खबर शहर , दवा माफिया दे गया चकमा: पांच करोड़ की दवाएं जब्त, तीन गुर्गे भेजे गए जेल; पुलिस के हाथ नहीं लगा सरगना – INA

दवाओं के अवैध भंडारण के मामले में औषधि निरीक्षक आशुतोष मिश्रा ने धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई। इसमें धनौली निवासी इकरार, टेढ़ी बगिया निवासी शामिन उर्फ छोटू, सलुआ उर्फ मुकीम, हिमांशु अग्रवाल और आशीष जैन को नामजद किया। पूछताछ में इकरार ने बताया कि जिस गोदाम में दवाओं का भंडारण किया जा रहा था, वह उसके भाई दिलशाद का है। उसे रिश्तेदार शामिन और सलुआ ने दवाओं के बारे में जानकारी दी थी। अधिक मुनाफा कमाने के लालच में वह उनके संपर्क में आया था। इकरार की निशानदेही पर पुलिस ने सलुआ और शामिन को पकड़ लिया। उसके पास भंडारण का लाइसेंस नहीं था। दवाओं की खरीद के प्रपत्र भी नहीं थे। दवाओं के नकली होने की भी जानकारी दी।

…तो क्या छापे की भनक लग गई

जांच के दौरान सलुआ के मोबाइल में एक वीडियो भी मिला है, जिसमें यमुनापार क्षेत्र में दवाएं जलती हुई दिखाई दे रही हैं। पुलिस ने वीडियो को जांच का हिस्सा बनाते हुए दोनों से पूछताछ की। उन्होंने बताया कि वह आशीष जैन को जानते हैं। वह ट्रांसपोर्टर है। उसने उन्हें दवा व्यापारी हिमांशु अग्रवाल से मिलवाया था। हिमांशु अगस्त, 2025 में दवाओं के मामले में पकड़ा गया था। उसने एसटीएफ इंस्पेक्टर यतेंद्र शर्मा को एक करोड़ की रिश्वत देने की कोशिश की थी। उस पर तीन मामले दर्ज हुए थे। एक मामला रिश्वत का था जबकि दो दवाओं के भंडारण से संबंधित थे। तीनों में दिसंबर 2025 में जमानत हुई थी। पूछताछ में राजस्थान में भी दवाओं की सप्लाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। उसने टेढ़ी बगिया में सोनू के गोदाम को किराये पर लिया। उसके पिता पवन कुमार ने बात की थी। छापे से दो दिन पहले ही गोदाम खाली कर चला गया। इससे आशंका है कि उसे पहले से ही भनक लग गई थी।

33 बोरे दवाएं बरामद

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की टीम को छापे में करीबन 33 बोरे दवाएं बरामद कीं। इनमें ज्यादातर ब्रांडेड कंपनियों की दवाएं बताई गई हैं। औषधि निरीक्षक आशुतोष मिश्रा के अनुसार, गोदाम से अलेग्रा-एम, जानूमेट, रोसूवास-20, रोसूवास-40, एमआईरिल-1, एमआईरिल-2, कैट्रोल और लोसर-एच समेत कई प्रकार की दवाएं मिली हैं। इनमें मधुमेह, हृदय रोग, एलर्जी और कोलेस्ट्रॉल सहित विभिन्न बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। बरामद दवाएं करीब सात-आठ कंपनियों की बताई गई हैं।

नेटवर्क की जांच में जुटी टीमें

पुलिस और औषधि विभाग की टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद दवाओं की आपूर्ति कहां से हुई और इन्हें किन-किन स्थानों पर भेजा गया। इसके साथ ही क्षेत्र में ऐसे अन्य गोदामों और दवाओं के भंडारण से जुड़े लोगों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर . की कार्रवाई की जाएगी।

डीसीपी पश्चिमी जोन आदित्य सिंह ने बताया कि मामले में औषधि निरीक्षक आशुतोष मिश्रा की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज की है। मामले में इकरार, शामिन, सलुआ को न्यायालय से जेल भेजा गया है। वहीं आशीष जैन और हिमांशु अग्रवाल की तलाश की जा रही है।


Credit By Amar Ujala

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