UP News: ‘कोई चश्मदीद नहीं, सबूतों में झोल…’, मेरठ के ब्लू ड्रम केस में क्या बोले साहिल-मुस्कान के वकील? कल हाईकोर्ट में अगली सुनवाई – INA

Meerut News: मेरठ के बहुचर्चित ‘सौरभ राजपूत हत्याकांड’ यानी ब्लू ड्रम मर्डर केस में फांसी की सजा पा चुके दोषियों मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों दोषियों द्वारा दाखिल क्रिमिनल (कैपिटल) अपील को स्वीकार करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 30 नवंबर की तारीख तय की है. मेरठ जिला एवं सत्र न्यायालय द्वारा 30 सितंबर 2026 को दोषसिद्धि और 14 अक्टूबर 2026 को दी गई मृत्युदंड (फांसी) की सजा के खिलाफ दोनों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. दोषियों की ओर से मेरठ कोर्ट के फैसले को अवैध व मनमाना बताते हुए रद्द करने और पूरी तरह दोषमुक्त किए जाने की मांग की गई है.
जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस पदम नारायण मिश्रा की खंडपीठ के समक्ष दोषियों की अपील स्वीकार की गई. सुनवाई के दौरान दोषियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुशील शुक्ला, अधिवक्ता निधि त्रिवेदी, संदीप कुमार दुबे और रविंद्र प्रताप सिंह चंदेल पेश हुए. दोषियों के अधिवक्ता संदीप कुमार दुबे ने दलील देते हुए कहा कि- ये पूरा मामला पूरी तरह से अप्रत्यक्ष/परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है. इसमें कोई भी आंखों देखा गवाह या चश्मदीद नहीं है. कानूनन ऐसी स्थिति में ‘चेन ऑफ सरकमस्टेंसेस’ (साक्ष्यों की कड़ी) पूरी होनी चाहिए, जो इस केस में मिसिंग दिख रही है.’
अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि कैपिटल अपील में सीधे फाइनल हियरिंग होती है, इसमें जमानत की अर्जी नहीं लगती. हाईकोर्ट अब मेरठ कोर्ट के निर्णय की समीक्षा कर अपना अंतिम फैसला सुनाएगा.
निचली अदालत के फैसले पर दोषियों की अपील में उठाए गए 3 बड़े सवाल
दोषियों की ओर से दाखिल याचिका में मेरठ कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए निम्नलिखित तर्क दिए गए हैं. अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को ‘उचित संदेह से परे’ साबित करने में नाकाम रहा है, फिर भी निचली अदालत ने अनुमानों और अटकलों पर मृत्युदंड की सजा दी. हत्या में इस्तेमाल चाकू, शव को ठिकाने लगाने के लिए इस्तेमाल किए गए सीमेंट और प्लास्टिक ड्रम की खरीद से जुड़े गवाहों के बयानों में भारी विरोधाभास है. पुलिस न तो इनकी पक्की रसीदें पेश कर सकी और न ही कोई CCTV फुटेज उपलब्ध करा पाई.
पुलिस द्वारा की गई बरामदगी पर किसी भी स्वतंत्र गवाह के हस्ताक्षर नहीं हैं. साथ ही वीडियोग्राफी प्रक्रिया में अनियमितताओं और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आवश्यक वैधानिक प्रमाण पत्रों की कमी का मुद्दा भी उठाया गया है.
क्या था मेरठ का खौफनाक ‘ब्लू ड्रम कांड’? (घटना की पूरी टाइमलाइन)
3 मार्च 2025 (हत्या की साजिश): सौरभ की पत्नी मुस्कान ने अपने बॉयफ्रेंड साहिल शुक्ला उर्फ मोहित के साथ मिलकर खौफनाक साजिश रची. पहले सौरभ को खाने में नशीली दवा देकर बेहोश किया गया, फिर सोते समय मुस्कान ने उसके सीने में चाकू घोंप दिया.
शव के टुकड़े और ड्रम में सीमेंट: हत्या के बाद शव को बाथरूम में ले जाया गया, जहां साहिल ने सौरभ का सिर और दोनों हाथ धड़ से काटकर अलग कर दिए. टुकड़ों को एक नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम में डालकर ऊपर से सीमेंट का घोल भर दिया गया ताकि बदबू बाहर न फैले.
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13 दिन तक शिमला-मनाली की रील: परिजनों और पड़ोसियों को गुमराह करने के लिए मुस्कान प्रेमी साहिल संग शिमला-मनाली घूमने चली गई. लगातार 13 दिनों तक इंस्टाग्राम पर फोटो-वीडियो डाले गए ताकि सबको लगे कि सौरभ और मुस्कान साथ घूम रहे हैं.
18 मार्च 2025 (भांडाफोड): शक होने पर सौरभ का छोटा भाई राहुल घर पहुंचा, तो वहां मुस्कान को साहिल के साथ पाया. भाई के बारे में पूछने पर मुस्कान हड़बड़ा गई. घर से आ रही भीषण बदबू पर जब राहुल ने शोर मचाया तो पुलिस पहुंची और सीमेंट से जमे ड्रम को काटकर सौरभ का क्षत-विक्षत शव बरामद किया.
आगे क्या?
30 सितंबर 2026 को मेरठ कोर्ट ने दोनों को दोषी ठहराते हुए 14 अक्टूबर 2026 को फांसी की सजा सुनाई थी. अब इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा अपील स्वीकार किए जाने के बाद 30 नवंबर को होने वाली सुनवाई बेहद अहम होगी, जहां यूपी सरकार (अभियोजन पक्ष) अपना पक्ष रखेगी.
‘कोई चश्मदीद नहीं, सबूतों में झोल…’, मेरठ के ब्लू ड्रम केस में क्या बोले साहिल-मुस्कान के वकील? कल हाईकोर्ट में अगली सुनवाई
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