गांधी जयंती पर सिर्फ रस्म अदायगी नहीं बल्कि एक ठोस पहल: आगरा के IISWC में स्वच्छता का महाअभियान।

आगरा: अक्सर हम देखते है कि हर साल 2 अक्टूबर आता है और हम महात्मा गांधी को याद कर स्वच्छता की कसमें खाते है लेकिन इन कसमों का जमीनी सच क्या है इसे समझना बहुत जरूरी हो जाता है. इसी हकीकत और प्रयासों को बयां करती एक खबर सामने आई है. कि कैसे भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (IISWC) अनुसंधान केन्द्र आगरा ने इस बार स्वच्छता को केवल नारों और फोटो तक सीमित नहीं रखा बल्कि एक जमीनी पहल की. 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले स्वच्छता ही सेवा-2026 अभियान का समापन आज स्वच्छ भारत दिवस के अवसर पर किया गया.
सामूहिक सहभागिता और पर्यावरण की फिक्र
इस पूरे कार्यक्रम का जो सबसे अहम पहलू था वह है सामुदायिक सहभागिता. अक्सर संस्थागत आयोजनों में औपचारिकता ज्यादा होती है पर यहां अधिकारियों वैज्ञानिको और कर्मचारियों ने खुद आगे आकर सफाई गतिविधियों में हिस्सा लिया. अपशिष्ट का निस्तारण करना हो या परिसर को संवारना हर मोर्चे पर काम किया गया. यह अपने आप में एक बहुत ही सकारात्मक और आशावादी संकेत है कि अगर संस्थाएं और उसके लोग तय कर ले तो एक स्वस्थ और पर्यावरण-अनुकूल जगह बनाई जा सकती है. सबने इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाने की शपथ भी ली.
भाषणबाजी से दूर एक जरूरी विमर्श
इस दौरान जो बातें कही गई वो सिर्फ मंच से दिए जाने वाले खोखले भाषण नहीं थे. केन्द्राध्यक्ष एसी राठौर ने एक बहुत ही मार्के की बात कही कि स्वच्छता किसी एक दिन या एक विशेष अभियान तक सिमट कर नहीं रहनी चाहिए बल्कि यह हमारी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा होनी चाहिए. यह बयान उसी वीआईपी सिंड्रोम पर एक शांत और गंभीर टिप्पणी है जहां लोग एक दिन झाड़ू उठाकर कर्तव्य की इतिश्री मान लेते है. राठौर ने सफाई कार्य में लगे कर्मचारियों के समर्पित प्रयासों की खुले मन से प्रशंसा की.
वही दूसरी तरफ आनंद कुमार गुप्ता जो इस कार्यक्रम के समन्वयक और स्वच्छता नोडल अधिकारी है उन्होंने जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति समुदाय में जागरूकता फैलाने पर जोर दिया. आज के समय में कूड़ा उठाना बड़ी बात नहीं है उसे सही जगह पहुंचाना और उसका निस्तारण सबसे बड़ा सवाल है. भगवती प्रसाद ने भी साफ और स्वस्थ वातावरण बनाए रखने और जागरूकता की इसी जरूरत पर बल दिया.
श्रम का सम्मान और आगे की राह
किसी भी अभियान की सफलता उन लोगो पर टिकी होती है जो असल में जमीन पर पसीना बहाते है. कार्यक्रम के समापन पर उन कर्मचारियों को पुरस्कार दिए गए जिन्होंने इस अभियान में महत्वपूर्ण योगदान दिया. खासतौर पर उन सफाईकर्मियो को सम्मानित किया गया जो हर दिन परिसर को स्वच्छ बनाए रखने में अपना श्रम देते है. यह कदम न सिर्फ उनका हौसला बढ़ाता है बल्कि समाज में श्रम के सम्मान को भी स्थापित करता है. कार्यक्रम में कम करें पुनः उपयोग करें और पुनर्चक्रण करें यानी Reduce Reuse and Recycle के सिद्धांतों पर और कचरे के उचित निस्तारण पर गंभीरता से रोशनी डाली गई.
जब हम एक विकसित भारत का सपना देखते है तो उसकी पहली शर्त एक स्वच्छ भारत ही होती है. इस अभियान के अंत में सभी लोगो ने जो संकल्प लिया वह इस बात का ठोस संकेत है कि अभियान खत्म होने के बाद भी पर्यावरण संरक्षण की गतिविधियां निरंतर जारी रहेंगी. जरूरत बस इतनी है कि आज जगा यह सामूहिक जज्बा आने वाले हर दिन कायम रहे।