यूपी- महाकुंभ-2025: प्रयागराज में ‘भगीरथ प्रयास’, भटक गई थी गंगा की 3 धाराएं… किया गया एक – INA

प्रयागराज में दिव्य और भव्य महाकुम्भ के लिए ‘भगीरथ प्रयास’ किया गया है. संगम नोज पर तीन धाराओं में बहने वाली गंगा नदी की धाराओं को एक धारा में प्रवाहित किया गया है.दरअसल, प्रयागराज में शास्त्री ब्रिज से लेकर संगम नोज तक गंगा नदी तीन धाराओं में विभाजित हो गई थीं, जिससे न केवल पवित्रता प्रभावित हो रही थी, बल्कि महाकुम्भ के आयोजन में भी कठिनाइयां आ रही थीं. ऐसे में दोबारा एक धारा में प्रवाहित कर गंगा को वास्तविक स्वरूप प्रदान किया गया है. अब संगम नोज पर गंगा नदी एक धारा में प्रवाहित हो रही हैं.

शास्त्री ब्रिज से लेकर संगम नोज तक गंगा नदी तीन धाराओं में बटी हुई थी, जिससे मेला क्षेत्र सीमित और अव्यवस्थित होता जा रहा था. ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर इस चुनौती से निपटने के लिए गंगा की बायीं और दायीं धाराओं को एक प्रवाह में लाने की योजना बनाई गई. योजना को साकार करने के लिए आईआईटी गुवाहाटी के विशेषज्ञ टीम की मदद ली गई. फिर संगम क्षेत्र के गंगा नदी प्रवाह के विस्तार के लिए तीन विशाल ड्रेजिंग मशीनों को लगाया गया है.

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शुरू में आईं कठिनाईयां

शुरुआत में गंगा नदी का तेज प्रवाह और ऊंचा जल स्तर इस कार्य में सबसे बड़ी बाधा साबित हो रहा था. इससे ड्रेजिंग मशीनों को तेज धारा में स्थिर रखना और नदी की दोनों धाराओं को बीच की धारा में मिलाना कठिन हो रहा था. इस पर शास्त्री ब्रिज के पास तीनों ड्रेजरों को अलग-अलग बिंदुओं पर लगाया गया. इसके साथ ही मेला क्षेत्र को विस्तार देने के लिए बालू की आवश्यकता थी.

कई उपकरणों का लिया सहारा

काम के दौरान गंगा नदी की प्रबल धारा के कारण भारी-भरकम ड्रेजिंग मशीनें बार-बार अस्थिर हो रही थीं. डिस्चार्ज पाइप मुड़ जाते और मशीनों को नियंत्रित करना कठिन हो जाता. टीम ने इन चुनौतियों का सामना करने के लिए बड़े एंकरों और पॉटून ब्रिज का सहारा लिया. मोटे रस्सों का उपयोग कर ड्रेजरों को नदी के किनारों से स्थिर रखा गया.

टीम ने नहीं खोया धैर्य, मिली सफलता

वहीं ड्रेजिंग कार्य तीन शिफ्टों में युद्धस्तर पर किया गया, जब तेज प्रवाह के कारण एक ड्रेजर का स्पड (समर्थन पिन) क्षतिग्रस्त हो गया और दूसरा किनारे की ओर धकेल दिया गया, तब भी टीम ने धैर्य नहीं खोया. चौथे ड्रेजर को तैनात किया गया, जिससे कार्य की गति और गुणवत्ता में सुधार हुआ. आखिर में गंगा की तीन धाराओं को एक प्रवाह में समाहित कर दिया गया. वर्तमान में गंगा नदी के एक धारा में प्रवाहित होने से मेला क्षेत्र को करीब 22 हेक्टेयर अतिरिक्त जगह मिली है.


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