खबर शहर , घोटाला: नए सफाईकर्मी मांगे, पुरानों को नया बताकर भेजी सूची – INA

आगरा। नगर निगम में सफाईकर्मियों की नियुक्ति के नाम पर बड़ा घोटाला हो गया। पार्षदों ने आउटसोर्सिंग पर रखे गए नए 1,135 सफाईकर्मियों की सूची मांगने के साथ दबाव बनाया तो मंगलवार को घोटाला छिपाने के लिए अफसरों ने उन कर्मचारियों की सूची भेज दी, जो कई सालों से पार्षदों के वार्ड में तैनात हैं। पुराने कर्मचारियों को ही नई भर्ती बताकर पार्षदों से हस्ताक्षर कराने के लिए पत्र भेजा गया, लेकिन पार्षदों ने सूची में नाम देखे तो हैरत में पड़ गए।

दोपहर में 35 पार्षदों ने नगर निगम आकर नगर आयुक्त से आपत्ति जताई और घोटाले की जांच की मांग की। बीते साल शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए पार्षदों ने हर वार्ड में 10-10 सफाईकर्मी बढ़ाने के लिए बजट आवंटन किया था। स्वास्थ्य विभाग ने इस बीच 1,135 सफाईकर्मियों को भर्ती दिखाकर वेतन निकालना शुरू कर दिया, लेकिन ये कर्मचारी शहर के 100 में से किसी एक वार्ड में भी नहीं पहुंचे। नगर निगम के दो सदनों और तीन कार्यकारिणी बैठकों में पार्षदों ने सफाईकर्मी मांगे, लेकिन अफसर बोले कि कोई भर्ती नहीं हुई। उनके वेतन भुगतान के बिल जब पार्षदों ने दिखाए तो अधिकारियों ने मंगलवार को पार्षदों के पास 10-10 सफाईकर्मियों के नाम की सूची भेज दी। सूची में वार्ड के 30 कर्मचारियों में से 10 के नाम नई भर्ती के तहत लिखकर भेजे गए थे।

6 सदस्यीय जांच समिति 20 तक देगी रिपोर्ट

नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य ने पार्षदों की मांग पर कहा कि उनके कार्यकाल में कोई नियुक्ति नहीं हुई है। उन्होंने कर्मचारियों के वेतन की जो फाइल साइन की, उसमें ही कह दिया था कि कोई नया कर्मचारी नहीं जुड़ना चाहिए। स्मार्ट सिटी सभागार में जब पार्षदों ने हंगामा किया और बैठक पर उन पर भी सवाल उठाए तो उन्होंने बताया कि वह इस मामले की जांच के लिए 6 सदस्यीय जांच समिति बना रहे हैं। इसमें अपर नगर आयुक्त शिशिर कुमार, सहायक नगर आयुक्त और नगर स्वास्थ्य अधिकारी होंगे, जबकि तीन पार्षदों में रवि बिहारी माथुर, प्रकाश केसवानी और कप्तान सिंह को रखा गया है। यह समिति 20 अगस्त तक अपनी जांच पूरी करके रिपोर्ट सौंपेगी।

वर्जन

-1,135 सफाईकर्मी केवल कागजों पर हैं। उनकी भर्ती के नाम पर घोटाला किया गया है। हर माह उनके नाम पर वेतन निकाला जा रहा है, लेकिन कर्मचारी हैं ही नहीं, इसीलिए पुराने कर्मियों के नाम की सूची भेजी गई- रवि माथुर, पार्षद

-सहायक नगर आयुक्त ने यह भर्तियां की हैं। उन्होंने नियुक्ति के लिए अनुमोदन मांगा है तो उनकी जवाबदेही है। करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया है। -प्रकाश केसवानी, पार्षद

-एक साल से सूची मांगी जा रही थी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग यह नहीं बता पाया कि कितने नए कर्मचारी हैं, जबकि वेतन दिया जा रहा है। -हेमंत प्रजापति, पार्षद


Credit By Amar Ujala

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