UP News: ‘मैं बिल्कुल ठीक हूं…’ वीडियो कॉल पर परिवार से बात करते हुए मुस्कुराए डॉक्टर टीके लहरी – INA

Varanasi News: बीएचयू के पूर्व छात्र आशुतोष सिंह ने अस्पताल के आईसीयू में भर्ती पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. टीके लहरी से मुलाकात की. इस दौरान आशुतोष सिंह ने वीडियो कॉल के जरिए डॉ. लहरी की उनके परिजनों से बातचीत भी कराई. करीब डेढ़ मिनट चली बातचीत में डॉ. लहरी काफी प्रसन्न नजर आए. उन्होंने अपने बहनोई को देखते ही कहा, ये हमारे सबसे छोटे जमाई हैं. बातचीत के दौरान उन्होंने परिजनों को बताया कि वह बिल्कुल ठीक हैं और बीएचयू में उनकी अच्छी तरह देखभाल की जा रही है.

वीडियो कॉल पर डॉ. लहरी की सबसे छोटी बहन रीता, उनके पति और उनकी भतीजी डॉ. केका मैत्रा ने उनसे बातचीत की. आशुतोष सिंह के मुताबिक, डॉ. लहरी से बातचीत के बाद उनके परिजनों ने बीएचयू प्रशासन के प्रति कृतज्ञता जताई. साथ ही परिजनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से अनुरोध किया कि भविष्य में डॉ. लहरी से जुड़ी कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी या घटना सामने आती है तो उन्हें तत्काल अवगत कराया जाए.

मारपीट के आरोपों पर बीएचयू का खंडन

डॉ. लहरी के साथ मारपीट किए जाने के आरोपों को लेकर बीएचयू प्रशासन ने रविवार को अपना बयान जारी कर खंडन किया. विश्वविद्यालय के मुताबिक, करीब आठ महीने से आईसीयू में भर्ती प्रो. लहरी उम्रदराज होने के कारण सिनाइल डिमेंशिया और व्यवहार परिवर्तन जैसी मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं. इसके अलावा वह हृदय रोग और टीबी से भी पीड़ित हैं.

बीएचयू का कहना है कि उम्रजनित शारीरिक और मानसिक समस्याओं के कारण डॉ. लहरी कई बार इलाज, साफ-सफाई और दैनिक गतिविधियों में सहयोग नहीं करते. विश्वविद्यालय के अनुसार, उन्हें थप्पड़ नहीं मारा गया था, बल्कि साफ-सफाई के दौरान उन्हें फोर्सफुली रीस्ट्रेन, यानी बलपूर्वक रोकना पड़ा. बीएचयू का कहना है कि उस समय उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को देखते हुए इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था.

रिटायरमेंट के 23 साल बाद भी सेवा का सिलसिला

डॉ. तपन कुमार लाहिड़ी को बनारस में गरीबों के लिए समर्पित चिकित्सक के तौर पर जाना जाता है. वर्ष 2016 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था. उन्होंने 1974 में बीएचयू में प्रोफेसर के तौर पर अपना करियर शुरू किया. वर्ष 2003 में सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनका बीएचयू और मरीजों से रिश्ता खत्म नहीं हुआ.

कहा जाता है कि 1994 से उन्होंने अपनी पूरी तनख्वाह गरीब मरीजों की मदद के लिए दान की. रिटायरमेंट के बाद मिली पेंशन में से भी वह अपनी जरूरत भर की रकम ही रखते हैं. पीएफ की रकम भी उन्होंने बीएचयू के लिए छोड़ दी. विदेशों के बड़े अस्पतालों से मिले प्रस्तावों को भी उन्होंने स्वीकार नहीं किया.

डॉ. लहरी की सादगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जाता है कि उनके पास अपना चारपहिया वाहन तक नहीं है और वह लंबे समय तक अपने आवास से अस्पताल तक पैदल आते-जाते रहे हैं. गंभीर हृदय रोग से जूझ रहे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए उन्होंने लंबे समय तक बेहद कम खर्च में उपचार उपलब्ध कराया.

पीएम और सीएम से मुलाकात से भी किया था इनकार

डॉ. लहरी की मरीजों के प्रति प्रतिबद्धता के कई किस्से चर्चित रहे हैं. बताया जाता है कि उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के कार्यक्रमों को भी मरीजों की प्राथमिकता के चलते टाल दिया था.

2018 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनसंपर्क अभियान के दौरान डॉ. लहरी से मुलाकात प्रस्तावित थी. बताया जाता है कि उन्होंने प्रशासन से कहा था कि अगर किसी को उनसे मिलना है तो वह ओपीडी में आकर मिले. बाद में मरीजों की समस्याओं को देखते हुए मुलाकात का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया. यही वजह है कि आज भी डॉ. लहरी को बनारस में डॉक्टर गॉड के नाम से सम्मान दिया जाता है.

‘मैं बिल्कुल ठीक हूं…’ वीडियो कॉल पर परिवार से बात करते हुए मुस्कुराए डॉक्टर टीके लहरी


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