Tach – अमेरिकी कोर्ट में मार्क जुकरबर्ग को इंस्टाग्राम डिजाइन पर घेरा! क्या बच्चों को जानबूझकर लगाई जा रही लत?

मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को अमेरिका की अदालत में सोशल मीडिया ट्रायल के दौरान तीखे सवालों का सामना करना पड़ा, जहां आरोप लगाया गया कि मेटा की प्लेटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम बच्चों को जानबूझकर लत लगाती हैं और उनकी मेंटल हेल्थ को नुकसान पहुंचाती हैं. यह ट्रायल लॉस एंजिल्स की अदालत में चला और बुधवार को ज़करबर्ग ने गवाही दी. ये मुकदमा एक 20 साल की लड़की के खिलाफ है, जिसे KGM कहा जा रहा है, वह कैलिफोर्निया की रहने वाली है.

लड़की का कहना है कि बचपन से सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से उसे लत लग गई, डिप्रेशन बढ़ा और सुसाइड के ख्याल आने लगे. उसने 6 साल की उम्र में यूट्यूब शुरू किया, 9 साल में इंस्टाग्राम, फिर टिकटॉक और स्नैपचैट भी यूज किया. यह पहला ऐसा केस है जिसमें हजारों मुकदमों में से एक फैसला आएगा, जो बाकी केसों के लिए मिसाल बनेगा. मेटा और गूगल की यूट्यूब दोनों पर आरोप है कि उन्होंने प्लेटफॉर्म्स को ऐसे डिजाइन किया कि बच्चे बार-बार वापस आएं और ज्यादा समय बिताएं, जिससे मेंटल हेल्थ खराब हुई.

कम उम्र पर भी ऐप देता है अनुमित?

मार्क जुकरबर्ग से वकील मार्क लेनियर ने कई सवाल किए. उन्होंने पूछा कि क्या इंस्टाग्राम एडिक्टिव है, मतलब लत लगाने वाला. इसपर जुकरबर्ग ने सीधा जवाब नहीं दिया, लेकिन कहा कि यूजर्स ज्यादा समय इसलिए बिताते हैं क्योंकि प्लेटफॉर्म वैल्यू देता है. वकील ने पुराने डॉक्यूमेंट्स दिखाए, जैसे 2015 में जब लड़की ने इंस्टाग्राम शुरू किया था, तब 4 मिलियन यूजर्स 13 साल से कम उम्र के थे और अमेरिका में 10-12 साल के 30 परसेंट बच्चे इंस्टाग्राम यूज कर रहे थे. उम्र वेरिफिकेशन पर सवाल हुआ, वकील बोले कि क्या 9 साल का बच्चा फाइन प्रिंट पढ़ेगा, क्या 13 साल से कम बच्चों को अनुमति है.

इसपर मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि कंपनी 13 साल से कम उम्र वालों को कभी अलाउ नहीं करती, लेकिन लोग झूठ बोलकर उम्र बढ़ा देते हैं और कंपनी अकाउंट हटा देती है. उन्होंने कहा कि उम्र चेक करना कॉम्प्लिकेटेड है, लेकिन कंपनी सुधार कर रही है और नए टूल्स ला रही है. मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि हमने इसे जल्दी नहीं किया, लेकिन अब सही जगह पर हैं और आगे और बेहतर करेंगे.

ट्रायल मार्च के अंत तक होगा खत्म

ट्रायल में मार्क जुकरबर्ग पहले कम बोलते रहे, लेकिन बाद में झुंझला गए. उन्होंने कहा कि कंपनी ने उम्र चेक करने में सुधार किया है लेकिन चुनौतियां हैं. ये भी बात सामने रखी गई कि लड़की की मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स पहले से थीं, इंस्टाग्राम इसका मुख्य कारण नहीं. कंपनी कहती है कि हम युवाओं की सुरक्षा के लिए कमिटेड हैं और क्लिनिकल एडिक्शन नहीं होता. इंस्टाग्राम के हेड एडम मोसेरी ने पहले गवाही दी थी कि सोशल मीडिया से क्लिनिकल लत नहीं लगती और कंपनी लोगों की भलाई को पहले रखती है. यह ट्रायल मार्च के अंत तक खत्म होगा और इसका फैसला सोशल मीडिया कंपनियों पर बड़ा असर डाल सकता है.

भारतीय पेरेंट्स के लिए भी यह सोचने वाली बात है क्योंकि भारत में भी बच्चे बहुत समय इंस्टाग्राम, फेसबुक पर बिताते हैं. फीचर्स जैसे इनफिनिट स्क्रॉल, नोटिफिकेशन, फिल्टर्स यूजर्स को बांधे रखते हैं. ज़करबर्ग ने पहले कांग्रेस में प्रभावित परिवारों से माफी मांगी थी लेकिन जिम्मेदारी नहीं ली. यहां ज्यूरी के सामने पहली बार गवाही दी. बच्चों की मेंटल हेल्थ सबसे जरूरी है, इसलिए ऐसे केस जरूरी हैं.


Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button