Tach – चीन में महंगे हुए स्मार्टफोन, अब भारत में भी बढ़ सकते हैं दाम! रैम-स्टोरेज और चिप की बढ़ी लागत बनी वजह

चीन में मोबाइल फोन के दाम अचानक बढ़ गए हैं. हुवावे, शाओमी और ऑनर जैसे बड़े ब्रांड्स ने 1 सितंबर से कई मॉडल के रेट 200 से 1000 युआन तक बढ़ा दिए. फ्लैगशिप फोन में तो एक हजार युआन तक की बढ़ोतरी हो गई. अब सवाल यह है कि क्या यही महंगाई भारत में भी आएगी? जवाब है- हां, आ सकती है, बल्कि कई जगह आ भी चुकी है. दरअसल यह बढ़ोतरी सिर्फ चीन की लोकल समस्या नहीं है. असली वजह ग्लोबल है.
मेमोरी चिप्स यानी रैम और स्टोरेज के दाम आसमान छू रहे हैं. एआई के चलते डेटा सेंटर में हाई-बैंडविड्थ मेमोरी की डिमांड बहुत बढ़ गई है. कंपनियां उसी तरफ सप्लाई शिफ्ट कर रही हैं.
नतीजा यह कि आम स्मार्टफोन में लगने वाली मेमोरी महंगी हो गई. क्वालकॉम जैसे प्रोसेसर बनाने वालों ने भी अपने चिप्स के दाम दो अंकों में बढ़ा दिए. चीन के ब्रांड्स को मजबूरन यह लागत ग्राहकों पर डालनी पड़ी.
भारत में भी यही सप्लाई चेन काम करती है. शाओमी, रियलमी, वीवो, ओप्पो, वनप्लस जैसे ब्रांड्स के फोन में बहुत से पार्ट्स चीन या ग्लोबल मार्केट से आते हैं. मेमोरी और चिप महंगे होंगे तो यहां भी प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ेगी.
मेमोरी की डिमांड
2026 में भारत में पहले ही कई राउंड प्राइस हाइक हो चुके हैं. बजट और मिड-रेंज फोन 10 से 30% तक महंगे हो गए. कुछ मॉडल में तो 40% तक की बढ़ोतरी देखी गई. सस्ते फोन सेगमेंट पर सबसे ज्यादा असर पड़ा क्योंकि उसमें मेमोरी की लागत कुल कीमत का बड़ा हिस्सा होती है.
भारत में मेक इन इंडिया और पीएलआई स्कीम की वजह से असेंबली तो बहुत हो रही है, लेकिन पूरा फोन यहां नहीं बनता. कैमरा, डिस्प्ले, बैटरी और खासकर मेमोरी चिप्स अभी भी बाहर से आते हैं. रुपये की कमजोरी भी आयात को महंगा बनाती है. इसलिए चीन में दाम बढ़ने का असर देर-सबेर यहां भी दिखता है. कंपनियां कुछ समय तक अपने मार्जिन से एब्जॉर्ब कर लेती हैं, लेकिन लंबे समय तक नहीं चला पातीं.
त्योहारों के सीजन में या नए लॉन्च पर यह बढ़ोतरी साफ नजर आ सकती है. क्या पूरी तरह बचना मुमकिन है? थोड़ा बहुत राहत लोकल मैन्युफैक्चरिंग से मिल सकती है. सैमसंग और ऐपल जैसे ब्रांड्स का यहां अच्छा बेस है, लेकिन वे भी ग्लोबल कॉस्ट से छूटे नहीं है.
बजट फोन खरीदने वाले ग्राहक सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. लोग या तो महंगे फोन की तरफ शिफ्ट करेंगे, या पुराना फोन और चलाएंगे, या सेकंड-हैंड मार्केट देखेंगे.
2027 में क्या रहेगा हाल
विशेषज्ञों का कहना है कि मेमोरी के दाम 2027 तक ऊंचे रह सकते हैं. जब तक एआई की डिमांड नहीं थमती, तब तक राहत की उम्मीद कम है. भारत में पहले से ही शिपमेंट गिर रहे हैं क्योंकि महंगे फोन की डिमांड कम पड़ रही है. तो चीन में हो रही बढ़ोतरी को सिर्फ वहां की खबर मत समझिए. यह ग्लोबल महंगाई की झलक है जो भारतीय बाजार तक पहुंच रही है.
अगर आप नया फोन लेने वाले हैं तो जल्दी फैसला करें या ऑफर्स का इंतजार करें. दाम और बढ़ने की पूरी संभावना बनी हुई है. थोड़ी सतर्कता से आप सही समय पर सही डील पा सकते हैं.
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