World News: ‘खोखली है पुतिन की परमाणु धमकी…’ अमेरिका के पूर्व NSA ने एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में बताया – INA NEWS

अमेरिका के पूर्व अटॉर्नी और संयुक्त राष्ट्र में राजदूत की भूमिका निभा चुके जॉन रॉबर्ट बोल्टन ने टीवी9 भारतवर्ष के साथ खास बातचीत में हिस्सा लिया. 2018 से 2019 तक डोनाल्ड ट्रंप के साथ मिलकर काम करने वाले पूर्व NSA जॉन बोल्टन ने कई मुद्दों पर बेबाक राय रखी. उन्होंने बताया कि अमेरिका की आगामी ट्रंप सरकार के शुरुआती 100 दिन किस तरह के रहने वाले हैं.

बोल्टन ने रूस-यूक्रेन युद्ध रुकवाने को लेकर ट्रंप के दावे और पुतिन की न्यूक्लियर धमकी के साथ-साथ भारत और अमेरिका के संबंधों, H1B वीज़ा रिफॉर्म समेत कई मुद्दों पर खुलकर चर्चा की. टीवी9 भारतवर्ष के साथ उनकी बातचीत का महत्वपूर्ण अंश पढ़िए.

कैसा होगा ट्रंप का दूसरा कार्यकाल?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दूसरा कार्यकाल कैसा रहेगा? खासतौर पर शुरुआती 100 दिन कैसे रहने वाले हैं, क्या उनका दूसरा कार्यकाल पहले कार्यकाल से काफी अलग होगा? जानिए ट्रंप के पूर्व सहयोगी ने इस सवाल का क्या जवाब दिया?

राष्ट्रपति के तौर पर अपने दूसरे कार्यकाल में डोनाल्ड ट्रंप काफी एक्टिव दिखेंगे, उन्होंने कई महत्वपूर्ण एजेंडा रखा है. उन्हें अमेरिका की घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर काफी काम करना है. जो कि हमेशा से उनकी प्राथमिकता रहे हैं. जैसे- अवैध अप्रवासियों को बाहर करना, जिसका उन्होंने शपथ ग्रहण के साथ ही वादा किया है. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि ट्रंप का दूसरा कार्यकाल पहले कार्यकाल की तरह ही होगा, यानी यह इस समय व्यवस्थित लग सकता है और शुरुआत में व्यवस्थित हो भी सकता है, लेकिन यह बहुत अधिक अव्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ेगा.

बोल्टन ने कहा कि ट्रंप की सोच पूरी तरह से लेन-देन वाली है और वह हर चीज को राजनीतिक तौर पर मिलने वाले फायदे के नजरिए से देखते हैं. इसलिए ट्रंप का दूसरा कार्यकाल भी पहले की तरह होगा लेकिन इस बार दुनिया राजनीतिक और आर्थिक तौर पर अधिक खतरनाक स्थिति में है. लिहाज़ा ट्रंप जिन मुद्दों को लेकर बात कर रहे हैं उनमें से बहुत-सी चीजों के गंभीर परिणाम हो सकते हैं.

रूस-यूक्रेन युद्ध कैसे खत्म करवाएंगे ट्रंप?

चुनाव जीतने से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने 24 घंटे में रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करवाने का वादा किया था. उनके दृष्टिकोण में क्या कोई बदलाव आया है?

इस सवाल के जवाब मेंबोल्टन कहते हैं कि ट्रंप मुख्य तौर पर मुद्दों को बहुत सीमित दृष्टिकोण से देखते हैं. वह रणनीतिक रूप से नहीं सोचते हैं. बोल्टन का कहना है कि, ‘मुझे लगता है कि वह बड़ी डील की तलाश में है, ताकि वह चीन के साथ एक और आर्थिक व्यापार डील की तलाश कर सकें. यही वजह है कि मुझे लगता है कि वह मध्य पूर्व और यूक्रेन में युद्ध को बातचीत की टेबल से हटाना चाहते हैं. ट्रंप नहीं चाहते कि इन दो मोर्चों पर चल रहे युद्ध के साथ कोई सौदा किया जाए, यानी वह इस बात की बहुत परवाह नहीं करते कि संघर्ष किन शर्तों पर खत्म होंगे.

हालांकि चुनाव के बाद से ट्रंप ने खुद यह स्वीकार किया है कि यह 24 घंटे में नहीं होगा, लेकिन हमें ट्रंप से अभी तक इस बारे में कुछ भी ठोस सुनना बाकी है कि उन्हें क्या लगता है कि अंतिम परिणाम कैसा होगा. उनके कई सलाहकारों ने प्लान तैयार किया है, ट्रंप के VP जेडी वेंस के पास भी एक प्लान था, जो शायद ट्रंप की सोच के करीब है, लेकिन उन्होंने खुद वास्तव में ऐसा नहीं कहा है. खास बात ये है कि ट्रंप इस जंग के लिए ज़िम्मेदार नहीं बनना चाहते, उन्हें लगता है कि यह बाइडेन का युद्ध है. उन्होंने अपने चुनावी अभियान के दौरान भी दावा किया था कि अगर वे राष्ट्रपति होते तो पुतिन ने कभी आक्रमण नहीं किया होता. अब इसे साबित करने या इसे गलत साबित करने का कोई तरीका नहीं है, लेकिन यह ट्रंप की खासियत है.

पुतिन की परमाणु धमकी खोखली है?

रूस की परमाणु धमकी कितनी खतरनाक है? इस सवाल का जवाब बोस्टन ने काफी दिलचस्प तरीके से दिया है.

अमेरिका के पूर्व NSA जॉन बोल्टन ने पुतिन की परमाणु धमकी को धोखा बताया है. उन्होंने कहा कि हमारे पास पिछले करीब 3 सालों में अमेरिकी खुफिया समुदाय के प्रतिनिधियों की गवाही और कांग्रेस का खुला सत्र है, जिन्होंने कई बार कहा है कि उन्होंने कभी भी रूसी परमाणु बलों की ओर से किसी तरह की वास्तविक तैयारी करते नहीं देखा है.

उन्होंने कहा कि, ‘मुझे लगता है कि पुतिन की व्यापक युद्ध में विस्तार करने की धमकियां भी खोखली हैं. यूक्रेन में इस युद्ध से रूस की पारंपरिक सैन्य क्षमता को बहुत नुकसान पहुंचा है. उन्होंने अपने कब्जे वाले क्षेत्र को दोगुना कर लिया है, लेकिन यह मानवीय और आर्थिक दृष्टि से रूस के लिए बहुत महंगा युद्ध रहा है.

ट्रंप 2.0 में कैसे होंगे भारत-अमेरिका के संबंध?

ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में दोनों देशों के बीच संबंध कैसे होंगे इस सवाल के जवाब में उन्होंने उन्होंने भारत के रुख और राष्ट्रपति ट्रंप के साथ अमेरिका के संबंधों की सराहना की.

बोस्टन ने कहा कि, ‘भारत और अमेरिका के बीच संबंध शायद 21वीं सदी का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है और खास तौर पर चीन के साथ व्यवहार में हम कैसे पेश आते हैं. मुझे लगता है कि पहले कार्यकाल में प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप के बीच अच्छे व्यक्तिगत संबंध विकसित हुए, लेकिन व्यापार के कारण कई मतभेद थे, ट्रंप इसी बात पर अड़े रहे.’

बोस्टन का कहना है कि यह देखना बहुत महत्वपूर्ण होगा कि जब ट्रंप फिर से राष्ट्रपति पद संभालेंगे, तो मोदी और ट्रंप पहली बार कब मिलेंगे? उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि यह जल्द ही होगा और मुझे उम्मीद है कि वे व्यापार विवादों के अलावा किसी और चीज़ पर बात करेंगे.

पूर्व अमेरिकी NSA का कहना है कि मुझे उम्मीद है कि वे बड़ी रणनीतिक तस्वीर के बारे में बात करेंगे, जैसे कि चीन-रूस के गठबंधन से कैसे निपटें, जो पिछले एक या दो साल से बन रही है और हमारे संबंधित दृष्टिकोण क्या होंगे?

‘खोखली है पुतिन की परमाणु धमकी…’ अमेरिका के पूर्व NSA ने एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में बताया


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