इलाहाबाद हाईकोर्ट यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए बस अग्निकांड के बावजूद सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने पर सख्त है। कोर्ट के आदेश पर राज्य सरकार ने सुरक्षा मानकों के पालन के नाम पर गाड़ियों के चालान और सीज करने के आंकड़े पेश किए। हादसे वाली बस में मानकों का पालन हुआ था या नहीं, इसकी जानकारी सरकार नहीं दे सकी। लिहाजा, अब कोर्ट ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव को पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने बस अग्निकांड की अमर उजाला में प्रकाशित खबर का स्वत: संज्ञान लेते हुए शुरू की गई सुनवाई के दौरान दिया है। साथ ही राज्य सरकार को रात में बसों की जांच, निर्धारित स्थानों पर उनके रुकने की व्यवस्था की निगरानी और मॉडिफाइड बसों की जांच के लिए समेकित योजना तैयार कर अगली सुनवाई पर 17 नवंबर को पेश करने का आदेश दिया है। डीजीपी ने भी हलफनामा दाखिल किया था।
मरना है तो मरो, बस नहीं रोकेंगे
यमुना एक्सप्रेसवे पर 24 सितंबर 2026 को हुए हादसे के बाद अमर उजाला में पीड़ित यात्रियों के हवाले से मरना है तो मरो, बस नहीं रोकेंगे शीर्षक से प्रकाशित खबर का 25 सितंबर को कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था। कोर्ट ने राज्य सरकार से हलफनामे पर विस्तृत जानकारी तलब की थी।