UP News: कैसे चुनाव जीता जाए? क्या सुधार किया जाए… यूपी में हर नेता से विनोद तावड़े ने पूछे 3 सवाल – INA

उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ‘सुनो-सुधारो-जीतो’ वाली रणनीति तेज हो गई है. राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े के दो दिवसीय लखनऊ दौरे में मंत्रिमंडल फेरबदल, संगठन, आयोगों के खाली पद और जातीय समीकरणों पर मैराथन बैठकें हुईं. सूत्रों के मुताबिक, पूरा फोकस 2027 की जीत पर था. कैसे चुनाव जीता जाए? क्या सुधार किया जाए? कौन से मुद्दे फायदा-नुकसान कर सकते हैं?… इन सभी सवालों का जवाब तलाशने के लिए विनोद तावड़े ने दर्जनभर बीजेपी नेताओं से मुलाकात की.

शनिवार को दिल्ली से लौटकर प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की. फिर रविवार को बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े भी लखनऊ पहुंचे. यहां उनके साथ बंद कमरे में चर्चा हुई. इसके बाद पंकज चौधरी दिल्ली रवाना हो गए और शाम को गृह मंत्री अमित शाह से मिले. इस बीच लखनऊ में विनोद तावड़े जमे रहे. रविवार दोपहर विनोद तावड़े भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचे. उन्होंने बारी-बारी से डेढ़ दर्जन नेताओं से बंद कमरे में लंबी बैठकें की.

विनोद तावड़े ने सभी नेताओं से पूछे 3 सवाल

विनोद तावड़े ने बीजेपी नेताओं से अलग-अलग फीडबैक लिया. सूत्र बताते हैं कि तावड़े ने हर नेता से तीन अहम सवाल पूछे. पहला- मंत्रियों के काम-काज को आप कैसे देख रहे हैं? दूसरा- किस मंत्री के बारे में क्या सकारात्मक और क्या नकारात्मक चर्चा है? तीसरा- क्या आपके पास कोई नया नाम है, जिसे मंत्रिमंडल, संगठन या अयोग में शामिल करना चाहते हैं, जिससे 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को फायदा हो.

सामाजिक संतुलन बिगड़ने की शिकायत

इस बैठक में शामिल एक बीजेपी नेता ने विनोद तावड़े से कहा कि अब यूपी में छोटे बदलाव से कोई विशेष फर्क नहीं पड़ेगा, सरकार ऐसे भी चुनाव में जा सकती है. अगर बदलाव करना हो तो बड़ा बदलाव करके एक मैसेज दिया जा सकता है, यूपी में सब कुछ 2027 को लेकर बेहतर नहीं है, चुनाव का समय भी बेहद कम है. सूत्र बताते हैं कि इस बैठक में अवध क्षेत्र में पासी-कुर्मी नाराजगी, ब्राह्मण असंतोष और सामाजिक संतुलन बिगड़ने की शिकायतें आईं. टीवी9 से बात करते हुए एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने कहा, ‘बैकवर्ड राजनीति करनी है तो अगड़ों को भी साधना होगा, वरना 2027 में नुकसान होगा. यूपी में राष्ट्रीय नेतृत्व को भी 2027 को लेकर देखना पड़ेगा क्योंकि समय बहुत कम है.’

‘अखिलेश को हल्के में न लें’

विनोद तावड़े ने जातीय राजनीति, विपक्ष की रणनीति और अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले पर भी विस्तार से जानकारी ली. कई नेताओं ने अपने फीडबैक में कहा, ‘2027 में अखिलेश यादव को हल्के में नहीं लेना चाहिए.’ इसके अलावा UGC, शंकराचार्य विवाद और पुलिस भर्ती पेपर में ब्राह्मणों को लेकर उठे सवाल पर चर्चा हुई. दलित-ओबीसी मुद्दों पर भी जमीनी हकीकत जानी गई. वरिष्ठ नेताओं ने बताया कि महत्वपूर्ण आयोगों में बिना सहमति के सरकार ने अपने मन से नियुक्तियां कीं. शिकायत के बाद बाकी पद होल्ड कर दिए गए.

बंगाल चुनाव के बाद यूपी में हो सकता है बड़ा बदलाव

विनोद तावड़े ने सभी फीडबैक नोट किए हैं. सोमवार को वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर दिल्ली चले गए. रिपोर्ट राष्ट्रीय नेतृत्व को सौपेंगे. उसके बाद राष्ट्रीय नेतृत्व तय करेगा कि यूपी में कैसी सर्जरी की जाएगी. सूत्रों का कहना है कि यूपी में सरकार से लेकर संगठन तक बड़े बदलाव बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद ही होंगे. इस बार छोटे-मोटे बदलाव नहीं, बड़े फैसले लिए जाएंगे. तावड़े ने हर नेता से अलग-अलग मुलाकात कर साफ मैसेज दिया कि भाजपा में कोई अलग नहीं, सब बराबर हैं. पूर्व अध्यक्षों, वर्तमान अध्यक्ष और मंत्रियों, सभी की इच्छा और सुझाव सुने गए.

इन नेताओं ने विनोद तावड़े से की मुलाकात

विनोद तावड़े ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, संगठन महामंत्री धर्मपाल, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी, कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह लोधी, पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी, कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना, पूर्व डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा, मंत्री बेबी रानी मौर्या, मंत्री रजनी तिवारी, महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता सिंह, एमएलसी महेंद्र सिंह, मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह (फोन पर वार्ता), पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेई (फोन पर वार्ता), पूर्व प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडे (फोन पर वार्ता), पूर्व सांसद विनय कटियार समेत कुछ और नेताओं से मुलाकात की है.

पंकज चतुर्वेदी
पंकज चतुर्वेदी

पंकज चतुर्वेदी पिछले 11 साल से देश और उत्तरप्रदेश की राजनीति को कवर करते आ रहे हैं. दिल्ली में अमर उजाला और पंजाब केसरी से पत्रकारिता की यात्रा की शुरुवात हुई.

दिल्ली में 2 साल की पत्रकारिता के बाद मिट्टी की खुशबू यूपी खींच लाई और तब से राजधानी लखनऊ में ही पत्रकारिता हो रही है. 2017 में यात्रा को विस्तार देते हुए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े. राजनीतिक खबरों में गहरी रुचि और अदंर की खबर को बाहर लाने का हुनर के साथ ही यूपी के ब्यूरोकेसी में खास पकड़ रखते हैं.

इनकी पत्रकारिता का फलसफा खबरों को खबर के रूप में ही आप तक पहुंचाना है.

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