यूपी – हरे पेड़ों की कटाई: एनजीटी ने फिर खोला आगरा कॉलेज का मामला, सरकार से डीएम तक मांगा जवाब – INA

आगरा कॉलेज परिसर और उसके आसपास हरे पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सुनवाई फिर शुरू करने के आदेश दिए हैं। एनजीटी के न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल की बेंच ने प्रदेश सरकार, टीटीजेड प्राधिकरण, जिलाधिकारी, डीएफओ, यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, तोता राम और आगरा कॉलेज के प्रधानाचार्य एवं प्रबंधन समिति के सचिव सीके गौतम को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।
अपूर्व शर्मा ने 10 अक्तूबर, 2025 को एनजीटी में शिकायत की थी, जिसमें एमजी रोड स्थित आगरा कॉलेज के आवासीय परिसर और चहारदीवारी के अंदर बड़े पैमाने पर हरे पेड़ों की कटाई का आरोप लगाया गया था। नालबंद चौराहा नाले के पास के क्षेत्र में पेड़ों की कटाई का आरोप लगाया। एनजीटी ने 19 जनवरी को प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) आगरा को स्थल का निरीक्षण कर शिकायत में लगाए गए आरोपों का सत्यापन करने के निर्देश दिए।
डीएफओ ने एक जून को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट और मूल आवेदन में लगाए गए आरोपों पर विचार करने के बाद पीठ ने माना कि मामले में . आदेश की आवश्यकता है। केवल विविध प्रार्थनापत्र (एमए) के माध्यम से मामले का उचित निस्तारण संभव नहीं है। इसके बाद एनजीटी ने 7 जून के आदेश को पुनर्जीवित कर दिया। बेंच ने इसे नई याचिका के तौर पर लिया है और सभी सात पक्षों को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई से पहले जवाब दाखिल करने को कहा है।
सीईसी की टीम कर चुकी निरीक्षण
आगरा कॉलेज परिसर में हरे पेड़ काटने का मामला एनजीटी में पुनर्जीवित हुआ है। वहीं सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी में अपूर्व शर्मा की शिकायत पर ही टीम निरीक्षण करने के लिए बीते माह 29 जुलाई को आगरा आई थी। टीम के सदस्यों ने आगरा कॉलेज के नालबंद चौराहा स्थित परिसर और प्राचार्य कार्यालय के पास के क्षेत्र को देखा था।
100 साल पुराने बरगद को काटने पर कार्रवाई की मांग
सत्यमेव जयते ट्रस्ट ने बाग फरजाना स्थित 100 साल पुराने बरगद के पेड़ को काटने के लिए सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है। ट्रस्टी गौतम सेठ ने शिकायत में कहा है कि बाग फरजाना के प्लॉट नंबर 25 में लगे बरगद के पेड़ को काटने की साजिश रची जा रही है, जबकि सुप्रीम कोर्ट पूर्व में इस पेड़ के संरक्षण का आदेश दे चुका है।