देश – UP में बिजली कर्मचारी क्यों कर रहे आंदोलन? आज आगरा में होनी है पंचायत, क्या है उनकी मांगें?- #INA

उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड
उत्तर प्रदेश के दो डिस्कॉम के प्रस्तावित निजीकरण का विरोध कर रही विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समितिके आह्वान पर सोमवार को कर्मचारियों ने एकमुश्त समाधान योजना के बारे में उपभोक्ताओं को जागरूक किया. साथ ही समिति मंगलवार को आगरा में बिजली पंचायत आयोजन भी कर रही है.
मंगलवार को आगरा में बिजली पंचायत आयोजित किया गया है. इस दौरान उपभोक्ताओं, किसानों और बिजलीकर्मियों के बीच समिति टोरेंट कंपनी के कारण हो रहे नुकसान का मुद्दा प्रमुखता से उठाएगी. उत्तर प्रदेश के विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन विद्युत वितरण निगमों को निजी घरानों को सौंपने की इतनी जल्दबाजी में है कि वह इलेक्ट्रिसिटी एक्ट-2003 के प्रावधानों का घोर उल्लंघन करने पर तुला है. इससे भारी घपले की आशंका जताई जा रही है.
निजीकरण से होने वाले नुकसान के प्रति किया जागरूक
संघर्ष समिति के आह्वान पर सोमवार (16 दिसंबर ) को बिजली कर्मचारियों ने प्रदेश के सभी जनपदों में उपभोक्ताओं के लिए एकमुश्त समाधान योजना की शुरुआत करते हुए सफलता हेतु व्यापक अभियान चलाया. साथ ही उपभोक्ताओं को निजीकरण से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक किया.
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 131 में परिसंपत्तियों के निजी घरानों को ट्रांसफर के नियम बताए गए हैं. सेक्शन 131 के अनुसार ऐसी परिसंपत्तियों का राजस्व क्षमता (Revenue Potential) के अनुसार मूल्यांकन कर ही हस्तांतरण किया जाएगा. संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन प्रबंधन द्वारा वर्ष 2024-25 के लिए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में 15596 करोड़ रुपए और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के लिए 13938 करोड़ रुपए का राजस्व लक्ष्य है, यह कुल 29534 करोड़ रुपए है, ऐसे में स्वाभाविक है कि इन निगमों की राजस्व क्षमता इससे अधिक ही होगी.
समिति ने विभाग पर लगाए गंभीर आरोप
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि उनकी परिसंपत्तियों का अरबों खरबों रुपए का मोटा अनुमान है, जिसे बेचने के लिए 1500 करोड़ रु रिजर्व प्राइस रखी गई है. पूरी जमीन निजी घरानों को मात्र एक रुपए प्रति वर्ष की लीज पर दे दी जाएगी. इतने बड़े घोटाले की आशंका के बीच पावर कारपोरेशन की निजीकरण की तेजी समझ के परे है. संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि जब पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की परिसंपत्तियों का सी ए जी के द्वारा ऑडिटेड मूल्यांकन ही नहीं किया गया है,तब इन वितरण निगमों की परिसंपत्तियों का स्थानांतरण किस उचित मूल्य (Fair Value) पर किया जाएगा. साथ ही परिसंपत्तियों का राजस्व क्षमता (Revenue Potential) के अनुसार मूल्यांकन किए बिना कैसे निजीकरण की बात इतनी तीव्र गति से बढ़ाई जा रही है.
कारपोरेशन प्रबंधन को पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की परिसंपत्तियों का ऑडिटेड मूल्य और राजस्व क्षमता सार्वजनिक करना चाहिए. राज्य सरकार ने किसानों के लिए मुफ्त बिजली का आदेश कर दिया है, लेकिन अभी भी किसानों का बिजली बिल पावर कारपोरेशन के राजस्व एरिया में चल रहा है. इससे ए टी एंड सी हानियों की गलत तस्वीर सामने रखकर निजीकरण किया जा रहा है. इस प्रकार के अनेक घोटाले हैं. इन पर पर्दा पड़ा रहे, इसलिए निजीकरण की इतनी जल्दी है.
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