UP News: पिता ने बेटी के ससुरालियों के खिलाफ करवाया केस दर्ज, फिर 17 महीने बाद कोर्ट में अपने ही बयान से मुकरा… कोर्ट ने सुनाई ये सजा – INA

उत्तर प्रदेश के बरेली अदालत ने झूठे दहेज और हत्या के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. न्यायाधीश ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने लड़की के पिता को सजा सुनाकर साफ संदेश दिया कि झूठे मुकदमों से निर्दोषों को परेशान करना अब आसान नहीं होगा. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि ऐसे मुकदमे न केवल निर्दोष लोगों का जीवन बर्बाद करते हैं. बल्कि न्याय प्रणाली पर भी गलत प्रभाव डालते हैं.

बरेली के विशारतगंज क्षेत्र की रहने वाली शालू की शादी 2019 में सोनू नाम के युवक से हुई थी. 20 जुलाई 2023 को शालू ने अपने ससुराल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. इस घटना के बाद उसके पिता बाबूराम ने दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज करवाया, जिसमें पति सोनू, ससुर पोशाकीलाल, देवर भारत, देवर सुमित, ननद अंजलि और दादी सास को आरोपी बनाया गया. मामले की जांच के दौरान पुलिस ने पति और ससुर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

‘बेटी ने खुद ही की आत्महत्या’

जब अदालत में सुनवाई शुरू हुई, तो लड़की के पिता ने अपने ही आरोपों से मुकरते हुए कहा कि उनकी बेटी गुस्सैल स्वभाव की थी और उसने खुद ही आत्महत्या की थी. इस कबूलनामे के बाद कोर्ट ने बाबूराम को ही झूठा मुकदमा दर्ज कराने का दोषी माना और उसे सजा सुनाई. फैसला सुनाते हुए जज ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने बैंगलोर के एआई इंजीनियर अतुल सुभाष की आत्महत्या का उदाहरण दिया.

झूठे आरोपों पर कोर्ट ने सुनाई सजा

उन्होंने कहा कि वैवाहिक विवादों में झूठे आरोपों के कारण निर्दोष लोगों को मानसिक और आर्थिक पीड़ा झेलनी पड़ती है. इसके अलावा उन्होंने हरिवंशराय बच्चन की कविता और रामचरितमानस के दोहे का उल्लेख करते हुए कहा कि सपने देखने चाहिए, लेकिन उनकी वास्तविकता को भी समझना जरूरी है. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने बताया कि झूठे आरोपों के कारण पति सोनू, ससुर पोशाकीलाल और दादी सास को 17 महीने जेल में रहना पड़ा.

कोर्ट ने लगाया जुर्माना

अदालत ने इस आधार पर फैसला सुनाया कि लड़की के पिता बाबूराम को भी उतने ही दिन जेल में रहना पड़ेगा. साथ ही उसे 2,54,352 रुपये का जुर्माना भी भरना होगा. कोर्ट ने कहा कि झूठे दहेज उत्पीड़न के मुकदमे समाज में आम हो गए हैं. कई बार पत्नी या उसके परिवार वाले ससुराल पक्ष पर झूठे आरोप लगाकर पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं. कोर्ट ने यह भी कहा कि संयुक्त परिवारों की परंपरा टूट रही है और कई नवविवाहिताएं पति पर परिवार से अलग होने का दबाव डालती हैं.

जब ऐसा नहीं होता, तो झूठे मुकदमे दर्ज करा दिए जाते हैं. इस फैसले ने झूठे मुकदमों पर रोक लगाने का मार्ग प्रशस्त किया है. अदालत ने कहा कि निर्दोषों को बचाने और न्याय प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए झूठे आरोप लगाने वालों को भी सख्त सजा मिलनी चाहिए. यह फैसला समाज में वैवाहिक विवादों को लेकर एक नई दिशा देने वाला साबित होगा.

पिता ने बेटी के ससुरालियों के खिलाफ करवाया केस दर्ज, फिर 17 महीने बाद कोर्ट में अपने ही बयान से मुकरा… कोर्ट ने सुनाई ये सजा





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