सीजी- डीएमएफ घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई: सतपाल सिंह छाबड़ा समेत 16 नए आरोपी बनाए, 7500 पन्नों के दस्तावेज पेश – INA

प्रवर्तन निदेशालय ने राज्य के चर्चित जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) घोटाले और धन शोधन मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए अदालत में पहली पूरक शिकायत पेश की है। जांच एजेंसी ने मुख्य आरोपी सतपाल सिंह छाबड़ा सहित 16 नए लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया है। ईडी ने विशेष अदालत में 214 पन्नों की शिकायत पेश की है और इसके साथ लगभग 7,500 पन्नों के दस्तावेज भी संलग्न किए हैं। इससे पहले ईडी इस मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी रानू साहू समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाते हुए प्राथमिक शिकायत पेश कर चुकी है। जांच के अगले चरण में 16 और लोगों की भूमिका सामने आने के बाद उनके खिलाफ यह सप्लीमेंट्री शिकायत पेश की गई है।
टेंडर आवंटन में बिचौलियों का नेटवर्क
प्रवर्तन निदेशालय की जांच में यह बात सामने आई है कि जिला खनिज न्यास की राशि से स्वीकृत कार्यों के टेंडर दिलाने में बिचौलियों ने अहम भूमिका निभाई। मुख्य आरोपी सतपाल सिंह छाबड़ा और उससे जुड़े लोग सरकारी अधिकारियों तथा टेंडर हासिल करने वाली निजी कंपनियों के बीच संपर्क का काम करते थे। ये लोग टेंडर आवंटन समिति और टेंडर हासिल करने वाली पार्टियों के बीच कड़ी के रूप में कार्य करते थे। वे अपनी पसंद की कंपनियों को बड़े-बड़े टेंडर दिलवाते थे और इसके बदले लगभग 20 से 30 प्रतिशत तक कमीशन लेते थे।
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बिना कार्य किए पूरा भुगतान लेने का आरोप
ईडी की जांच में सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि डीएमएफ फंड से जिन कार्यों के लिए टेंडर आवंटित किए गए थे, उनमें से कई कार्य वास्तव में किए ही नहीं गए। इसके बावजूद उन कार्यों के एवज में पूरा भुगतान प्राप्त कर लिया गया। जांच एजेंसी ने इस पूरे नेटवर्क की सघन पड़ताल की है। ईडी ने जांच के दौरान बैंक खातों के लेन-देन और वित्तीय दस्तावेज को खंगाला है। इन दस्तावेज के आधार पर आरोपियों के आपसी संबंधों और इस घोटाले में उनकी भूमिका का पता लगाने का प्रयास किया गया है।
पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा की जमानत याचिका खारिज
इसी मामले से जुड़ी खबर में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने चर्चित डीएमएफ घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसे पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा की जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति एनके व्यास ने सुनवाई करते हुए कहा कि आरोपी पूर्व में विभाग में वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं और यह आर्थिक गड़बड़ी सोच-समझकर की गई है। उच्च न्यायालय ने माना कि आरोपी के बाहर रहने से साक्ष्यों से छेड़छाड़ का खतरा बना रहेगा, इसलिए उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती।