Sport : EXPLAINER: कब हुई शुरुआत, कैसे पड़ा नाम और किसने सुझाया था इसका प्लान… रणजी ट्रॉफी के बारे में जानें सब-कुछ #INA

Ranji Trophy 2026: भारतीय क्रिकेट के फर्स्ट क्लास टूर्नामेंट का नाम रणजी ट्रॉफी है. यहां खिलाड़ी लंबे फॉर्मेट में अपनी टैक्निक, पेशेंस और प्रतिभा साबित करते हैं. सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली, वीवीएस लक्ष्मण और कई अन्य दिग्गज खिलाड़ियों के करियर में घरेलू क्रिकेट की अहम भूमिका रही है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रणजी ट्रॉफी की शुरुआत कब हुई, इसे शुरू करने का विचार किसने दिया और इसका नाम किसके नाम पर रखा गया.
रणजी ट्रॉफी की शुरुआत कब हुई?
रणजी ट्रॉफी की शुरुआत 1934-35 के घरेलू क्रिकेट सत्र में हुई थी. इसका पहला मुकाबला 4 नवंबर 1934 को मद्रास और मैसूर के बीच चेपॉक मैदान पर खेला गया, जिसे आज चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम के नाम से जाना जाता है. इस मैच में मद्रास ने मैसूर को एक पारी और 23 रन से हराया. खास बात यह रही कि मुकाबला पहले ही दिन खत्म हो गया था.
शुरुआत में इस प्रतियोगिता का नाम ‘क्रिकेट चैंपियनशिप ऑफ इंडिया’ रखा गया था. पहले सीजन में 15 टीमों ने हिस्सा लिया और प्रतियोगिता नॉकआउट फॉर्मेट में खेली गई. बाद में इसका नाम बदलकर रणजी ट्रॉफी कर दिया गया. इस तरह 1934-35 का सत्र भारतीय घरेलू क्रिकेट के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया.
रणजी ट्रॉफी शुरू करने का विचार किसका था?
रणजी ट्रॉफी की शुरुआत के पीछे BCCI के शुरुआती दौर के प्रमुख अधिकारियों में शामिल एंथनी डी मेलो की अहम भूमिका थी. उस समय भारत में क्रिकेट लोकप्रिय हो रहा था, लेकिन अलग-अलग एरिया की टीमों के बीच राष्ट्रीय स्तर पर फर्स्ट क्लास कॉम्पटीशन की जरूरत महसूस की जा रही थी.
जुलाई 1934 में शिमला में हुई बीसीसीआई की बैठक में राष्ट्रीय चैंपियनशिप शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया. डी मेलो ने इसके पक्ष में प्रेजेंटेशन दी और अगले सीजन से टूर्नामेंट आयोजित करने पर सहमति बनी. उस दौर में भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था और क्रिकेट का प्रशासन भी कई प्रभावशाली भारतीय राजाओं तथा अधिकारियों के प्रभाव में था. ऐसे माहौल में राष्ट्रीय प्रतियोगिता शुरू करना भारतीय क्रिकेट को एक संगठित ढांचा देने की दिशा में बड़ा कदम था.
रणजी नाम के चुनाव में हुआ काफी विवाद
इस टूर्नामेंट का नाम महान भारतीय क्रिकेटर कुमार श्री रणजीत सिंहजी विभाजी जडेजा के नाम पर रखा गया, जिन्हें क्रिकेट जगत में रणजी के नाम से जाना जाता है. वह नवानगर रियासत के शासक थे और इंग्लैंड की ओर से इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने वाले शुरुआती भारतीय मूल के महान खिलाड़ियों में शामिल थे.
ट्रॉफी दान करने का प्रस्ताव पटियाला के महाराजा भूपिंदर सिंह ने रखा था. उन्होंने प्रतियोगिता के लिए ट्रॉफी देने की पेशकश की और इसे रणजीतसिंहजी की स्मृति में नाम देने का सुझाव दिया. इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया. हालांकि, नाम को लेकर उस समय मतभेद भी हुए थे. विजयनगरम के महाराजकुमार, जिन्हें विज्जी कहा जाता था, चाहते थे कि प्रतियोगिता का नाम तत्कालीन वायसराय लॉर्ड विलिंगडन के नाम पर रखा जाए. लेकिन आखिरकार रणजी के नाम को चुना गया और यही नाम भारतीय क्रिकेट के इतिहास का स्थायी हिस्सा बन गया.
रणजीतसिंहजी का भारतीय क्रिकेट में क्या योगदान था?
रणजीतसिंहजी का जन्म 10 सितंबर 1872 को हुआ था. वह अपनी क्लासिक बैटिंग और बॉल को देर से खेलने की पावर के लिए फेमस थे. उन्होंने इंग्लैंड में क्रिकेट खेलते हुए अपनी अलग पहचान बनाई और ससेक्स की ओर से काउंटी क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया. 1896 में उन्होंने इंग्लैंड के लिए टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया और टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले शुरुआती भारतीय मूल के खिलाड़ियों में अपना नाम दर्ज कराया.
उनकी बैटिंग स्टाइल अपने समय से काफी आगे मानी जाती थी. हालांकि रणजीतसिंहजी ने भारत की ओर से इंटरनेशनल क्रिकेट नहीं खेला, क्योंकि उस समय भारत को टेस्ट खेलने वाले स्वतंत्र क्रिकेट राष्ट्र का दर्जा नहीं मिला था. इसके बावजूद भारतीय क्रिकेट पर उनका प्रभाव इतना बड़ा था कि देश की प्रमुख घरेलू चैंपियनशिप का नाम उन्हीं के नाम पर रखा गया.
शुरुआत में रणजी ट्रॉफी का प्रारूप कैसा था?
रणजी ट्रॉफी के पहले संस्करण में 15 टीमों को चार जोन में बांटा गया था. इनमें उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम क्षेत्र शामिल थे. प्रतियोगिता नॉकआउट आधार पर खेली गई, यानी हारने वाली टीम टूर्नामेंट से बाहर हो जाती थी. उस समय क्रिकेट के मैदान, यात्रा और संसाधनों से जुड़ी चुनौतियां भी आज की तुलना में काफी अलग थीं.
समय के साथ टूर्नामेंट का फॉर्मेट बदला. इसमें लीग मैचों और नॉकआउट स्टेज को शामिल किया गया. टीमों की संख्या बढ़ने के साथ अलग-अलग समूह बनाए गए और प्रतियोगिता को ज्यादा व्यवस्थित किया गया. 2002-03 के सत्र में टीमों को एलीट और प्लेट डिवीजन में बांटने का फैसला भी किया गया. इससे अलग-अलग स्तर की टीमों को कॉम्पटेटिव का मौका मिला.
𝘽𝙖𝙩𝙩𝙞𝙣𝙜 𝙗𝙧𝙞𝙡𝙡𝙞𝙖𝙣𝙘𝙚 from these batters who topped the run-scoring charts last season 💯🙌
Who will make it . this list in Ranji Trophy 2026-27? 👌#RanjiTrophy begins TOMORROW! @mflone_ pic.twitter.com/BXLNjc9h0X
— BCCI Domestic (@BCCIdomestic) October 10, 2026
रणजी ट्रॉफी भारतीय टीम के लिए क्यों जरूरी है?
रणजी ट्रॉफी भारतीय क्रिकेट की टैलेंट को परखने का सबसे महत्वपूर्ण मंच है. सबसे लंबे फॉर्मेट में खिलाड़ियों को लंबे समय तक एकाग्रता बनाए रखनी पड़ती है, कठिन पिचों पर बल्लेबाजी करनी होती है और अलग-अलग परिस्थितियों में प्रदर्शन करना होता है. रणजी ट्रॉफी इन सभी गुणों को परखने का अवसर देती है.
चयनकर्ता घरेलू क्रिकेट में खिलाड़ियों के प्रदर्शन, तकनीक, फिटनेस और दबाव में खेलने की क्षमता पर नजर रखते हैं. युवा खिलाड़ी यहां अच्छा प्रदर्शन करके इंडिया-ए और भारतीय राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने की दावेदारी मजबूत कर सकते हैं. अनुभवी खिलाड़ियों के लिए भी यह टूर्नामेंट अपनी फॉर्म साबित करने और टीम में वापसी का रास्ता बन सकता है.
इस प्रतियोगिता का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि यहां पांच दिन तक चलने वाले फर्स्ट क्लास मुकाबलों में खिलाड़ियों की असली परीक्षा होती है. तेज गेंदबाजों को लंबे स्पेल डालने पड़ते हैं, जबकि बल्लेबाजों को कई सत्रों तक विकेट बचाकर रन बनाने होते हैं. यही अनुभव टेस्ट क्रिकेट के लिए मजबूत आधार तैयार करता है.
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