आगरा प्रशासन की घोर लापरवाही: बारावफात और गणेश विसर्जन अंधेरे में बीते, अब राम बारात और मूर्ति विसर्जन के लिए भी सड़कें बदहाल और बत्तियां गुल

आगरा: ताजनगरी आगरा में नगर निगम और जिला प्रशासन की कुंभकर्णी नींद टूटने का नाम नहीं ले रही है। शहर में एक के बाद एक बड़े त्योहार आ रहे हैं और गुजर रहे हैं, लेकिन जनसुविधा और सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह से आंखें मूंदे बैठे हैं। समाजसेवियों द्वारा बार-बार गुहार लगाने के बावजूद शहर के प्रमुख मार्गों पर न तो स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था की गई है और न ही बदहाल सड़कों की मरम्मत का कोई काम शुरू हुआ है।
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, ‘उ. प्र. सर्वदलीय मुस्लिम एक्शन कमेटी’ के प्रांतीय अध्यक्ष हाजी बिलाल कुरैशी और जन. सेक्रेटरी असलम शेख ने जिलाधिकारी को कई बार प्रार्थना पत्र सौंपे हैं। पहला हस्तलिखित पत्र 21 अगस्त 2026 को दिया गया था, जिसमें 26 अगस्त को होने वाले 12 रबी-उल-अव्वल (बारावफात) के जुलूस के मद्देनजर रास्तों पर प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की गई थी।
अधिकारियों की संवेदनहीनता का आलम यह रहा कि बारावफात का जुलूस निकल गया, श्री गणेश चतुर्थी का मूर्ति विसर्जन भी संपन्न हो गया, लेकिन रास्तों पर न तो लाइटें लगीं और न ही गड्ढे भरे गए। थक-हारकर कमेटी ने 21 सितंबर 2026 को एक बार फिर जिलाधिकारी को अनुस्मारक (रिमाइंडर) पत्र सौंपा ।
इन्हीं रास्तों से निकलनी है ऐतिहासिक राम बारात और दुर्गा विसर्जन की झांकियां
प्रशासन की यह घोर लापरवाही इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि आगामी दिनों में नवरात्र के समापन पर माता की मूर्ति विसर्जन और शहर की बहुप्रतीक्षित ‘श्री राम बारात’ में शामिल होने वाली भव्य झांकियां भी इन्हीं रास्तों से होकर गुजरनी हैं।
- प्रार्थना पत्र में स्पष्ट रूप से जिन स्थानों को चिन्हित किया गया है, वे शहर के अत्यंत व्यस्त मार्ग हैं:
शाही जामा मस्जिद के मुख्य द्वार पर
*मदीना चौराहे पर
*मंटोला तिराहे पर
*सदर भट्टी चौराहे पर
इन स्थानों पर मिनी हाईमास्ट लाइटें लगाने की गुजारिश की गई थी। इसके अतिरिक्त, धाकरान चौराहे से बिजलीघर तक के मार्ग पर खंभों से 12 सोडियम लाइटें गायब हैं। इन अंधेरे रास्तों और टूटी सड़कों पर रात के समय भारी भीड़ और झांकियों का निकलना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है।
*क्या किसी हादसे का इंतजार कर रहे हैं अधिकारी?
जनता और समाजसेवी संस्थाएं अपनी तरफ से प्रशासन को लगातार आगाह कर रही हैं, लेकिन एसी कमरों में बैठे अधिकारियों को जनता की परेशानी से कोई सरोकार नहीं है। त्योहारों के समय जब सड़कों पर चहल-पहल और आवागमन सबसे अधिक होता है, तब वहां बुनियादी सुविधाओं का न होना ‘स्मार्ट सिटी’ के खोखले दावों की पोल खोलता है।
बड़ा सवाल यह है कि जब स्थानीय लोग और कमेटियां खुद समस्याओं को चिन्हित कर अधिकारियों की मेज तक पहुंचा रही हैं, तो फिर काम क्यों नहीं हो रहा? क्या नगर निगम और जिला प्रशासन श्री राम बारात या नवरात्र की माता की मूर्ति विसर्जन के दौरान किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं? अगर समय रहते इन मार्गों पर प्रकाश व्यवस्था और सड़क मरम्मत का कार्य नहीं हुआ, तो आगामी त्योहारों में उत्पन्न होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति की पूरी जिम्मेदारी इसी लापरवाह प्रशासन की होगी।