Sports- उधार लेकर खेलने को मजबूर बेटियां!: अंडर-20 विश्व हैंडबाल चैंपियनशिप के लिए टीम एकत्र कर रही तीन-तीन लाख रुपये -#INA

एक ओर ओलंपिक और एशियाड पदक के लिए खिलाड़ियों पर जमकर धनवर्षा हो रही है। वहीं, एक विश्व चैंपियनशिप में खेलने के लिए बेटियों को लोन और उधार लेकर राशि जुटानी पड़ रही है। जी हां, यह सच्चाई है कि चीन के जिनझोंग में 24 जून से होने जा रही हैंडबाल की अंडर-20 विश्व चैंपियनशिप में 14 सदस्यीय महिला टीम तीन-तीन लाख रुपये अपने पास से देकर खेलने जा रही है। टीम के सदस्यों का हाल यह है कि किसी के पिता नहीं तो किसी के पिता का डायलिसिस चल रहा है और किसी के पिता 10 से 15 हजार रुपये की नौकरी कर हैं, लेकिन विश्व चैंपियनशिप में खेलने का सपना पूरा करने के लिए टीम का प्रत्येक सदस्य तीन-तीन लाख रुपये जुटाने में लग गया है। ऐसा इसलिए हुआ है क्यों कि भारतीय हैंडबाल संघ की खेल मंत्रालय से मान्यता रद्द होने के कारण इस दौरे को सरकारी खर्च की मंजूर नहीं मिली है।

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मुस्कान-स्वाति के नहीं हैं पिता

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हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर की मुस्कान और स्वाति के घर की हालत बहुत खराब है। दोनों के ही पिता का निधन हो चुका है, लेकिन वह किसी तरह पैसा जुटाने में लगी हैं। वहीं लखनऊ की सौम्या के पिता की सप्ताह में दो बार डायलिसिस होती है, लेकिन उनका भाई उधार लेकर बहन को चीन भेजने के प्रयास कर रहा है। हिमाचल की शिवानी के पिता 10 से 15 हजार की नौकरी करते हैं, लेकिन बेटी को विश्व चैंपियनशिप में भेजने को जी जान से जुटे हैं। कुछ ऐसी ही कहानी टीम की अन्य सदस्य नेहा, प्रद्यन्या, सुजाता और अमृता की भी है। बावजूद इसके ये सदस्य किसी तरह विश्व चैंपियनशिप में खेलने के प्रयास में लगी हैं।

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हैंडबाल संघ का दावा हमारे पैसा पैसा नहीं

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बीते वर्ष अंडर-20 एशियाई चैंपियनशिप में भारतीय टीम ने पांचवां स्थान हासिल कर विश्व चैंपियनशिप के लिए क्वालिफाई किया। तब टीम साई के खर्च पर कजाखस्तान गई थी। खेल मंत्रालय से प्रतिबंधित हैंडबाल संघ को अंतरराष्ट्रीय हैंडबाल महासंघ से मान्यता है। उसने इसी भारतीय संघ से टीम भेजने को कहा है। ग्रुप भी तय हो चुके हैं। खेल मंत्रालय इस वर्ष फरवरी में भारतीय ओलंपिक संघ से देश में हैंडबाल की गतिविधियों के लिए तदर्थ समिति गठित करने को कहा चुका है, लेकिन समिति अब तक नहीं बनी है और न ही हैंडबाल संघ का विवाद सुलझाया गया है। हैंडबाल संघ का दावा है कि उनके पास इतना पैसा नहीं है कि वह अपने दम पर टीम को चीन भेज सकें। इस कारण उन्होंने राज्य संघों को टीम के प्रत्येक सदस्य का तीन-तान लाख रुपये का खर्च उठाने को कहा। राज्य संघों के पास भी पैसा नहीं है तो उन्होंने टीम के सदस्यों से यह राशि देने को कहा।

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साई से खर्च की मंजूरी नहीं मिलने के चलते हम टीम नहीं भेजना चाह रहे थे, लेकिन टूर्नामेंट से नाम वापस लेना संभव नहीं था। अंतरराष्ट्रीय महासंघ हमारे ऊपर बड़ा जुर्माना ठोक देता। हम भी पैसे की व्यवस्था कर रहे हैं जिससे बच्चों को कुछ पैसा वापस किया जा सके।-आनंदेश्वर पांडे, कार्यकारी निदेशक, हैंडबाल संघ   

Credit By Amar Ujala

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