खबर शहर , UP Roadways: ऑनलाइन निगरानी फिर भी टिकट में खेल, तीन घटनाओं में 15 यात्री बिना टिकट पकड़े गए; उठे ये सवाल – INA

रोडवेज में ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था लागू होने के बावजूद टिकट गड़बड़ी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। अब तक तीन घटनाओं में यात्रियों को बिना टिकट सफर कराते पकड़ा जा चुका है। इनमें 16 अप्रैल की घटना में परिचालक ही बस से गायब था और दो यात्री बिना टिकट मिले, जबकि 5 और 6 अगस्त को हुई जांच में कुल 13 यात्री बिना टिकट पकड़े गए। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने ऑनलाइन मॉनीटरिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
16 अप्रैल को आगरा फोर्ट डिपो से फर्रुखाबाद जा रही अटल बस सेवा की बस संख्या यूपी 80 केटी 4580 को बेवर और फर्रुखाबाद के बीच प्रवर्तन दल ने रोका। बस में चालक शिवकांत मौजूद था लेकिन परिचालक अनुपस्थित था। दो यात्री बिना टिकट मिले। सहायक प्रवर्तन निरीक्षक देवेंद्र कुमार यादव, पंकज सिंह और नेत्रपाल सिंह की टीम ने 1192 रुपये का जुर्माना लगाया और रिपोर्ट मुख्यालय भेजी।
5 अगस्त को ईदगाह डिपो की बस यूपी 78 एलएन-2275 में भिंड के पास मुख्यालय लखनऊ की टीम के कपिल पचौरी, रंजीत सिंह और सत्यवीर सिंह ने जांच की। 14 में 8 यात्री बिना टिकट मिले। परिचालक अमित कुमार त्यागी पर 3221 रुपये की पेनल्टी लगाई गई और उसकी संविदा सेवा समाप्त कर दी गई। चालक भगवती प्रसाद था। 6 अगस्त को आलमबाग से आगरा आ रही बस यूपी 32 केएच-3170 में 14 में 5 यात्री बिना टिकट मिले। प्रवर्तन दल ने किराया और जुर्माना वसूला। रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक बीपी अग्रवाल ने बताया कि मामलों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की गई है। अन्य के खिलाफ भी जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ऑनलाइन माॅनीटरिंग व्यवस्था पर सवाल रोडवेज में बसों के संचालन की ऑनलाइन निगरानी व्यवस्था 1 अप्रैल से लागू की गई है। क्षेत्रीय प्रबंधक बीपी अग्रवाल ने बताया था कि सुगम ऐप पर चालक, परिचालक और बसों का विवरण पहले से दर्ज है। इस व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता लाना और मनमानी पर रोक लगाना था। हालांकि, इस घटना ने ऑनलाइन निगरानी की सजगता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्षेत्रीय प्रबंधक ने इस व्यवस्था को लागू करने के दौरान ये दावा किया था कि सभी का विवरण सुगम यात्रा ऐप में दर्ज कराया गया था। नया बस क्रू आवंटन अपडेट किया गया था, जिससे बस आवंटन, रूट, किलोमीटर और जवाबदेही पारदर्शी होने का दावा किया गया था। चालक और परिचालक के नाम पोर्टल पर फीड किए गए थे और उन्हें यूजर आईडी व पासवर्ड दिए गए थे। अधिकारियों को पोर्टल और एक व्हाट्सएप समूह के माध्यम से पूरी व्यवस्था पर नजर रखने की बात कही गई थी।