Sport : न्यूजीलैंड की पिचों पर क्यों बरस रहे हैं भारतीय बल्लेबाजों के रन? जानिए तेज गेंदबाजों के स्वर्ग में बैटर्स के दबदबे का पूरा सीक्रेट #INA

IND vs NZ: भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड को उसी के घर में लगातार 3 टी20 मैचों में हराकर सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली है. वेलिंगटन में खेले गए तीसरे टी20 मुकाबले में जब न्यूजीलैंड ने भारत के सामने 199 रनों का पहाड़ जैसा लक्ष्य रखा, तो लगा कि कीवी गेंदबाजों की गति और स्विंग के आगे युवा भारतीय टीम बिखर जाएगी. लेकिन मैदान पर कुछ और ही नजारा देखने को मिला. स्टार ओपनर अभिषेक शर्मा के तूफानी शतक और महज 15 साल के वैभव सूर्यवंशी की 45 रनों की आक्रामक पारी के दम पर भारत ने इस विशाल लक्ष्य को बेहद छोटा कर दिया. इससे पहले भी 2 मैचों में रनों की बारिश देखने को मिली थी. क्रिकेट फैंस के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि जिस न्यूजीलैंड की पिचों को तेज गेंदबाजों का स्वर्ग कहा जाता है, जहां दुनिया के बड़े से बड़े बल्लेबाज स्विंग और बाउंस के आगे घुटने टेक देते हैं, वहां भारत के ये युवा खिलाड़ी इतनी आसानी से रनों की बरसात कैसे कर रहे हैं? तो चलिए इस आर्टिकल में समझते हैं.

मॉडर्न क्रिकेट का निडर काउंटर अटैक

पारंपरिक क्रिकेट में हमेशा यह सिखाया जाता था कि जब भी आप न्यूजीलैंड, इंग्लैंड या ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर जाएं, तो शुरुआती ओवरों में बेहद संभलकर खेलें. पहले के बल्लेबाज पिचों की स्विंग और सीम मूवमेंट को समझने के लिए शुरुआती 5-6 ओवर सिर्फ गेंद को छोड़ने और क्रीज पर टिकने में बिताते थे. इसका फायदा उठाकर विदेशी गेंदबाज बल्लेबाजों पर पूरी तरह हावी हो जाते थे. लेकिन आज की नई जनरेशन के बल्लेबाज, जैसे अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी, पूरी तरह से एक अलग सोच के साथ मैदान पर उतरते हैं. वे पिच की स्विंग को देखकर डरने या रक्षात्मक होने के बजाय पहली ही गेंद से गेंदबाजों पर काउंटर-अटैक करने की रणनीति अपनाते हैं.

जब आप दुनिया के बेहतरीन स्विंग गेंदबाजों पर पहले ही ओवर से बड़े शॉट्स खेलना शुरू कर देते हैं तो फिर गेंदबाजों का आत्मविश्वास डगमगा जाता है और वे अपनी लाइन-लेंथ खो बैठते हैं. वेलिंगटन में पावरप्ले के भीतर बिना कोई विकेट खोए रिकॉर्ड 118 रन जड़ना इसी निडर और आधुनिक सोच का सबसे बड़ा प्रमाण है. 

न्यूजीलैंड के छोटे मैदान पर टाइमिंग और रफ्तार का सही इस्तेमाल

न्यूजीलैंड के मैदान (जैसे वेलिंगटन और ऑकलैंड) काफी छोटे हैं. यहां की साइड बाउंड्री इतनी छोटी होती है कि अगर गेंद बल्ले पर ठीक से न भी आए, तो भी आसानी से छक्का हो जाता है. इसके अलावा, न्यूजीलैंड की पिचों पर गेंदबाजों के पास काफी रफ्तार होती है. युवा भारतीय बल्लेबाजों ने इसी रफ्तार को अपना हथियार बना लिया. उन्हें शॉट मारने के लिए अलग से ताकत लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ी. उन्होंने सिर्फ सही टाइमिंग के साथ गेंद को बाउंड्री के पार पहुंचा दिया. अभिषेक शर्मा ने इसी चालाकी से अपनी 113 रनों की पारी में 11 छक्के जड़ दिए.

सख्त पिचों पर टप्पा खाकर सीधे बल्ले पर आती है गेंद

भारत में आमतौर पर लाल या चिकनी मिट्टी की पिचें होती हैं. इन पिचों पर गेंद बाउंस होने के बाद थोड़ी धीमी हो जाती है या रुककर आती है. ऐसी पिचों पर टाइमिंग बैठाना मुश्किल होता है और बल्लेबाजों को छक्का मारने के लिए अपनी पूरी ताकत लगानी पड़ती है. जबकि न्यूजीलैंड की पिचें खास काली मिट्टी से बनाई जाती हैं, जिससे वे बेहद सख्त और पक्की हो जाती हैं. इन पिचों पर गेंद टप्पा खाने के बाद धीमी नहीं पड़ती, बल्कि और तेजी से सीधे बल्लेबाज की कमर या सीने की ऊंचाई तक आती है.

अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी जैसे आक्रामक बल्लेबाजों को ऐसी ही तेज रफ्तार और उछाल पसंद होती है. जब गेंद बिना रुके सीधे बल्ले पर आती है, तो कट, पुल, हुक और फ्लिक जैसे शॉट्स खेलना बेहद आसान हो जाता है. यही वजह है कि हमारे युवा खिलाड़ी वहां रनों की बरसात कर रहे हैं. 

IPL का अनुभव और इंटरनेशनल गेंदबाजों का सामना

पहले नए खिलाड़ियों को विदेशी पिचों पर ढलने में बहुत समय लगता था क्योंकि उन्होंने भारत में वैसी तेज पिचों पर नहीं खेला होता था, लेकिन आईपीएल ने इस पूरी सोच को बदल दिया है. भले ही इन युवाओं के पास इंटरनेशनल मैचों का अनुभव कम हो, लेकिन वे आईपीएल में पिछले कई सालों से दुनिया के सबसे खतरनाक और तेज गेंदबाजों का सामना कर रहे हैं.

जब कोई खिलाड़ी अपनी घरेलू लीग में ही दुनिया के सबसे बेस्ट बॉलर्स की 150 किमी/घंटा की रफ्तार वाली गेंदों पर छक्के मार चुका होता है, तो इंटरनेशनल मैच में न्यूजीलैंड की तेज पिचें भी उसे नहीं डरा पातीं. उनका हौसला पहले से ही सातवें आसमान पर होता है. उन्हें अच्छे से पता होता है कि किस गेंदबाज की क्या कमजोरी है और उस पर कैसे रन कूटने हैं.

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कीवी स्पिनर्स का बेअसर होना और कंडीशंस का फायदा

भारतीय उपमहाद्वीप की पिचों पर स्पिनर्स सबसे बड़ा खतरा होते हैं, क्योंकि वहां गेंद बहुत ज्यादा घूमती है. लेकिन न्यूजीलैंड में कहानी बिल्कुल उल्टी है. वहां की पिचें पक्की होती हैं और टूटती नहीं हैं, जिसकी वजह से स्पिन गेंदबाजों को टर्न नहीं मिलता.

भारतीय बल्लेबाजों के लिए यह लॉटरी लगने जैसा है. जब बीच के ओवरों में न्यूजीलैंड के स्पिनर्स गेंदबाजी करने आते हैं, तो हमारे बल्लेबाज बिना किसी डर के क्रीज का इस्तेमाल करते हैं और लंबे-लंबे छक्के उड़ाते हैं. स्पिनर्स के खिलाफ आउट होने का खतरा न के बराबर होने के कारण, भारतीय टीम मिडिल ओवरों में भी 10 या 11 की रन-रेट से रन बना रही है. यही वजह है कि बीच के ओवरों में न्यूजीलैंड के कप्तान बिल्कुल लाचार नजर आते हैं.

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