सीजी- सीजीपीएससी घोटाला: आरोपी टामन सोनवानी को अस्पताल में मिली वीआईपी सुविधा, एक प्रहरी बर्खास्त, दो पर कार्रवाई – INA

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) घोटाला मामले के मुख्य आरोपी और विचाराधीन बंदी टामन सिंह सोनवानी को अस्पताल में वीआईपी सुविधाएं देने और सुरक्षा में लापरवाही बरतने पर केंद्रीय जेल रायपुर के जेल अधीक्षक ने बड़ी कार्रवाई की है। जेल अधीक्षक ने जिला जेल बलौदाबाजार के प्रहरी संदीप कुमार महेश्वरी को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। इसके अलावा, दंतेवाड़ा और रायगढ़ के दो प्रहरियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक प्रक्रिया शुरू कर दी है। उप जेल अधीक्षक एम.एन. प्रधान की शुरुआती जांच रिपोर्ट मिलने के बाद जेल प्रशासन ने यह कदम उठाया है।

अस्पताल में सुरक्षा नियमों का उल्लंघन

आरोपी टामन सिंह सोनवानी को सेहत संबंधी कारणों से रायपुर स्थित मेकाहारा अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती कराया गया था। नियमानुसार ड्यूटी पर तैनात प्रहरियों को आरोपी को हर समय हथकड़ी में रखने, किसी भी रिश्तेदार या बाहरी व्यक्ति से न मिलने देने और अकेला न छोड़ने के सख्त निर्देश मिले थे। हालांकि, एक चैनल के स्टिंग ऑपरेशन और सोशल मीडिया पर साझा वीडियो से खुलासा हुआ कि सुरक्षाकर्मियों ने इन आदेशों की धज्जियां उड़ा दीं। यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर प्रसारित वीडियो में सोनवानी बिना हथकड़ी के अपनी पत्नी तथा एक अन्य व्यक्ति से बातचीत करते दिखे।

जांच रिपोर्ट में खुली लापरवाही

वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद जेल प्रबंधन ने मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए थे। उप जेल अधीक्षक एम.एन. प्रधान की जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि ड्यूटी पर मौजूद प्रहरियों ने अपने दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना आचरण दिखाया। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में तीन सुरक्षाकर्मियों को इस अनुशासनहीनता के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। इनमें जिला जेल बलौदाबाजार के प्रहरी संदीप कुमार महेश्वरी, जिला जेल दंतेवाड़ा के प्रहरी नागेंद्र कुमार महतो और जिला जेल रायगढ़ के प्रहरी पवन कुमार लहरे के नाम शामिल हैं।

बिना नियमित विभागीय जांच के बर्खास्तगी

जांच रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय जेल रायपुर के जेल अधीक्षक ने कड़ी कार्रवाई का आदेश जारी किया। जेल नियमावली के लगातार उल्लंघन और ताजा गंभीर कदाचार को देखते हुए प्रहरी संदीप कुमार महेश्वरी को सेवा से पदच्युत कर दिया। जेल प्रशासन ने आदेश में स्पष्ट किया कि संवेदनशील शासकीय सेवा में ऐसे अनुशासनहीन कर्मचारियों को बनाए रखना जनहित में सही नहीं है, इसलिए बिना नियमित विभागीय जांच के यह बर्खास्तगी की गई है। वहीं, प्रहरी नागेंद्र कुमार महतो और पवन कुमार लहरे के विरुद्ध विभागीय प्रक्रिया के तहत सख्त अनुशासनात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।


Credit By Amar Ujala

Back to top button