Tach – ऐपल का प्राइवेसी फीचर क्यों बना Meta के लिए सिरदर्द? एक फैसले से हिला कारोबार, यूज़र्स पर पड़ा असर

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ऐपल का App Tracking Transparency (ATT) फीचर iPhone यूजर्स को अपने डेटा पर ज्यादा कंट्रोल देता है. जानिए ATT कैसे काम करता है, Tim Cook ने इसे क्यों शुरू किया और Meta (Facebook) के विज्ञापन कारोबार पर इसका क्या असर पड़ा.
Apple के इस एक फीचर ने Meta को पहुंचाया ₹83,000 करोड़ का झटका! जानिए पूरी कहानी
ऐपल ने प्राइवेसी को हमेशा अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया है. कंपनी का कहना है कि यूजर्स का डेटा सिर्फ उनका होना चाहिए और उस पर उनका पूरा कंट्रोल होना चाहिए. यही वजह है कि ऐपल खुद को Google और Meta जैसी कंपनियों से अलग बताता है, क्योंकि इन कंपनियों का बड़ा बिजनेस ऑनलाइन विज्ञापनों और यूजर्स के डेटा पर बेस्ड है.
साल 2020 में ऐपल के CEO Tim Cook ने iPhone यूजर्स के लिए एक बड़ा बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि अगर फेसबुक जैसी कोई कंपनी किसी यूजर की एक्टिविटी को अलग-अलग ऐप्स और वेबसाइट्स पर ट्रैक करना चाहती है, तो उसे पहले उस यूजर से साफ तौर पर परमिशन लेनी होगी.
कुक ने साफ कहा था कि फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को यूजर्स की अनुमति के बिना उनके ऐप और वेबसाइट पर ट्रैक करने का हक नहीं है. उन्होंने कहा कि यूजर्स को खुद तय करने का अधिकार होना चाहिए कि उनका डेटा कैसे इकट्ठा और इस्तेमाल किया जाए.
इसके कुछ महीनों बाद ऐपल ने iOS 14.5 में App Tracking Transparency नाम का फीचर लाया. इससे पहले ऐप डेवलपर्स आसानी से यूजर्स को ट्रैक कर सकते थे. वे IDFA नाम के सिस्टम से यूजर की एक्टिविटी देखकर उनका प्रोफाइल बना लेते थे और टारगेटेड विज्ञापन दिखाते थे.
App Tracking Transparency (ATT) क्या है?
ATT के आने के बाद नियम बदल गए. अब जब कोई ऐप ट्रैकिंग करना चाहता है, तो iPhone एक पॉप-अप दिखाता है. यूजर दो विकल्प में से एक चुन सकता है:
- Allow (ट्रैक करने की अनुमति दें)
- Ask App Not to Track (ऐप को ट्रैक न करने को कहें)
अगर यूजर ‘Ask App Not to Track’ चुनता है, तो ऐप न तो IDFA इस्तेमाल कर सकता है और न ही दूसरे तरीकों से क्रॉस-ऐप ट्रैकिंग कर सकता है.
फेसबुक (Meta) पर क्या असर पड़ा?
ऐपल के इस फैसले का सबसे ज्यादा असर Meta (फेसबुक की पैरेंट कंपनी) पर पड़ा. कंपनी ने खुद माना था कि इस बदलाव की वजह से उसके विज्ञापन कारोबार को बड़ा नुकसान होगा. Meta के तत्कालीन CFO Dave Wehner ने निवेशकों से कहा था कि ऐपल के इस प्राइवेसी फीचर की वजह से साल 2022 में कंपनी के कारोबार पर करीब 10 अरब डॉलर (लगभग 83,000 करोड़ रुपये) का असर पड़ने का अनुमान है.
यानी ऐपल के इस एक फीचर ने यूजर्स को अपने डेटा पर ज्यादा कंट्रोल दिया, लेकिन साथ ही उन कंपनियों के लिए मुश्किलें भी बढ़ा दीं, जिनका कारोबार यूजर्स की ऑनलाइन एक्टिविटी को ट्रैक करके विज्ञापन दिखाने पर निर्भर करता है.
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Afreen Afaq has started her career with Network 18 as a Tech Journalist, and has more than nine years experience in ‘Mobile-Technology’ beat. She is a high-performing professional with an established and proven…
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