भगवान श्री कृष्ण ने सुदामा को दो मुट्ठी चावल में दो लोक दिए

दुद्धी-कस्बा में आयोजित रासलीला में आज कृष्ण सुदामा की प्रसग की जीवन्तता की प्रस्तुति की गयी।जब कृष्ण और सुदामा दोनों बाल्यकाल अवस्था में गुरु के यहाँ दीक्षा ले रहे थे।तो दोनों में गहरी मित्रता हो गयी।इसी बिच गुरु की आज्ञा पर जंगल से लकड़ी लेने के लिए गए सुदामा को भूख लगने पर जब कृष्ण के भी हिस्से की चना जो गुरु देव ने दी थी।खा गए जिसपर उनको मित्र के हिस्से को बिना सहमती के खाने पर दरिद्रता का श्राप मिला।दीक्षा पाने के बाद जब दोनों लौटे तो सुदामा पर दरिद्रता हावी हो गयी जिससे पूरा परिवार निधनता से ग्रसित हो गया।जब सुदामा की पत्नी ने भगवान श्री कृष्ण के पास जाने की जिद्द की तब सुदामा कृष्ण के महल पर गए फ़टे हाल देख महल का दरबान गेट पर ही रोक दिया तो सुदामा के काफी अनुरोध के बादश्री कृष्ण को सुदामा के बारे में बताया।सुदामा का नाम सुन भगवान दौड़े दौड़े गेट पर आये और उन्हें महल में लेकर हाल जाना सुदामा जी के पास रखे चावल को भगवान ने छिन कर खाने लगे।

उस दो मुट्ठी चावल में पूरा दो लोक मित्र सुदामा को दे दिया।इसके उपरांत रासलीला में प्रसंग हुआ। प्रथम में वृंदावन बिहारी रास बिहारी दिव्य रासलीला एक एक बृजगोपियों के बीच गोविंद रास कर रहे हैं।

चंद्र मिटे हैं दिन भर मिटे मिटे त्रिगुण विस्तार दीवार श्रीहरि वंश को मिटे ना नित्य विहार सूर्य चंद्र मिट सकते दिन-रात मिट सकते मगर राजेश्वर भगवान का रास अमिट है। वृंदावन में एक निधवन नाम का एक स्थान है।उसमें दिन में मोर बंदर रहते हैं।इस मोके पर सेवा कुंज आश्रम के व्यवस्थापक आनंद जी, एससी एसटी आयोग के उपाध्यक्ष जीत सिंह खरवार, पूर्व विधायक हरिराम चेरो, आयोजक अनिल गुप्ता, श्याम सुंदर अग्रहरि, पवन सिंह, कृपा शंकर उर्फ गुड्डू ,के साथ काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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