Delhi-Ncr कौन हैं दिल्ली में सत्ता का खेल बनाने और बिगाड़ने वाले स्विंग वोटर्स? समझें 2025 में बदलेंगे किसकी किस्मत- #INA

दिल्ली विधानसभा चुनाव.

दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए बुधवार को मतदान है. इस बार आम आदमी पार्टी, बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे का मुकाबला माना जा रहा है. पिछले तीन बार से दिल्ली का विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव के छह महीने के बाद होता आ रहा है. दिल्ली का वोटिंग पैटर्न देखें तो लोकसभा और विधानसभा चुनाव में ये अलग-अलग रहता है. लोकसभा में जो जनता बीजेपी के पक्ष में खड़ी नजर आती है वही जनता दिल्ली विधानसभा चुनाव में खिलाफ वोटिंग करती दिखती है. इसे राजनीति की भाषा में स्विंग वोटर कहा जाता है, जो सत्ता का खेल बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखता है.

दिल्ली के पिछले दो लोकसभा और दो विधानसभा चुनाव में स्विंग वोटर्स ही सियासत की दशा और दिशा तय करते रहे हैं. एक बार होता तो सियासी संयोग माना जा सकता था, लेकिन पिछले दो बार से यही पैटर्न रहा है. लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सातों सीटें बीजेपी की झोली में डालने वाला मतदाता दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के पक्ष में मजबूती से खड़ा नजर आता है. ऐसे में सवाल उठता है कि दिल्ली में जो स्विंग वोटर हैं, वो कौन मतदाता है, जिनका मिजाज चंद महीने ही बदल जाता है.

दिल्ली में स्विंग वोटर का बदला मिजाज

दिल्ली में 20 से 25 फीसदी स्विंग वोटर हैं, जो लोकसभा में अलग और विधानसभा में अलग वोटिंग करते हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली में आम आदमी पार्टी को 32.9 फीसदी, बीजेपी को 46.4 फीसदी और कांग्रेस को 15.1 फीसदी वोट मिले थे. बीजेपी सभी सातों सीटें जीतने में कामयाब रही थी. वहीं, 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को 54.5 फीसदी, बीजेपी को 32.2 फीसदी और कांग्रेस को 9.7 फीसदी वोट मिले. इस तरह आम आदमी पार्टी को 21.6 फीसदी वोटों का फायदा हुआ जबकि बीजेपी को 14.1 और कांग्रेस को 5.4 फीसदी का नुकसान हुआ.

दिल्ली विधानसभा चुनाव के सभी उम्मीदवारों की लिस्ट यहां देखें

2019 के लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को 18.1 फीसदी वोट मिले थे. बीजेपी को 56.8 फीसदी और कांग्रेस को 22.5 फीसदी वोट मिले थे, लेकिन एक साल बाद विधानसभा चुनाव हुए तो सीन बदल गया. 2020 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी का वोट प्रतिशत 53.6 और बीजेपी का 38.5 फीसदी रहा. कांग्रेस ने 4.3 फीसदी वोट हासिल किए. बाकी वोट अन्य के खाते में गए. इस तरह से आम आदमी पार्टी को फायदा तो बीजेपी को 18 फीसदी नुकसान उठाना पड़ा.

दिल्ली में आखिर कौन हैं स्विंग वोटर्स?

दिल्ली की सत्ता का खेल बनाने और बिगाड़ने की ताकत स्विंग वोटर रखते हैं. मगर, सवाल है कि स्विंग वोटर कौन हैं? इसकी जानकारी दिल्ली चुनाव को लेकर जारी सीएसडीएस के आंकड़ों से पता चलती है. दिल्ली में करीब 22 फीसदी सवर्ण जातियों के मतदाता हैं, जिसके 30 फीसदी स्विंग वोटर हैं. 2019 में सवर्ण समाज ने 75 फीसदी बीजेपी को वोट किया था और 2020 में 54 फीसदी वोट ही कर सके. 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 12 फीसदी समर्थन मिला था जबकि 2020 में घटकर तीन फीसदी रह गया. आम आदमी पार्टी को 13 फीसदी समर्थन मिला था, जो 2020 में बढ़कर 41 फीसदी हो गया.

दिल्ली में करीब 25-30 फीसदी ओबीसी समाज का वोट स्विंग करता है. 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 64 फीसदी ओबीसी का समर्थन मिला था. 2020 के विधानसभा चुनाव में यह घटकर 50 फीसदी रह गया. 2019 में कांग्रेस को 18 फीसदी समर्थन मिला था, जो 2020 में घटकर सिर्फ दो फीसदी रह गया. हालांकि, 2019 में आम आदमी पार्टी के 18 फीसदी ओबीसी वोट 2020 में बढ़कर 49 फीसदी पर पहुंच गया.

दिल्ली की सभी विधानसभा सीटों की लिस्ट यहां देखें

दिल्ली में दलित समाज का 45-50 फीसदी मतदाता स्विंग वोटर है. 2019 लोकसभा चुनावों में बीजेपी को 44 फीसदी दलित समर्थन मिला था, जो 2020 के विधानसभा चुनावों में घटकर 25 फीसदी रह गया. 2019 में कांग्रेस का 20 फीसदी दलित समर्थन 2020 में घटकर छह फीसदी रह गया. आप का 2019 में 22 फीसदी समर्थन 2020 में बढ़कर 69 फीसदी हो गया. 2024 के लोकसभा चुनावों में आप के 41 फीसदी दलित मतदाता भाजपा (24 फीसदी) और कांग्रेस (14 फीसदी) में चले गए.

दिल्ली में करीब 55-60 फीसदी मुस्लिम मतदाता स्विंग वोटर हैं. 2019 के लोकसभा में भाजपा को सात फीसदी मुस्लिम समर्थन मिला था, जो 2020 के विधानसभा चुनावों में घटकर तीन फीसदी रह गया. 2019 में कांग्रेस का 66 प्रतिशत मुस्लिम समर्थन 2020 में घटकर 13 प्रतिशत हो गया और आम आदमी पार्टी का 2019 में 28 प्रतिशत समर्थन 2020 में बढ़कर 83 प्रतिशत हो गया.

क्या 2025 में बदलेगा सत्ता का सीन?

इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांटे का मुकाबला माना जा रहा है. दिल्ली में आम आदमी पार्टी का बेस वोट शेयर 25 फीसदी के बीच है जबकि बीजेपी का वोट 35 फीसदी के करीब है. कांग्रेस का सियासी आधार आम आदमी पार्टी के बीच सिमट गया है. 25 से 30 फीसदी वोटर लोकसभा और विधानसभा चुनाव में अपना मिजाज बदलता रहता है. दिल्ली में 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 54.35 फीसदी, आम आदमी पार्टी को 24.17 फीसदी और कांग्रेस को 18.91 फीसदी वोट मिले थे.

2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी मिलकर चुनाव लड़ी थी, लेकिन विधानसभा चुनाव में अलग-अलग किस्मत आजमा रही है. ऐसे में दिल्ली में अगर 2015 और 2020 की तरह ही वोटिंग पैटर्न रहा तो बीजेपी की टेंशन बढ़ सकती है. बीजेपी दिल्ली में लोकसभा में मिले समर्थन को विधानसभा चुनाव में जोड़े रखती है तो 27 साल से चला आ रहा सियासी वनवास खत्म करने में कामयाब रहेगी.

कौन हैं दिल्ली में सत्ता का खेल बनाने और बिगाड़ने वाले स्विंग वोटर्स? समझें 2025 में बदलेंगे किसकी किस्मत


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