Sport : टेस्ट क्रिकेट में क्यों इस्तेमाल होती है रेड बॉल, जानिए क्या हैं इसके मुख्य कारण? #INA

Red ball in Test Cricket: टेस्ट क्रिकेट को दुनिया का सबसे पुराना क्रिकेट फॉर्मेट माना जाता है. टेस्ट क्रिकेट से ही क्रिकेट के खेल की शुरुआत हुई. इसके बाद वनडे और फिर टी20 फॉर्मेट आया. आज के समय में टेस्ट क्रिकेट वनडे और टी20 फॉर्मेट की तुलना में थोड़ा कम लोकप्रिय नजर आता है, लेकिन क्रिकेट के जानकार आज भी टेस्ट क्रिकेट को पसंद करते हैं. वनडे और टी20 क्रिकेट व्हाइट बॉल से खेला जाता है. वहीं टेस्ट क्रिकेट लाल बॉल से खेला जाते है. 

अब सवाल उठता है कि टेस्ट क्रिकेट रेड बॉल से ही क्यों खेला जाता है. टेस्ट मैच में लाल बॉल का इस्तेमाल ही क्यों किया जाता है. टेस्ट में रेड बॉल यूज करने का प्रमुख कारण क्या है. इस बारे में बहुत सारे क्रिकेट फैंस नहीं जानते हैं. अगर आप भी उनमें शामिल हैं, जिन्हें नहीं पता है कि टेस्ट क्रिकेट में रेड बॉल इस्तेमाल क्यों होती है. तो आज हम आपको इस बारे में ही बताने वाले हैं.

टेस्ट क्रिकेट क्यों होता है रेड बॉल का इस्तेमाल

टेस्ट मैच पांच दिनों तक खेले जाने वाला एक मुकाबला होता है. इस में हर टीम को दो बार बल्लेबाजी करने होती है. अंत में दोनों पारी के आधार पर मैच का नतीजा निकाला जाता है. अगर मुकाबले में दोनों टीमों की दोनों पारियों के समाप्त होने के बाद भी हार और जीत का नतीजा नहीं निकल पाता है तो टेस्ट मैच को ड्रॉ माना जाता है. इस मैच में रेड बॉल का इस्तेमाल किया जाता है. टेस्ट क्रिकेट में रेड बॉल का इस्तेमाल करने की अलग-अलग वजह हैं. आइए उनके बारे में विस्तार से जातने हैं.

1 – दिन के उजाले में बेहतर विजिबिलिटी

टेस्ट मैच अक्सर दिन में खेला जाता है. ये मैच सुबह शुरू होता है और शाम तक खेला जाता है. ऐसे में रेड बॉल दिन के उजाले में आसानी से दिखाई देती है. लाल बॉल की विजिबिलिटी दिन में सफेद गेंद की तुलना में बेहतर होती है. इसलिए टेस्ट क्रिकेट में रेड बॉल का इस्तेमाल किया जाता है. 

2 – गेंद की चमक और सीम लंबे समय तक बने रहना

रेड बॉल की चमक सफेद बॉल की तुलना में काफी बेहतर होती है. इस बॉल की सतह और सीम सफेद गेंद की तुलना में अधिक समय तक चलती है. सफदे बॉल जल्दी ही अपनी स्थिति खो देती है, जबकि रेड बॉल लगभग 80 ओवर तक अपनी स्थिति में बनी रहती है और उनकी चमक पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता है. 

Red ball in Test Cricket
Red ball in Test Cricket Photograph: (AI)

3 – बॉल का जल्दी पुराना नहीं होना

सफेद बॉल 50 ओवर या उससे पहले ही पुरानी हो जाती है, जबकि रेड बॉल पुरानी होने में काफी समय लेती है. सफेद बॉल की तुलना में रेड बॉल पुरानी होने में अधिक समय लेती है. रेड बॉल लगभग 80 से 90 ओवर तक पुरानी नहीं होती है. रेड बॉल जब नई होती है, तभी भी काफी ज्यादा असरदार होती है. वहीं जब ये बॉल पुरानी हो जाती है, तब भी उपयोगी साबित होती है.

4 – गेंदबाजों को अधिक मदद मिलना

टेस्ट क्रिकेट में इस्तेममाल होने वाली रेड बॉल गेंदबाज को अधिक मदद देती है. ये व्हाइट बॉल की तुलना में अधिक सीम और स्विंग करती है. इसका फायदा गेंदबाज उठाते हैं. रेड बॉल की सीम और चमक अपेक्षाकृत अधिक समय तक बनी रहती है. ऐसे में तेज गेंदबाज स्विंग और सीम मूवमेंट का फायदा उठाते हैं. वहीं ये रेड बॉल पुरानी होने के बाद रिवर्स स्विंग की संभावना को बढ़ देती है. इससे गेंदबाजों को मदद मिलती है. 

वहीं रेड बॉल सफेद बॉल की तुलना में अधिक स्पिन भी होती है. ऐसे में स्पिन गेंदबाज भी मैच के दौरान इसका फायदा उठाते हैं. बॉल की सीम बनी रहने के चलते बॉल स्पिनर्स को ग्रिप करने में मदद करती है. रेड बॉल से उनके विकेट लेने के चांस बढ़ जाते हैं.

5 – व्हाइट जर्सी के संग बेहतर तालमेल

टेस्ट मैच में खिलाड़ी सफेद कलर की किट में नजर आते हैं. ऐसे में सफेद जर्सी के साथ लाल गेंद का कंट्रास्ट बेहतर होता है. रेड बॉल व्हाइट ड्रेस के साथ काफी ज्यादा विजिबल होती है. जिससे खिलाड़ियों को गेंद देखने में आसानी होती है. इसलिए भी टेस्ट क्रिके में सफेद बॉल की जगह पर रेड बॉल का इस्तेमाल किया जाता है.

6 – टेस्ट क्रिकेट की परंपरा

टेस्ट क्रिकेट की जब से शुरूआत हुई है, तब से ही टेस्ट मैच रेड बॉल के साथ खेला जाता है. क्रिकेट की शुरुआत से ही इस मैच में रेड बॉल का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में अब रेड बॉल टेस्ट क्रिकेट की परंपरा बन गई है. सफदे गेंद की तुलना में रेड बॉल अब इस फॉर्मेट की पहचान और परंपरा का हिस्सा बन गई है. क्रिकेट प्रेमी इसे टेस्ट क्रिकेट के क्लासिक स्वरूप का हिस्सा भी मानते हैं. 

7 – बल्लेबाज और गेंदबाज के बीच संतुलन

टेस्ट क्रिकेट में इस्तेमाल होने वाली रेड बॉल बल्लेबाज और गेंदबाजों दोनों के बीच बेहतर संतुलन दिखाती है. रेड बॉल की शुरुआत में गेंदबाजों को मदद मिलती है. वहीं बॉल पुरानी होने पर बल्लेबाज आसानी से रन बनाते हैं. ऐसे में रेड बॉल के साथ बल्लेबाज और गेंदबाज दोनों के बीच बेहतर संतुलन देखा जाता है. टेस्ट क्रिकेट में रेड बॉल दोनों पक्षों को बराबरी का मौका देती है और खेल के संतुलन पर भी ध्यान देती है.

टेस्ट क्रिकेट में पिंक बॉल का भी होता है इस्तेमाल

हालांकि आज के टेस्ट क्रिकेट में भी अधुनिकता आ गई है. अब डे-नाइट टेस्ट मैच भी होने लगे हैं. डे-नाइट टेस्ट मैचों में लाल गेंद का इस्तेमाल नहीं होता है. बल्कि डे-नाइट टेस्ट में पिंक बॉल का इस्तेमाल होता है. लाइट की रोशनी में रेड बॉल की विजिबिलिटी स्पष्ट नहीं होती है. वहीं पिंक बॉल शाम के समय और फ्लडलाइट्स के अंदर ज्यादा विजिबल होती है.

Pink ball
Pink ball Photograph: (AFP)

इसलिए डे-नाइड टेस्ट मैच में रेड बॉल की वजह पिंक बॉल का इस्तेमाल होता है. लेकिन आज भी टेस्ट मैच रेड बॉल से ही ज्यादातर खेले जाते हैं, कुछ इक्का-दुक्का मैच ही सिर्फ पिंक बॉल से खेले जाते हैं.

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टेस्ट क्रिकेट में क्यों इस्तेमाल होती है रेड बॉल, जानिए क्या हैं इसके मुख्य कारण?





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