खबर शहर , यूपी: मालगाड़ियों से दौड़ा आगरा का कारोबार, पांच महीने में 12.82 लाख टन माल लादा; रेलवे को करोड़ों की कमाई – INA

आगरा मंडल के कारोबार को मालगाड़ियों से नई गति मिल रही है। पिछले पांच महीनों में यहां से कुल 12.82 लाख टन माल लादा गया, जिसमें अकेले अगस्त माह में 2.93 लाख टन माल की लोडिंग शामिल है। अनाज की लोडिंग में सालाना 59.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि जून से अगस्त के बीच 100.5 मक्का रेक लोड किए गए हैं। जुलाई में 108 रेक लोड होने से रेलवे को 37.06 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।
यमुना ब्रिज पर सीमेंट रेक प्रतिबंधित होने के बाद कारोबारियों को सहूलियत देने के लिए कुबेरपुर और कीठम को नए वैकल्पिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। कुबेरपुर में 42 करोड़ रुपये की लागत से मालगोदाम और 57.98 करोड़ रुपये से लूप व गुड्स लाइन बनाई गई है, जहां एक साथ दो रेक संभाली जा सकती हैं। कीठम में 35 करोड़ रुपये की लागत से मालगोदाम का निर्माण हुआ है जिसमें एक लाइन है, जबकि यमुना ब्रिज में पांच लाइनें हैं और तीन रेक प्लेस हो सकती हैं।
विभिन्न केंद्रों पर माल उठान के लिए अलग-अलग समयसीमा तय की गई है, जिसमें कीठम में 72 घंटे तथा कुबेरपुर और यमुना ब्रिज में 12 घंटे का समय मिलता है। समय पर माल न उठाने की स्थिति में 75 रुपये प्रति वैगन शुल्क लगाया जाता है। कीठम और कुबेरपुर में मुख्य रूप से सीमेंट और अन्य सामग्री भेजी जा रही है, जबकि यमुना ब्रिज पर खाद्य तेल, नमक, खाद, आयरन कॉइल और रिफाइंड का आवागमन होता है। रेलवे प्रशासन द्वारा जल्द ही सभी मालगोदामों पर कारोबारियों के लिए वेइंग मशीन और मैकेनाइज्ड कन्वेयर से लोडिंग-अनलोडिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं और बढ़ाई जाएंगी।
कारोबारियों के लिए हैं पर्याप्त सुविधाएं
आगरा मंडल के जनसंपर्क अधिकारी संजय कुमार गौतम ने बताया कि सभी मालगोदामों पर कारोबारियों के लिए पर्याप्त सुविधाएं हैं। भविष्य में सुविधाएं और बढ़ाई जाएंगी। अनाज की लोडिंग में सालाना 59.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
क्या होती है रेक
रेलवे की बोलचाल में रेक का मतलब मालगाड़ी के डिब्बों के पूरे सेट से होता है, जो एक इंजन के साथ मिलकर एक पूरी ट्रेन बनाते हैं। जब बहुत सारे मालगाड़ी के डिब्बों को आपस में जोड़कर सामान ले जाने के लिए तैयार किया जाता है, तो उस पूरी ट्रेन को एक रेक कहा जाता है।