World News: भारत को मिल सकती है इजराइल की आयरन डोम टेक्नोलॉजी? मल्टी-लेयर होगी डिफेंस शील्ड – INA NEWS

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे के दौरान एक बड़ी रक्षा डील की चर्चा हो सकती है. सूत्रों के मुताबिक भारत को इजराइल की मशहूर आयरन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तकनीक मिल सकती है. ऐसा माना जा रहा है कि यह तकनीक मेक इन इंडिया मॉडल के तहत मिल सकती है.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद मजबूत एयर डिफेंस शील्ड बनाना भारत की प्राथमिकता बन चुका है. आयरन डोम जैसी तकनीक इस दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है.
क्या है आयरन डोम?
- आयरन डोम दुनिया की सबसे उन्नत शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस प्रणालियों में से एक मानी जाती है.
- यह कम दूरी की मिसाइलों, रॉकेटों और ड्रोन को हवा में ही मार गिराती है.
- इसकी सफलता दर 90% से अधिक बताई जाती है.
- हाल के संघर्षों में इसने सैकड़ों मिसाइलों और ड्रोन को इंटरसेप्ट कर अपनी क्षमता साबित की है.
सिर्फ खरीद नहीं, भारत में निर्माण
मुंबई में इजराइल के महावाणिज्य दूत यानिव रेवाच ने संकेत दिया है कि यह सौदा केवल खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा. योजना है कि तकनीक का ट्रांसफर भारत को दिया जाए.निर्माण भारत में ही हो. भारतीय कंपनियां इजराइली पार्टनर के साथ मिलकर उत्पादन करें. यह कदम भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति को नई मजबूती देगा.
भारतइज़रायल रक्षा रिश्ते पहले से मजबूत
भारत पहले से ही इजराइल के साथ मिसाइल, ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम में सहयोग कर रहा है. अब आयरन डोम तकनीक मिलने से यह साझेदारी और गहरी हो सकती है. अगर पीएम मोदी के दौरे में यह समझौता आगे बढ़ता है, तो भारत को ड्रोन हमलों से सुरक्षा और सीमावर्ती इलाकों में बेहतर एयर डिफेंस और रणनीतिक शहरों की सुरक्षा जैसी बड़ी ताकत मिल सकती है.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत मजबूत सुरक्षा कवच तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. आयरन डोम डील उसी रणनीतिक बदलाव का हिस्सा मानी जा रही है.
मल्टी-लेयर एयर डिफेंस शील्ड होगी तैयार?
हाल के रक्षा संकेत यही कहानी बयां कर रहे हैं कि भारत रूस के S-400 और इजराइल के आयरन डोम को मिलाकर एक मजबूत मल्टी-लेयर एयर डिफेंस शील्ड तैयार करना चाहता है?
भारत ने पहले ही रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की डील की है. अब इजरायल की Iron Dome तकनीक भारत में लाने की चर्चा तेज है; अगर ये दोनों सिस्टम एक नेटवर्क में जुड़ते हैं, तो भारत के पास दुनिया के सबसे मजबूत हवाई सुरक्षा घेरों में से एक हो सकता है. भारत-रूस के बीच करीब 5 अरब डॉलर की S-400 डील 2018 में हुई थी.
S-400 की क्या हैं खासियत
- 400 किलोमीटर तक की रेंज
- फाइटर जेट, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल को ट्रैक और इंटरसेप्ट करने की क्षमता
- एक साथ कई लक्ष्यों पर नजर
यह सिस्टम भारत की लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस जरूरतों को पूरा करता है और रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा देता है.
आयरन डोम, नजदीकी खतरे का जवाब
दूसरी तरफ आयरन डोम कम और मध्यम दूरी के रॉकेट, ड्रोन और मिसाइलों को रोकने के लिए बनाया गया है. जहां S-400 ऊंचाई और लंबी दूरी के खतरों को कवर करता है, वहीं आयरन डोम सीमा के पास से दागे गए रॉकेट, ड्रोन स्वॉर्म और छोटी दूरी के हमलों को हवा में ही खत्म कर सकता है.
कैसे बनेगा मल्टी-लेयर सुरक्षा घेरा?
अगर भारत इन दोनों सिस्टम को अपने मौजूदा नेटवर्क से जोड़ता है, तो सबसे बाहर की परत S-400 लंबी दूरी की मिसाइलों और फाइटर जेट को रोकेगा. बीच की परत स्वदेशी और अन्य मीडियम रेंज सिस्टम और सबसे अंदर की परत आयरन डोम ड्रोन, रॉकेट और कम दूरी की मिसाइलों को रोकेगा. यानी ऊपर से नीचे तक पूरा सुरक्षा कवच रहेगा.
ऑपरेशन सिंदूर से मिला सबक
हाल के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने महसूस किया कि सिर्फ लंबी दूरी के सिस्टम काफी नहीं हैं. ड्रोन स्वॉर्म और कम दूरी के रॉकेट हमलों से निपटने के लिए एक अलग और तेज प्रतिक्रिया देने वाला सिस्टम जरूरी है और यहीं आयरन डोम फिट बैठता है.
क्या होगा आगे?
अगर आयरन डोम तकनीक मेक इन इंडिया के तहत आती है, तो भारत में ही इसका निर्माण हो सकता है. इससे न सिर्फ सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि रक्षा उद्योग को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा. साफ है भारत अब सिर्फ जवाबी कार्रवाई की सोच नहीं रहा, बल्कि मल्टी-लेयर एयर डिफेंस शील्ड बनाकर हर स्तर पर सुरक्षा घेरा तैयार करना चाहता है. S-400 और आयरन डोम का संयोजन उसी व्यापक रणनीति की एक अहम कड़ी बन सकता है.
भारत को मिल सकती है इजराइल की आयरन डोम टेक्नोलॉजी? मल्टी-लेयर होगी डिफेंस शील्ड
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