UP News: Delhi Satya Niketan Incident: 5 मंजिला इमारत गिरी और टूट गए 5 परिवारों के सपने… कोई इकलौता भाई था तो कोई करियर बनाने पहुंचा था दिल्ली – INA

Delhi Building Collapsed News: दिल्ली के सत्य निकेतन में 5 मंजिला इमारत का ढहना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि कई परिवारों के सपनों के टूटने की दर्दनाक कहानी है. इस हादसे में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के रहने वाले छात्रों की जान चली गई. कोई रक्षाबंधन पर अपनी बहनों से राखी बंधवाकर दिल्ली लौटा था तो कोई कुछ दिन पहले ही छुट्टियां खत्म होने के बाद पढ़ाई के लिए वापस आया था. किसी ने दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लेकर बेहतर भविष्य का सपना देखा था तो कोई परिवार का इकलौता बेटा था, लेकिन रविवार को कुछ ही घंटों में इन परिवारों के सपने मलबे के नीचे दब गए. रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा हो चुका है. कुल 12 लोग मलबे में दबे थे. इनमें से 7 लोगों की मौत हो गई. मृतकों में 5 छात्र हैं… आइए जानते हैं इन छात्रों की कहानी…

रक्षाबंधन मनाकर दिल्ली पहुंचा अर्पित, कुछ घंटे बाद मौत की खबर

मध्य प्रदेश के देवास के कैलादेवी क्षेत्र स्थित जय बजरंग नगर का रहने वाला अर्पित जाज (18) भी इसी हादसे का शिकार हो गया. अर्पित पढ़ाई के सिलसिले में दिल्ली में रहता था. वह दिल्ली के आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज में बीकॉम सेकंड ईयर का छात्र था. रक्षाबंधन की छुट्टियां मनाने अर्पित देवास अपने घर आया था. परिवार के साथ त्योहार मनाने के बाद वह रविवार सुबह करीब 7 बजे दिल्ली पहुंचा था. घर से निकलते समय परिवार को क्या पता था कि कुछ ही घंटों बाद उनके बेटे के लिए दिल्ली में मौत इंतजार कर रही है.

Delhi Satya Niketan Incident

रविवार दोपहर सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई. अर्पित इसी इमारत में रह रहा था. हादसे की खबर मिलते ही उसके माता-पिता ने बेटे को फोन किया, लेकिन मोबाइल बंद मिला. बार-बार फोन करने के बावजूद जब अर्पित से बात नहीं हुई तो परिवार की चिंता बढ़ती चली गई. आखिरकार परिजन दिल्ली के लिए रवाना हो गए. मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अर्पित के भी अंदर फंसे होने की जानकारी मिली. काफी कोशिशों के बाद जब उसकी मौत की पुष्टि हुई तो देवास में उसके घर और आसपास के इलाके में मातम छा गया. जिस बेटे को परिवार कुछ घंटे पहले ही दिल्ली के लिए विदा करके आया था, उसी बेटे की मौत की खबर ने माता-पिता को तोड़कर रख दिया.

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अक्षत ने बेहतर भविष्य का सपना देखा था

इस हादसे ने मध्य प्रदेश के कटनी जिले के एक और परिवार को गहरा जख्म दिया है. कटनी की दुबे कॉलोनी निवासी अक्षत यादव (19) भी हादसे में जान गंवाने वाले छात्रों में शामिल था. अक्षत दिल्ली में रहकर दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम की पढ़ाई कर रहा था. परिवार और पड़ोसियों के मुताबिक, वह पढ़ाई में आगे बढ़कर अपने भविष्य को बेहतर बनाना चाहता था. इसी उम्मीद के साथ वह घर से दूर दिल्ली में रह रहा था. रविवार को जब सत्य निकेतन की करीब 40 साल पुरानी इमारत ढही तो अक्षत भी उसकी चपेट में आ गया. मलबे में दबने के बाद उसे गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। बाद में शव की पहचान अक्षत यादव के रूप में हुई.

Delhi Satya Niketan Incident (1)

जैसे ही परिवार को बेटे की मौत की खबर मिली, कटनी की दुबे कॉलोनी में चीख-पुकार मच गई. घर पर रिश्तेदार और पड़ोसी जुटने लगे. परिवार के लोग दिल्ली के लिए रवाना हो गए. पोस्टमार्टम के बाद अक्षत का शव परिजनों को सौंप दिया गया, जिसे गृह नगर लाने की तैयारी की गई. जिस घर में बेटे की पढ़ाई और भविष्य को लेकर बातें होती थीं, वहां अचानक मातम पसर गया.

3 दिन पहले दुर्ग से दिल्ली लौटा था युवराज

छत्तीसगढ़ के दुर्ग का रहने वाला युवराज सोनी (20) भी सत्य निकेतन हादसे में मारा गया. युवराज दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू कॉलेज में बीकॉम सेकंड ईयर का छात्र था और दिल्ली में बॉयज पीजी में रहता था. कॉलेज की छुट्टियों के दौरान युवराज दुर्ग स्थित अपने घर आया था. छुट्टियां खत्म होने के बाद वह करीब तीन दिन पहले ही दिल्ली लौटा था. परिवार को क्या पता था कि बेटे का दिल्ली लौटना उसके जीवन का आखिरी सफर साबित होगा.

Delhi Satya Niketan Incident (2)

रविवार को हादसे की जानकारी मिलते ही युवराज के परिजन दुर्ग से दिल्ली के लिए रवाना हो गए. बेटे की मौत की खबर सामने आने के बाद उसके दोस्तों और परिचितों में भी शोक की लहर है. एक तरफ परिवार बेटे के लौटने का इंतजार कर रहा था, दूसरी तरफ दिल्ली में मलबे के नीचे उसकी जिंदगी की तलाश चल रही थी. रेस्क्यू टीम रेस्क्यू डॉग और कैमरों की मदद से मलबे में फंसे लोगों को तलाश रही थी.

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4 बहनों का इकलौता भाई था पवन

उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के दिबियापुर कस्बे का एक परिवार इस हादसे के बाद सदमे में है. यहां के रिटायर्ड होम्योपैथी फार्मासिस्ट विशंभर सिंह का इकलौता बेटा पवन कुमार (17) भी इस हादसे में जान गंवा बैठा. पवन ने दिबियापुर के सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज से इंटर की पढ़ाई पूरी की थी. इसी साल 20 जुलाई को उसका दिल्ली विश्वविद्यालय में बीएससी कंप्यूटर साइंस में दाखिला हुआ था. परिवार को बेटे से बड़ी उम्मीदें थीं. वह पढ़-लिखकर अपना भविष्य बनाना चाहता था. पवन चार बहनों के बीच इकलौता भाई था. बहनों के लिए वह सिर्फ भाई नहीं, बल्कि परिवार की उम्मीद और सहारा था.

बहनों से राखी बंधवाकर गया था पवन

पवन की कहानी इस हादसे को और भी मार्मिक बना देती है. रक्षाबंधन के मौके पर वह घर आया था. बहनों से राखी बंधवाई. परिवार के साथ समय बिताया और जन्माष्टमी का पर्व भी मनाया. इसके बाद शनिवार को वह दिल्ली के लिए रवाना हुआ. परिवार को लगा कि बेटा पढ़ाई के लिए वापस जा रहा है और जल्द ही छुट्टियों में फिर घर आएगा, लेकिन रविवार को दिल्ली पहुंचने के कुछ ही समय बाद जिस हॉस्टल में पवन रह रहा था, उसकी पांच मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई.

Delhi Building Collapsed News

हादसे की सूचना मिलते ही परिवार में बेचैनी फैल गई. पिता विशंभर सिंह बेटे को लेकर बेहद परेशान हो गए. दिल्ली में रह रही उनकी बेटी प्रियांशी हॉस्टल पहुंची और भाई की तलाश में जुट गई. वह घंटों मलबे के आसपास भाई को खोजती रही. देर रात परिवार को वह खबर मिली, जिसका किसी ने सपने में भी अंदाजा नहीं लगाया था.. पवन अब इस दुनिया में नहीं रहा.

मां को अभी नहीं बताया गया बेटे की मौत का सच

पवन की मां मीरा देवी मानसिक रूप से बीमार हैं. परिवार को डर है कि बेटे की मौत की खबर सुनकर उनकी हालत बिगड़ सकती है. इसलिए उन्हें अभी तक पवन की मौत की जानकारी नहीं दी गई है. एक मां अपने बेटे के लौटने का इंतजार कर रही है और परिवार उसके सामने बेटे की मौत का सच बताने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा. जिस घर में कुछ दिन पहले रक्षाबंधन की खुशियां थीं, बहनों की कलाई पर भाई की राखी थी और जन्माष्टमी का उत्सव था, उसी घर में अब सन्नाटा पसरा है.

दिल्ली पहुंचकर सपने देखने वाले छात्र मलबे में दफन

सत्य निकेतन का यह हादसा कई सवाल छोड़ गया है. दिल्ली जैसे शहर में पढ़ाई और बेहतर भविष्य के लिए दूर-दराज के छोटे शहरों और कस्बों से आने वाले छात्र अक्सर पीजी और हॉस्टल में रहते हैं. परिवार अपने बच्चों को यह सोचकर दिल्ली भेजते हैं कि वे अच्छी पढ़ाई करेंगे, नौकरी पाएंगे और परिवार का नाम रोशन करेंगे, लेकिन रविवार का हादसा इन परिवारों के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गया.

अर्पित रक्षाबंधन मनाकर उसी सुबह दिल्ली लौटा था. युवराज तीन दिन पहले दुर्ग से दिल्ली आया था. पवन ने कुछ ही समय पहले दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था. अक्षत भी उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली में रह रहा था. इन सभी के परिवारों ने अपने बच्चों को सपनों के शहर दिल्ली भेजा था. किसी ने नहीं सोचा था कि वही शहर उनके बच्चों को उनसे हमेशा के लिए छीन लेगा.

7 मौतों ने कई घरों की खुशियां छीनीं

सत्य निकेतन में 5 मंजिला इमारत गिरने के बाद राहत और बचाव अभियान लंबे समय तक जारी रहा. मलबे से लोगों को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू डॉग और कैमरों की मदद ली गई. हादसे में कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, लेकिन सात लोगों की जान चली गई. इन मौतों में बड़ी संख्या छात्रों की रही. अलग-अलग राज्यों से दिल्ली आकर पढ़ाई कर रहे इन युवाओं के परिवार अब अपने बच्चों के शव घर लाने की तैयारी कर रहे हैं. किसी मां की गोद सूनी हो गई, किसी पिता का सहारा छिन गया, किसी बहन की कलाई से भाई का साथ हमेशा के लिए चला गया. सत्य निकेतन की यह इमारत भले ही कुछ सेकंड में ढही हो, लेकिन इसके मलबे में दबे परिवारों के सपने और दर्द शायद जिंदगी भर बाहर नहीं निकल पाएंगे.

Delhi Satya Niketan Incident: 5 मंजिला इमारत गिरी और टूट गए 5 परिवारों के सपने… कोई इकलौता भाई था तो कोई करियर बनाने पहुंचा था दिल्ली


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