UP News: ना काफिला और ना बंगला… सियासत के ईमानदार चेहरे विधायक आलम बदी की दिलचस्प कहानी – INA

वैसे तो विधायक शब्द जेहन में आते ही एक ऐसे व्यक्ति की छवि बनती है जो फुल प्रोटोकॉल से लबरेज हो. गाड़ियों का काफिला हो और आलीशान बंगला हो. मगर, यूपी के आजमगढ़ जिले में 90 साल के एक ऐसे विधायक हैं जो शहर की एक छोटी सी गली में बड़े के साथ परिवार रहते हैं. उनका रहन-सहन देखकर आंखें एक बार दिमाग से ये सवाल कर सकती हैं क्या मौजूदा दौर में ऐसे भी विधायक हैं. हम बात कर रहे हैं समाजवादी पार्टी के सबसे वरिष्ठ विधायक आलम बदी की.

16 मार्च 1936 को जन्मे आलम बदी अपनी ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं. जिले के विंदावल के रहने वाले बदी ने 12वीं तक की पढ़ाई की है. उन्होंने इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया. सियासत में आने से पहले वो इंजीनियर थे. उनकी पत्नी का नाम कुदैशा खान है. उनके 6 बच्चे हैं. आलम बदी ने 1996 में पहली बार सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की थी.

पांचवीं बार विधायक बने आलम बदी

नौकरी छोड़कर राजनीति में आना बड़ी चुनौती थी. मगर, उन्होंने जनता की सेवा करने का बीड़ा उठाया. अपने काम के बूते वो जनता के दिल पर राज करते रहे. केवल एक बार 2007 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. उसके बाद से लगातार 3 विधानसभा चुनाव जीते. हर चुनाव में उनके प्रचार का तरीका चर्चा में रहता है. वो कभी भी लाव-लश्कर के साथ नहीं चलते. कई बार तो ये भी सुनने को मिला कि उन्होंने चुनाव प्रचार में महज 2 से 3 लाख रुपये ही खर्च किए.

मुलायम-अखिलेश के कहने के बावजूद नहीं बने मंत्री

बताया जाता है कि मुलायम सिंह और अखिलेश यादव ने आलम बदी को मंत्री पद देने का कई बार ऑफर किया लेकिन उन्होंने कहा, मंत्री किसी नौजवान को बनाया जाए. 2004 और 2012 में जब-जब ऑफर मिला, तब-तब आलम बदी ने यही बात कही. उनका मानना है कि अगर वो मंत्री बन जाएंगे तो वह इलाके की जनता से कहीं ना कहीं दूर हो जाएंगे.

एक सुझाव ने बदला था 2014 का परिणाम

बात है 2014 की. मुलायम सिंह यादव आजमगढ़ से लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे. तभी नेताओं की कार्यशैली और कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट देखकर आलम बदी ने मुलायम को बताया कि अगर यही हालत रहे तो आपका चुनाव खतरे में पड़ सकता है. खास बात है कि एक तरफ सभी नेताओं ने मुलायम को पॉजिटिव रिपोर्ट भेजी थी. मगर, आलम बदी ने मुलायम को वो कमी बताई, जिससे उनका चुनाव प्रभावित हो सकता था.

इसके बाद चुनाव प्रचार के लिए कई विधानसभा क्षेत्रों में कैंपेन करने के लिए धर्मेंद्र यादव को भेजा गया. इस दौरान उनके सामने बीजेपी उम्मीदवार रमाकांत यादव थे, जिनकी लोकप्रियता की वजह से मुलायम का चुनाव भी खतरे में आ गया था. कई विधानसभा क्षेत्र में लोगों ने घरों के ऊपर बीजेपी का झंडा लगा लिया था. मगर, धर्मेंद्र की कोशिश के चलते ये लोग फिर सपा के पाले में आए थे.

ना कमीशन खोरी करेंगे, ना करने देंगे

आलम बदी और उनकी टीम पर आज तक यह आरोप नहीं लगा कि उन्होंने विधानसभा क्षेत्र में किसी काम के नाम पर कमीशन लिया हो. आलम बदी कई बार सार्वजनिक मंचों पर यह कह चुके हैं कि ना मैं कमीशन लेता हूं और ना ही अपने बच्चों को ठेकेदार से मिलने के लिए कहता हूं. अपने विधानसभा क्षेत्र में हुए कार्यों की गुणवत्ता की भी स्वयं ही जांच करते हैं.

आजमगढ़ जनपद के सभी विधायक महंगी गाड़ियों से चलते हैं. मगर, आलम बदी पुरानी बोलेरो से सफर करते हैं. कई बार तो लोग उन्हें बाइक पर भी देखते हैं. उनके 6 बच्चों में राजनीति में सिर्फ एक बेटा सक्रिय है. अन्य सभी नौकरी करते हैं. 2022 के हलफनामे के मुताबिक, आलम बदी के पास महज 50 लाख रुपये की चल-अचल संपत्ति है. इसमें 10 लाख की बोलेरो भी है. उनके पास महज 30 लाख की अचल संपत्ति है.

ना काफिला और ना बंगला… सियासत के ईमानदार चेहरे विधायक आलम बदी की दिलचस्प कहानी





देश दुनियां की खबरें पाने के लिए ग्रुप से जुड़ें,

#INA #INA_NEWS #INANEWSAGENCY

Copyright Disclaimer :-Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing., educational or personal use tips the balance in favor of fair use.
Credit By :-This post was first published on https://www.tv9hindi.com/, we have published it via RSS feed courtesy of Source link,

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button