UP News: फैक्ट्री गेट से सड़क तक हक की लड़ाई, गुरुग्राम में बढ़ा वेतन और नोएडा में मचा बवाल; आंदोलन की 10 तस्वीरें – INA

13 अप्रैल 2026... सोमवार का दिन... दिल्ली-NCR के लिए बेहद तनावपूर्ण रहा. हजारों मजदूर सड़कों पर उतर आए. गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़ और बुलंदशहर में बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुए. वेतन वृद्धि, ओवरटाइम भुगतान और श्रम कानूनों के पालन की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे उग्र होता गया, जिससे कई जगह हालात बिगड़ गए.

13 अप्रैल 2026… सोमवार का दिन… दिल्ली-NCR के लिए बेहद तनावपूर्ण रहा. हजारों मजदूर सड़कों पर उतर आए. गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़ और बुलंदशहर में बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुए. वेतन वृद्धि, ओवरटाइम भुगतान और श्रम कानूनों के पालन की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे उग्र होता गया, जिससे कई जगह हालात बिगड़ गए.

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 इस आंदोलन की शुरुआत गुरुग्राम के मानेसर औद्योगिक क्षेत्र से हुई थी, जहां मजदूरों ने वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया था. इसके बाद मजदूरों के न्यूनतम वेतन में करीब 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी. इसी के बाद उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहरों में काम कर रहे मजदूरों में असंतोष फैल गया, क्योंकि उन्हें समान काम के बावजूद कम वेतन मिलने की शिकायत थी.

इस आंदोलन की शुरुआत गुरुग्राम के मानेसर औद्योगिक क्षेत्र से हुई थी, जहां मजदूरों ने वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया था. इसके बाद मजदूरों के न्यूनतम वेतन में करीब 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी. इसी के बाद उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहरों में काम कर रहे मजदूरों में असंतोष फैल गया, क्योंकि उन्हें समान काम के बावजूद कम वेतन मिलने की शिकायत थी.

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 नोएडा के मजदूरों ने आरोप लगाया कि गुरुग्राम के मुकाबले उन्हें काफी कम वेतन मिल रहा है, जबकि काम एक जैसा है. कई मजदूरों का कहना था कि उन्हें अब भी 10 से 12 हजार रुपये तक ही वेतन दिया जा रहा है, जो महंगाई के हिसाब से बेहद कम है. उन्होंने न्यूनतम 20 हजार रुपये मासिक वेतन की मांग रखी और इसी मुद्दे को लेकर बड़े स्तर पर प्रदर्शन शुरू किया.

नोएडा के मजदूरों ने आरोप लगाया कि गुरुग्राम के मुकाबले उन्हें काफी कम वेतन मिल रहा है, जबकि काम एक जैसा है. कई मजदूरों का कहना था कि उन्हें अब भी 10 से 12 हजार रुपये तक ही वेतन दिया जा रहा है, जो महंगाई के हिसाब से बेहद कम है. उन्होंने न्यूनतम 20 हजार रुपये मासिक वेतन की मांग रखी और इसी मुद्दे को लेकर बड़े स्तर पर प्रदर्शन शुरू किया.

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 नोएडा पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह के अनुसार, सोमवार को शहर के 83 स्थानों पर लगभग 42 हजार मजदूर प्रदर्शन में शामिल हुए थे. हालांकि अधिकांश जगहों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन दो स्थानों पर हालात हिंसक हो गए. पुलिस को वहां बल प्रयोग करना पड़ा. अन्य जगहों पर प्रशासन ने बातचीत के जरिए स्थिति को संभालने की कोशिश की, जिससे कई मजदूर शांतिपूर्वक वापस लौट गए.

नोएडा पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह के अनुसार, सोमवार को शहर के 83 स्थानों पर लगभग 42 हजार मजदूर प्रदर्शन में शामिल हुए थे. हालांकि अधिकांश जगहों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन दो स्थानों पर हालात हिंसक हो गए. पुलिस को वहां बल प्रयोग करना पड़ा. अन्य जगहों पर प्रशासन ने बातचीत के जरिए स्थिति को संभालने की कोशिश की, जिससे कई मजदूर शांतिपूर्वक वापस लौट गए.

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 पुलिस का कहना है कि जब स्थानीय मजदूर वापस जाने लगे, तब सीमावर्ती जिलों से आए कुछ समूहों ने माहौल को भड़काने की कोशिश की. इन बाहरी तत्वों ने प्रदर्शन को हिंसक दिशा में मोड़ दिया. पुलिस ने ऐसे कई लोगों को हिरासत में लिया है और सीसीटीवी फुटेज के जरिए अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है. प्रशासन का दावा है कि इस हिंसा के पीछे सुनियोजित साजिश हो सकती है.

पुलिस का कहना है कि जब स्थानीय मजदूर वापस जाने लगे, तब सीमावर्ती जिलों से आए कुछ समूहों ने माहौल को भड़काने की कोशिश की. इन बाहरी तत्वों ने प्रदर्शन को हिंसक दिशा में मोड़ दिया. पुलिस ने ऐसे कई लोगों को हिरासत में लिया है और सीसीटीवी फुटेज के जरिए अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है. प्रशासन का दावा है कि इस हिंसा के पीछे सुनियोजित साजिश हो सकती है.

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 दोपहर करीब एक बजे के बाद स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी. पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें शुरू हो गईं, जिसके बाद कई इलाकों में हिंसा फैल गई. प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया, वाहनों में तोड़फोड़ की और कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया. शाम तक नोएडा और गाजियाबाद के कई इलाकों में हालात काफी गंभीर हो गए और प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करनी पड़ी.

दोपहर करीब एक बजे के बाद स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी. पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें शुरू हो गईं, जिसके बाद कई इलाकों में हिंसा फैल गई. प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया, वाहनों में तोड़फोड़ की और कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया. शाम तक नोएडा और गाजियाबाद के कई इलाकों में हालात काफी गंभीर हो गए और प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करनी पड़ी.

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सोमवार सुबह नोएडा के औद्योगिक सेक्टरों में मजदूर फैक्ट्रियों के बाहर इकट्ठा होने लगे. शुरुआत में प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, जहां मजदूर गेट के बाहर बैठकर नारेबाजी कर रहे थे. लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, भीड़ बढ़ती गई और हालात धीरे-धीरे नियंत्रण से बाहर होने लगे. दोपहर तक हजारों की संख्या में मजदूर सड़कों पर उतर आए और कई प्रमुख मार्गों पर जाम लग गया.

सोमवार सुबह नोएडा के औद्योगिक सेक्टरों में मजदूर फैक्ट्रियों के बाहर इकट्ठा होने लगे. शुरुआत में प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, जहां मजदूर गेट के बाहर बैठकर नारेबाजी कर रहे थे. लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, भीड़ बढ़ती गई और हालात धीरे-धीरे नियंत्रण से बाहर होने लगे. दोपहर तक हजारों की संख्या में मजदूर सड़कों पर उतर आए और कई प्रमुख मार्गों पर जाम लग गया.

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नोएडा-गाजियाबाद बॉर्डर पर इस आंदोलन का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला, जहां कई वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया और एक दर्जन से अधिक गाड़ियों में आग लगा दी गई. वहीं हापुड़ और बुलंदशहर में भी प्रदर्शन हुए और सड़कों पर जाम लगाया गया, लेकिन वहां हिंसा की घटनाएं नहीं हुईं. गुरुग्राम और फरीदाबाद में प्रशासन की सख्ती के कारण स्थिति अपेक्षाकृत नियंत्रण में रही.

नोएडा-गाजियाबाद बॉर्डर पर इस आंदोलन का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला, जहां कई वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया और एक दर्जन से अधिक गाड़ियों में आग लगा दी गई. वहीं हापुड़ और बुलंदशहर में भी प्रदर्शन हुए और सड़कों पर जाम लगाया गया, लेकिन वहां हिंसा की घटनाएं नहीं हुईं. गुरुग्राम और फरीदाबाद में प्रशासन की सख्ती के कारण स्थिति अपेक्षाकृत नियंत्रण में रही.

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स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस ने 90 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया. इनमें से कई लोगों को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया, जबकि हिंसा में शामिल आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है. पुलिस अधिकारी लगातार सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं ताकि उपद्रवियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके.

स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस ने 90 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया. इनमें से कई लोगों को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया, जबकि हिंसा में शामिल आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है. पुलिस अधिकारी लगातार सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं ताकि उपद्रवियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके.

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इस आंदोलन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी का फैसला लिया है. उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में 1000 से 3000 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है. यह नया शासनादेश 1 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में लागू किया गया है. इसके बावजूद मजदूरों का कहना है कि यह बढ़ोतरी अभी भी उनकी जरूरतों के मुकाबले पर्याप्त नहीं है.

इस आंदोलन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी का फैसला लिया है. उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में 1000 से 3000 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है. यह नया शासनादेश 1 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में लागू किया गया है. इसके बावजूद मजदूरों का कहना है कि यह बढ़ोतरी अभी भी उनकी जरूरतों के मुकाबले पर्याप्त नहीं है.

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फैक्ट्री गेट से सड़क तक हक की लड़ाई, गुरुग्राम में बढ़ा वेतन और नोएडा में मचा बवाल; आंदोलन की 10 तस्वीरें


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