Sport : Explainer: IPL का वो नियम जिसने ऑलराउंडर्स को किया बर्बाद! कब लागू हुआ था इम्पैक्ट प्लेयर रूल? जानें कौन बना पहला खिलाड़ी #INA

Explainer: क्रिकेट को हमेशा से 11 खिलाड़ियों का खेल माना जाता है, लेकिन आधुनिक क्रिकेट में, जहां टी20 काफी पॉपुलर है. इसे और भी रोमांचक बनाने के लिए क्रिकेट के कई नियमों में बदलाव किया गया है. इंडियन प्रीमियर लीग के इतिहास में अगर किसी एक नियम ने खेल की पूरी रूपरेखा, कप्तानी की रणनीति और स्कोरबोर्ड के समीकरणों को पूरी तरह से बदल कर रख दिया, तो वह ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ का नियम है. तो चलिए, इस आर्टिकल में जानते हैं कि आईपीएल में इम्पैक्ट प्लेयर कैसे काम करता है, यह नियम कब लागू हुआ था और इसका आइडिया किसका था. इसके अलावा, हम यह भी जानेंगे कि आईपीएल इतिहास का पहला इम्पैक्ट खिलाड़ी कौन बना था.
आईपीएल में कब लागू हुआ इम्पैक्ट प्लेयर का नियम?
इम्पैक्ट प्लेयर नियम को आधिकारिक तौर पर आईपीएल 2023 में लागू किया गया था. बीसीसीआई ने दिसंबर 2022 की मिनी-ऑक्शन के आसपास इस नियम की जानकारी दे दी थी. इसके बाद, आईपीएल 2023 के ओपनिंग मैच के साथ ही इस नियम को लागू कर दिया गया था. आईपीएल 2023 का पहला मैच 31 मार्च को डिफेंडिंग चैंपियन गुजरात टाइटन्स और चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के बीच अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला गया था, जहां यह नियम पहली बार देखने को मिला था.
कौन बना IPL इतिहास का पहला ‘इम्पैक्ट प्लेयर’?
आईपीएल इतिहास का पहला इम्पैक्ट प्लेयर बनने का रिकॉर्ड चेन्नई सुपर किंग्स के तेज गेंदबाज तुषार देशपांडे ने अपने नाम किया था. चेन्नई सुपर किंग्स ने गुजरात टाइटन्स के खिलाफ आईपीएल 2023 के ओपनिंग मैच में अपनी प्लेइंग-11 में अंबाती रायडू को शामिल किया था. सीएसके ने इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए रायडू को खिलाया. इसके बाद, जब दूसरी पारी में CSK को गेंदबाजी की जरूरत पड़ी, तो कप्तान एमएस धोनी ने रायडू की जगह तुषार देशपांडे को बतौर ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ मैदान पर उतार दिया था. इसी मैच की दूसरी पारी में गुजरात टाइटंस के बल्लेबाज केन विलियमसन चोटिल हो गए थे, जिसके बाद उनकी जगह साई सुदर्शन को गुजरात के इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर खिलाया गया था.
आखिर किसका था इम्पैक्ट प्लेयर नियम का आइडिया?
इम्पैक्ट प्लेयर नियम का यह आइडिया पूरी तरह से बीसीसीआई का था. BCCI ने इस नियम को सीधे आईपीएल में लागू नहीं किया था. बीसीसीआई ने इस नियम का परीक्षण घरेलू टी20 टूर्नामेंट सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2022-23 में किया था. घरेलू क्रिकेट में यह नियम सफल होने के बाद इसे आईपीएल में फिर लागू किया गया. इस नियम उदेश्य टूर्नामेंट को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना और मैच को एकतरफा होने से रोकना था. इसके साथ ही, इसका एक बड़ा उद्देश्य भारतीय अनकैप्ड खिलाड़ियों को ज्यादा से ज्यादा मैच टाइम और मौके देना था.
हालांकि इम्पैक्ट प्लेयर नियम से पहले ऑस्ट्रेलिया की बिग बैश लीगमें ‘एक्स-फैक्टर’ (X-Factor) नियम लाया गया था. इसके अलावा आईसीसी ने भी साल 2005 में ‘सुपर सब’ नियम का परीक्षण किया था, लेकिन BCCI का इम्पैक्ट प्लेयर नियम उन सभी पुराने नियमों से कहीं अधिक लचीला और कप्तानों को खुली छूट देने वाला साबित हुआ.
कैसा काम करता है इम्पैक्ट प्लेयर नियम?
आईपीएल में इम्पैक्ट प्लेयर के नियम को आसान भाषा में कहें तो यह क्रिकेट में फुटबॉल या बास्केटबॉल की तरह ‘सब्स्टीट्यूशन’ के नियम की तरह ही काम करता है. आईपीएल में टॉस के दौरान दोनों टीमों के कप्तानों को अपनी प्लेइंग-11 के साथ-साथ 5 सब्स्टीट्यूट खिलाड़ियों के नाम भी सौंपने होते हैं. इन्हीं 5 में से किसी एक को ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ के तौर पर खिलाया जा सकता है. कोई भी कप्तान मैच के दौरान कभी भी (जैसे एक ओवर खत्म होने पर, विकेट गिरने पर, या पारियों के ब्रेक के दौरान) इम्पैक्ट प्लेयर को मैदान पर बुला सकता है.
वहीं अगर कोई टीम अपनी शुरुआती प्लेइंग-11 में पहले से ही 4 विदेशी खिलाड़ी खिला रही है, तो वह किसी अन्य विदेशी खिलाड़ी को इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर मैदान पर नहीं उतार सकती है. यानी किसी एक मैच में किसी भी टीम से 4 से ज्यादा विदेशी खिलाड़ी नहीं खेल सकते हैं, चाहे वह इम्पैक्ट प्लेयर ही क्यों न हो. विदेशी खिलाड़ी केवल तभी इम्पैक्ट प्लेयर बन सकता है जब शुरुआती प्लेइंग-11 में 3 या उससे कम विदेशी खिलाड़ी शामिल हों. वहीं, किसी बल्लेबाज के आउट होने के बाद यदि उसकी जगह कोई नया बल्लेबाज इम्पैक्ट प्लेयर बनकर आता है, तो वह भी पूरी बल्लेबाजी कर सकता है. ठीक इसी तरह, गेंदबाज भी अपने कोटे के पूरे 4 ओवर फेंक सकता है. हालांकि, जिस खिलाड़ी को इम्पैक्ट प्लेयर से रिप्लेस किया जाता है, वह दोबारा उस मैच में फील्डिंग या किसी भी अन्य रूप में हिस्सा नहीं ले सकता है.
इस नियम से क्रिकेट को क्या फायदे हुए?
इम्पैक्ट प्लेयर नियम की वजह से स्कोरबोर्ड पर रनों की बरसात होती है. इस नियम के आने के बाद से आईपीएल में हर दूसरे मैच में 200 से ज्यादा रन बन जाते हैं. इतना ही नहीं, अब तो आईपीएल में 270 से ज्यादा रन बनना भी आम हो गया है. पहले ओस के कारण टॉस जीतने वाली टीम को मैच में फायदा मिलता था, लेकिन अब इम्पैक्ट प्लेयर की मदद से टीमें दूसरी पारी में एक अतिरिक्त अनुभवी गेंदबाज या बल्लेबाज खिलाकर खेल को बराबर कर देती हैं. कई ऐसे खिलाड़ी जो सिर्फ बेहतरीन बल्लेबाजी या सिर्फ बेहतरीन गेंदबाजी के लिए ही जाने जाते थे, टीमें उन्हें इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर इस्तेमाल करती हैं, जिसका उन्हें काफी फायदा मिलता है.
इम्पैक्ट प्लेयर नियम की होती है तीखी आलोचना
इम्पैक्ट प्लेयर नियम भले ही रोमांचक है, लेकिन इसकी तीखी आलोचना भी होती रहती है. इस नियम को ऑलराउंडर्स के खिलाफ माना जाता है, क्योंकि इसकी वजह से उन्हें ज्यादा मौका नहीं मिलता. टीमें बल्लेबाजी के समय इसका इस्तेमाल करके एक अतिरिक्त बल्लेबाज खिला लेती हैं और गेंदबाजी के समय इसका उपयोग कर विशेषज्ञ गेंदबाज को मैदान पर उतार देती हैं, जिसके कारण ऑलराउंडर्स की भूमिका सीमित हो जाती है. रोहित शर्मा और विराट कोहली समेत कई दिग्गज क्रिकेटरों ने इस नियम की कड़ी आलोचना की है. रोहित और कोहली का मानना है कि यह नियम ऑलराउंडर्स के विकास को रोक रहा है.
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