीम का अस्तित्व, हवाई टिकट के लिए दी थी पूरी फीस
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