यूपी – यूपी: वो गुब्बारा, जिस पर लिखा था पाकिस्तान, एयरफोर्स स्टेशन में मिला…लेकिन कहां से आया; राज न खुल सका – INA

अति संवेदनशील खेरिया एयरफोर्स स्टेशन परिसर के तकनीकी क्षेत्र में 12 फरवरी को मिला पाकिस्तान एयरलाइंस लिखे गुब्बारे का राज आठ महीने बाद भी नहीं खुल सका है। गुब्बारा कब और कहां से उड़ाया गया? यह सवाल ही बनकर रह गया है।
थाना शाहगंज में प्राथमिकी दर्ज करने के बाद पुलिस टीम लगी। खेरिया के आसपास के घरों को खंगाला। गुब्बारे की दिशा से पता करने की कोशिश की मगर जवाब नहीं मिल सके। खेरिया एयरफोर्स स्टेशन परिसर में मिला गुब्बारा हवाई जहाज की आकृति का था। तब उससे गैस निकल चुकी थी। पतंग उड़ाने वाला धागा बंधा था। इससे पहले बीकानेर में भी इसी तरह का गुब्बारा मिला था। इस पर पाकिस्तानी इंटरनेशनल एयरलाइन लिखा था। गुब्बारा उड़ाने वाले की जानकारी के लिए पुलिस के साथ ही एटीएस और आईबी सहित अन्य खुफिया एजेंसियों ने जांच की थी। गुब्बारे बनाने और बेचने वालों के बारे में जानकारी की गई। खेरिया के आसपास रहने वालों का सत्यापन किया गया। यह देखा गया कि बाहर से कौन आया? कुछ दिन पहले कौन रहकर गया। अगर सड़क से गुब्बारा उड़ाया गया होगा? कहां से आ सकता है? इस सबके बारे में पड़ताल की गई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका।
धमाके की घटनाएं भी फाइलों में हो गईं थीं दफन
भगवान टाकीज बाईपास स्थित जय हॉस्पिटल में 17 सितंबर 2011 को बम धमाका हुआ था। धमाका इतना भीषण था कि 6 से अधिक लोग घायल हो गए थे। इसे आतंकी घटना माना गया था। इस पर खुफिया एजेंसियों ने जांच की थी। एनएसजी कमांडो और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी की टीम भी जांच के लिए पहुंची थी। हाईटेक तरीके से धमाका करने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद एत्माददाैला के टेढ़ी बगिया स्थित विशाल ढाबे पर टाइम बम मिला था। दो लोग नजर आए थे। उसे रखकर चले गए थे। जानकारी पर एनएसजी कमांडो पहुंचे थे। बम को सुरक्षित तरीके से ले जाया गया था। उपकरणों के जरिये खोलने पर धमाका हो गया था। इन दोनों घटनाओं में भी पुलिस को कोई सुराग नहीं मिल सका।
केंद्रीय कारागार में निरुद्ध हैं पाकिस्तानी
पीओके के बंदी आगरा की केंद्रीय कारागार में पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर के बंदी निरुद्ध हैं। इस वजह से जेल में सुरक्षा बढ़ाई गई है। बाहर पुलिस के साथ ही पीएसी का भी पहरा लगा रहता है। जेल के अंदर भी कड़ी निगरानी रखी जाती है। विशेष बैरक में सभी को रखा गया। इनमें कई जम्मू कश्मीर भी भेजे गए थे।