Technology, मेटा: व्हाट्सएप का ‘सीक्रेट’ कोड हुआ लीक, एआई चैटबॉट को दिए थे यूजर्स से कानूनी अधिकार छिपाने के कड़े निर्देश – Whatsapp Hidden Ai Instructions Exposed Users Legal Rights Meta Bot Controversy In Hindi — INA

सार
मेटा के स्वामित्व वाले व्हाट्सएप (WhatsApp) की एक बड़ी चालाकी सामने आई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने अपने हेल्प पेजों के सोर्स कोड में कुछ ‘छिपे हुए निर्देश’ डाले थे। इन निर्देशों में एआई सपोर्ट चैटबॉट को सख्त आदेश दिया गया था कि वह यूजर्स को डेटा सुरक्षा अधिकारियों या कानूनी शिकायत की जानकारी न दे। विवाद बढ़ने पर कंपनी ने इसे ‘तकनीकी गड़बड़ी’ बताकर हटा लिया है।

दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप (WhatsApp) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। डेटा-डिलीशन सॉफ्टवेयर कंपनी रेडैक्ट (Redact) की एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाट्सएप ने अपने हेल्प पेजों के सोर्स कोड (HTML) में कुछ ऐसे ‘छिपे हुए निर्देश’ डाले थे, जो उसके एआई सपोर्ट चैटबॉट को यूजर्स से अहम जानकारियां छिपाने का आदेश देते थे। सबसे हैरानी की बात यह है कि चैटबॉट को सख्त हिदायत दी गई थी कि वह परेशान यूजर्स को डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेटर्स के पास जाने की सलाह बिल्कुल न दे।
अकाउंट डिलीट करने वालों से कंपनी ने छिपाई ये बात
रिपोर्ट के अनुसार, जब कोई यूजर अपना अकाउंट डिलीट करने के लिए हेल्प सेंटर पर जाता है, तो उसे 30 से 120 दिन की डिलीशन पॉलिसी बताई जाती है। लेकिन इसी पेज के कोड के पीछे एआई चैटबॉट के लिए एक सीक्रेट निर्देश छिपा था। इसमें कहा गया था कि अगर यूजर को अकाउंट डिलीट करने में परेशानी हो, तो बॉट उसे किसी डेटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी, रेगुलेटर या सुपरवाइजरी अथॉरिटी से संपर्क करने की सलाह न दे।
यह निर्देश व्हाट्सएप की अपनी ही यूरोपीय प्राइवेसी पॉलिसी के खिलाफ नजर आता है, जिसमें साफ तौर पर कहा गया है कि यूजर्स को आयरिश डेटा प्रोटेक्शन कमीशन में शिकायत करने का पूरा अधिकार है। इसके अलावा, बॉट को यह सुझाव देने से भी रोका गया था कि कंपनी यूजर की तरफ से मैनुअली अकाउंट डिलीट कर सकती है।
कानूनी मामलों पर एआई बॉट को ‘चुप’ रहने का आदेश
रेडैक्ट को एक और गंभीर निर्देश रिपोर्टिंग और ब्लॉकिंग से जुड़े पेज पर मिला। इसमें एआई चैटबॉट को आदेश दिया गया था कि अगर कोई यूजर ‘कानूनी कार्रवाई’, ‘मुकदमे’, ‘वकील’ या ‘कोर्ट’ का जिक्र करता है, तो बॉट उसे व्हाट्सएप की ‘टर्म्स ऑफ सर्विस’ या ‘प्राइवेसी पॉलिसी’ का हवाला न दे। इतना ही नहीं, बॉट को GDPR या CCPA जैसे सख्त प्राइवेसी कानूनों का जिक्र करने या उनकी व्याख्या करने से भी पूरी तरह रोक दिया गया था, भले ही यूजर खुद उनके बारे में सीधे सवाल पूछे।
80 पेजों पर मिले 100 से ज्यादा ऐसे ब्लॉक्स
रेडैक्ट ने व्हाट्सएप हेल्प सेंटर के कुल 545 पेजों की बारीकी से जांच की। इस दौरान उन्हें 80 पेजों पर ऐसे 102 छिपे हुए इंस्ट्रक्शन ब्लॉक मिले। ये निर्देश पेज के सोर्स कोड में “HelpContentGalaxyLLMInclude” नाम से मौजूद थे, जिन्हें कोई भी आम यूजर अपनी स्क्रीन पर नहीं देख सकता था।
इनमें से कुछ निर्देश सामान्य थे, लेकिन कुछ बेहद हैरान करने वाले थे। उदाहरण के लिए, एक पेज पर बॉट को यह निर्देश था कि जिन यूजर्स का अपने फोन नंबर से एक्सेस खत्म हो गया है, उनके लिए सिर्फ ‘इंतजार करना’ ही एकमात्र सही जवाब है।
सफाई में व्हाट्सएप ने क्या कहा?
इस खुलासे के बाद टेक जगत में हड़कंप मच गया। टेक पब्लिकेशन ‘वायर्ड’ द्वारा मेटा (Meta) से संपर्क करने के तुरंत बाद, 18 अक्टूबर तक इन सभी 102 ब्लॉक्स को गुपचुप तरीके से हटा लिया गया।
व्हाट्सएप के प्रवक्ता जोशुआ ब्रेकमेन ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि ये निर्देश सीधे यूजर्स के लिए नहीं, बल्कि कंपनी के इंटर्नल एआई सपोर्ट बॉट को ट्रेन करने के लिए थे। उनका मकसद बॉट को सिर्फ व्हाट्सएप से जुड़ी तकनीकी मदद तक सीमित रखना था, ताकि वह गलती से भी किसी को ‘कानूनी सलाह’ न देने लगे। प्रवक्ता ने दावा किया कि ये निर्देश एक ‘बग’ (तकनीकी खराबी) के कारण पब्लिक पेजों के कोड में दिखने लगे थे, जिसे अब फिक्स कर दिया गया है।
भले ही यह कोड अब हटा दिया गया हो, लेकिन इस घटना ने बड़ी टेक कंपनियों की एआई ट्रेनिंग और पारदर्शिता पर एक बड़ा सवालिया निशान जरूर लगा दिया है।
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