World News: पीछे छूट गए पहेलवी, हुसैन मूसावी ने संभाली ईरान में बगावत की कमान…कौन हैं? – INA NEWS

ईरान और अमेरिका के बीच ओमान में प्रस्तावित शांति वार्ता के बीच जेल में बंद विपक्षी नेता मीर हुसैन मूसावी ने अयातुल्ला खामेनेई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. मूसावी ने एक पत्र जारी किया है, जिसमें ईरान में खेल खत्म होने की बात कही गई है. मूसावी के मुताबिक अब ईरान में जनता की शासन आने वाली है. मूसावी के इस पत्र को 2 मायनों में काफी अहम माना जा रहा है.
1. मूसावी पहले विपक्ष के बड़े नेता हैं, जिसने खामेनेई सरकार के खिलाफ ईरान से बगावत का बिगुल फूंका है. बवाल को लेकर बड़े स्तर पर अब तक किसी भी नेता ने इस्लामिक गणराज्य का विरोध नहीं किया है.
2. पूर्व क्राउन प्रिंस रेजा पहेलवी के लिए इसे एक झटका माना जा रहा है. क्योंकि अब तक विपक्ष के तौर पर पहेलवी ही सबसे मुखर नेता थे, लेकिन अब मूसावी ने उनका खेल खराब कर दिया है. मूसावी राष्ट्रपति का चुनाव भी लड़ चुके हैं.
मीर हुसैन मूसावी कौन हैं?
83 साल के मीर हुसैन मूसावी को ईरान में सुधारवादी नेता माना जाता है. मूसावी एक वक्त में अयातुल्ला खुमैनी के करीबी नेता माने जाते थे. 1981 से 1989 तक मूसावी प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं. हालांकि, अली खामेनेई के आने के बाद मूसावी साइडलाइन कर दिए गए. 2009 में मूसावी राष्ट्रपति चुनाव में भी उतरे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली.
2023 में मूसावी ने इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद कर लिया था, तब से वे जेल में बंद हैं. अरब स्प्रिंग में मूसावी की मजबूत पकड़ रही है. 2011 में अरब देशों के जरिए मूसावी ने विद्रोह किया था, हालांकि, उस वक्त ज्यादा सफलता उन्हें नहीं मिल पाई थी.
मूसावी का बयान अहम क्यों है?
मूसावी ने पत्र में लिखा है- लोगों को कितनी बार यह कहना पड़ेगा कि वे इस व्यवस्था को नहीं चाहते और आपके झूठ पर विश्वास नहीं करते? बस बहुत हो गया. खेल खत्म हो गया है.
यह पहली बार है जब सिस्टम के अंदर से किसी ने इस्लामिक गणराज्य को चुनौती दी है. वो भी उस इस्लामिक गणराज्य को, जिसके लिए मूसावी ने खुमैनी के साथ लंबी लड़ाई लड़ी थी.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने हाल ही में खुफिया सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी. इसमें कहा गया था कि ईरान को फिर से लोगों के सड़कों पर उतरने का डर सता रहा है.
ऐसे में मूसावी के पत्र ने ईरान के भीतर खामेनेई सरकार की टेंशन बढ़ा दी है. वहीं मूसावी का आगे आना रेजा पहेलवी के लिए भी झटका है. क्योंकि पहेलवी को आगे कर अमेरिका ईरान की लड़ाई नहीं लड़ना चाहता है.
जनवरी 2026 में जब ईरान में विद्रोह प्रदर्शन चरम पर था, तब पहेलवी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने की कवायद की थी, लेकिन ट्रंप ने उन्हें मिलने का वक्त नहीं दिया.
पीछे छूट गए पहेलवी, हुसैन मूसावी ने संभाली ईरान में बगावत की कमान…कौन हैं?
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