UP News: पीलीभीत में वोटर लिस्ट गड़बड़ी पर दोनों SDM और कम्प्यूटर ऑपरेटर पर FIR – INA

उत्तर प्रदेश की पीलीभीत सदर विधानसभा सीट में मतदाता सूची में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद अब एफआईआर दर्ज हो गई है. कार्रवाई की जद में दो एसडीएम और एक कंप्यूटर ऑपरेटर आए हैं. पूरनपुर के एसडीएम मयंक गोस्वामी और अमरिया के एसडीएम हेमंत चौधरी को जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है, जबकि कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार की सेवा समाप्त कर दी गई है. कांग्रेस के मुताबिक, कुल 16,554 मतदाता प्रविष्टियों में गड़बड़ी हुई.

इस पूरे विवाद की शुरुआत कांग्रेस के उस आरोप से हुई, जिसमें दावा किया गया कि पीलीभीत सदर सीट पर 13,150 मतदाताओं के नाम बदल दिए गए, जबकि उनके EPIC नंबर और सीरियल नंबर वही रहे. पार्टी ने 804 मतदाताओं के नाम हटाने और करीब 2,600 नए नाम जोड़ने का भी आरोप लगाया. शुरुआती जांच में मतदाता पहचान पत्र के नंबर की ऑनलाइन जांच करने पर दूसरे मतदाता का विवरण सामने आने की पुष्टि हुई है.

कैसे सामने आया वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का मामला?

पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में गड़बड़ी का मामला अक्टूबर में सामने आया. 13 अक्टूबर को एक साइबर कैफे में मतदाता पहचान पत्र से जुड़ी जानकारी की जांच के दौरान कथित तौर पर नाम और पिता के नाम में अंतर दिखाई दिया. इसके बाद कांग्रेस से जुड़े लोगों ने दूसरे मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच शुरू की. कांग्रेस से जुड़े लोगों ने अपने परिचितों और परिवार के सदस्यों के मतदाता पहचान पत्रों का मिलान किया.

दावा है कि एक ही EPIC नंबर पर अलग-अलग नाम और विवरण दिखाई देने की शिकायतें सामने आईं. इसके बाद मामले की बड़े स्तर पर जांच शुरू की गई. कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार के नेतृत्व में 53 लोगों की टीम ने 96 घंटे तक काम किया. टीम ने पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र के सभी 419 बूथों की मतदाता सूची में दर्ज करीब 3 लाख 48 हजार 937 मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच की. पार्टी का दावा है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में मतदाता प्रविष्टियों में गड़बड़ी सामने आई.

13,150 नाम बदले, 804 हटाए और 2,600 जोड़े जाने का दावा

कांग्रेस ने 21 अक्टूबर को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस मामले को सार्वजनिक किया. पार्टी का दावा है कि 10 अप्रैल 2026 को जारी मतदाता सूची में दर्ज विवरणों और बाद के रिकॉर्ड की तुलना करने पर जुलाई से सितंबर के बीच 13,150 मतदाताओं के नाम बदलने की जानकारी मिली. कांग्रेस का कहना है कि इन प्रविष्टियों में EPIC नंबर और क्रम संख्या वही रहे, लेकिन मतदाता के नाम या पिता के नाम में बदलाव दिखाई दिया.

पार्टी ने यह भी दावा किया कि 804 ऐसे मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, जो उसके मुताबिक संबंधित क्षेत्र में अब भी रह रहे हैं. इसके अलावा करीब 2,600 ऐसे नाम जोड़े जाने का आरोप लगाया गया, जिनके बारे में कांग्रेस का दावा है कि संबंधित लोग उस इलाके में नहीं रहते. इन तीनों आंकड़ों को जोड़कर कांग्रेस ने 16,554 मतदाता प्रविष्टियों में गड़बड़ी का आरोप लगाया है. पार्टी ने यह भी दावा किया कि बदले गए नामों में मुस्लिम समुदाय के लोगों की संख्या अधिक है.

फॉर्म-7 और फॉर्म-8 को लेकर भी सवाल

कांग्रेस ने मतदाता सूची में कथित बदलावों की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं. पार्टी का दावा है कि 600 से ज्यादा मतदाताओं ने हलफनामे देकर कहा कि उन्होंने अपने विवरण में बदलाव के लिए फॉर्म-8 नहीं भरा था. वहीं, जिन मतदाताओं के नाम हटाए जाने की बात सामने आई, उनमें से कुछ ने कथित तौर पर फॉर्म-7 जमा करने से भी इनकार किया. फॉर्म-8 का इस्तेमाल मतदाता सूची में विवरण सुधारने या संबंधित बदलावों के लिए किया जाता है, जबकि फॉर्म-7 का संबंध मतदाता सूची में नाम हटाने की आपत्ति या अनुरोध से है.

चुनाव आयोग की जांच में क्या सामने आया?

कांग्रेस के आरोप सार्वजनिक होने के बाद चुनाव आयोग और जिला प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की. उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के निर्देश पर पीलीभीत के जिला निर्वाचन अधिकारी से रिपोर्ट मांगी गई. प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि कुछ मतदाताओं के EPIC नंबर ऑनलाइन सर्च करने पर दूसरे मतदाता का विवरण दिखाई दे रहा था. इस गड़बड़ी की पुष्टि के बाद चुनाव आयोग ने संबंधित निर्वाचन अधिकारियों और कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए.

अब पूरनपुर के एसडीएम मयंक गोस्वामी और अमरिया के एसडीएम हेमंत चौधरी को उनके मौजूदा चुनावी दायित्वों से हटाकर जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है. वहीं, मतदाता पंजीकरण केंद्र में काम करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार की सेवा समाप्त कर दी गई है. मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद कानूनी कार्रवाई भी आगे बढ़ेगी.

पीलीभीत में वोटर लिस्ट गड़बड़ी पर दोनों SDM और कम्प्यूटर ऑपरेटर पर FIR


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