Technology, सीजेपी प्रोटेस्ट में पुलिस की वर्दी पर दिखा अनोखा कैमरा: हर हरकत को करता है कैद, जानें क्या है इसका काम – Delhi Police Body Cameras Jantar Mantar Cjp Protest Features And Benefits — INA

Mon, 12 Oct 2026 09:42 AM IST

सार

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP प्रोटेस्ट के दौरान भारी सुरक्षा बल के साथ पुलिस की वर्दी पर लगे ‘बॉडी कैमरे’ चर्चा का विषय बन गए। आखिर यह छोटा सा डिवाइस क्या है और कैसे काम करता है? क्या इससे प्रदर्शनकारियों की हर हरकत रिकॉर्ड होती है? आइए जानते हैं दिल्ली पुलिस के इस हाई-टेक कदम के फायदे और इसके स्मार्ट फीचर्स से जुड़ी हर जरूरी डिटेल।

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जानिए क्या होता है बॉडी कैमरे का काम। – फोटो : एआई

10 अक्तूबर को जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रोटेस्ट में दिल्ली पुलिस की वर्दी में लगा एक छोटा-सा डिवाइस काफी चर्चा में है। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद कुछ पुलिस कर्मी अपनी वर्दी पर इस डिवाइस को पहने दिखे। यदि आप भी सोच रहे हैं कि यह डिवाइस क्या है तो आपको बता दें कि यह कोई आम गैजेट नहीं बल्कि बॉडी कैम (Body Cam) है। इसका इस्तेमाल प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा साक्ष्य जुटाने के लिए किया जाता है। पुलिस का यह हाई-टेक कदम हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। आइए समझते हैं कि आखिर यह बॉडी कैमरा क्या है और पुलिस महकमे को इससे क्या फायदा होगा।

वर्दी में कैमरा लगाकर पहुंची पुलिस

प्रदर्शन शुरू होने से पहले दिल्ली में भारी संख्या में दिल्ली पुलिस के जवानों और पैरामिलिटरी फोर्स को तैनात किया गया था। इसी बीच पुलिसकर्मियों की वर्दी पर लगे बॉडी कैमरों ने ध्यान खींचा। ये कैमरे पुलिस कर्मियों की वर्दी पर शरीर के सामने लगाए जाते हैं, ताकि ड्यूटी के दौरान सामने होने वाली घटनाओं को कैमरे में कैद किया जा सके।

कैसे काम करते हैं पुलिस के बॉडी कैमरे?

केवल भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर की पुलिस बॉडी कैमरों का इस्तेमाल करती है। ये कैमरे आकार में छोटे होते हैं और इन्हें क्लिप की मदद से आसानी से वर्दी में लगाया जा सकता है। इसका मुख्य काम ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मी के ठीक सामने होने वाली हर गतिविधि का रियल-टाइम वीडियो रिकॉर्ड करना है। इन कैमरों में स्पष्ट ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग, अंधेरे में देखने के लिए नाइट वीजन और सटीक लोकेशन के लिए जीपीएस जैसे फीचर्स भी मिलते हैं। हालांकि, दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर पर इस्तेमाल किए जा रहे कैमरों के मॉडल्स और स्पेसिफिकेशन्स की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

पुलिस के लिए कैसे ‘गेम चेंजर’ साबित होगा यह डिवाइस?

  • ऐसे नाजुक मौकों पर बॉडी कैमरे में कैद फुटेज से यह साफ हो सकेगा कि मौके पर असल में क्या हुआ था और गलती किसकी थी।
  • विवाद के मामलों में शिकायतों की जांच करने और पुलिस की कार्रवाई का रिव्यू करने में यह वीडियो रिकॉर्डिंग बेहद मददगार साबित होती है।
  • कैमरे की मौजूदगी से दोनों ही पक्ष (पुलिस और पब्लिक) संयम बरतते हैं, जिससे फर्जी दावों और आरोपों से बचने में मदद मिलती है।

क्या 24 घंटे होती है रिकॉर्डिंग?

इसका जवाब है- नहीं। यह पूरी तरह से कैमरे के मॉडल और उसकी सेटिंग्स पर निर्भर करता है। आमतौर पर इसे जरूरत पड़ने पर या ड्यूटी के दौरान किसी खास परिस्थिति में ही ऑन किया जाता है। इसके अलावा, रिकॉर्ड हुए डेटा को सुरक्षित रखना और जांच के वक्त उसे पेश करना भी एक अहम प्रक्रिया है।

सिर्फ कैमरा ही नहीं, अन्य सबूत भी जरूरी

हालांकि बॉडी कैमरे पुलिस के लिए एक बेहतरीन तकनीकी टूल हैं, लेकिन सिर्फ कैमरे का फुटेज ही पूरी कहानी बयां नहीं करता। कैमरे का एंगल सीमित होता है, इसलिए घटना की तह तक जाने के लिए अन्य सबूतों और चश्मदीदों के बयानों को भी ध्यान में रखना जरूरी होता है।

कुल मिलाकर, पुलिस सिस्टम में यह स्मार्ट तकनीक तभी अपना पूरा असर दिखाएगी, जब इसका इस्तेमाल सही नीयत और पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाए।

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