यूपी – काशी की सुमेधा पाठक की कहानी: टीबी ने व्हीलचेयर से बांधा, अब पैरा एशियाई निशानेबाजी में खेलेंगी सुमेधा – INA

दसवीं कक्षा तक एथलेटिक्स में पदक जीतने वाली सुमेधा पाठक को वर्ष 2013 में ट्यूबरक्लॉसिस का अटैक हुआ और कमर से निचले हिस्से ने काम करना बंद कर दिया। इसके बावजूद सुमेधा ने हार नहीं मानी और निशानेबाजी में हाथ आजमाया। अब तक वह 19 पदक जीत चुकी हैं। फिलहाल वह पैरा एशियाई खेलों की तैयारी में जुट गई हैं। सुमेधा जापान में 14 से 24 अक्तूबर तक आयोजित प्रतियोगिता में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करेंगी।


वाराणसी के दुर्गाकुंड क्षेत्र के मानस नगर एक्सटेंशन निवासी सुमेधा ने इसी सप्ताह कोरिया में आयोजित 10 मीटर पिस्टल की टीम स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया है। इस जीत के साथ सुमेधा के पदकों की संख्या बढ़कर 19 हो गई है। पदक जीतने के बाद वह जापान में आयोजित पैरा एशियाई निशानेबाजी की 10 मीटर पिस्टल स्पर्धा में पदक जीतने की तैयारी में हैं। ऐसा करने वाली वह प्रदेश की पहली पैरा महिला खिलाड़ी बन गई हैं। बातचीत के दौरान सुमेधा पाठक ने अब तक मिली जीत का श्रेय बाबा काशी विश्वनाथ, माता-पिता और कोच को दिया है।

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दसवीं में पढ़ाई के दौरान वर्ष 2013 में उन्हें मल्टी ड्रग ट्यूबरक्लॉसिस बीमारी हुई और शरीर के निचले हिस्से में कमर से लेकर पैरों तक ने काम करना बंद कर दिया। उन्होंने 11वीं से निशानेबाजी में कदम बढ़ाया और 10 मीटर एयर पिस्टल वर्ग में अभ्यास शुरू किया। 2018 में प्री-स्टेट शूटिंग में स्वर्ण जीता। इसके बाद लगातार पदक जीत रही हैं। 


Credit By Amar Ujala

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