UP News: सिर्फ चुनावी वादों में मेट्रो, ट्रैक से कोसों दूर… ग्रेनो वेस्ट के लोग बोले- जाम झेल रही 5 लाख की आबादी – INA

ग्रेटर नोएडा वेस्ट में मेट्रो कनेक्टिविटी को लेकर नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है. 2027 विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही मेट्रो का मुद्दा फिर से राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है. क्षेत्र में करीब 5-6 लाख लोग रह रहे हैं और रोज हजारों लोग दिल्ली- नोएडा में नौकरी के लिए आवागमन करते हैं. इसके बावजूद मजबूत और विश्वसनीय सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अब तक स्थापित नहीं हो सकी है. ग्रेटर नोएडा वेस्ट में तेजी से हाइराइज सोसायटी बसी, लेकिन इस बीच लोग निजी वाहन और टेंपो व ई रिक्शा के सहारे रोजाना सफर करने को मजबूर हैं.
इसका असर ट्रैफिक, प्रदूषण और समय की बर्बादी के रूप में सामने आ रहा है. सैकड़ों लोग रोजाना 2 से 3 घंटे सिर्फ आने-जाने में बर्बाद कर देते हैं. स्थानीय निवासियों का कहना है कि मेट्रो का मुद्दा हर चुनाव में प्रमुख एजेंडा बनता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई प्रगति या काम आज तक देखने को नहीं मिला.
फाइल कहां अटकी किसी को नहीं पता?
गौर सिटी एवेन्यू-1 के निवासी मनीष श्रीवास्तव का कहना है कि जब यह शहर बस रहा था, तभी से मेट्रो कनेक्टिविटी का वादा किया जा रहा है. उनके अनुसार हर चुनाव के समय कोई ना कोई नेता या प्राधिकरण का अधिकारी बयान देता है. फ्लैटों के दाम 10 से 20 प्रतिशत बढ़ जाते हैं, लेकिन मेट्रो का काम आगे नहीं बढ़ता. उनका यह भी कहना है कि आज आम जनता को यह तक नहीं पता की मेट्रो की फाइल किस स्तर पर लंबित है और किसकी मंजूरी अभी बाकी है.
मेट्रो के भरोसे लिया था फ्लैट
चेरी काउंटी निवासी सुनील सचदेवा बताते हैं कि उन्होंने साल 2014 में अपना फ्लैट खरीदा था. फ्लैट लेने का मुख्य कारण यह था कि बिल्डर ने बड़े-बड़े होर्डिंग और वाउचर में कहा था कि यहां मेट्रो जल्द आने वाली है. उनका कहना है कि वर्षों बीत गए, लेकिन मेट्रो अभी सपना बनी हुई है. चुनाव आते ही मेट्रो का मुद्दा उछल जाता है, लेकिन स्पष्ट समय नहीं बताया जाता. उनके अनुसार क्षेत्र निवासी मेट्रो के सपनों के साथ जीने को मजबूर हैं.
कई बार ज्ञापन दिए, पत्र लिखे लेकिन समाधान नहीं
ग्रेटर नोएडा वेस्ट की वीवीआइपी होम्स के रहने वाले अमित कुमार सोनी ने बताया कि इस बार मेट्रो को लेकर लोगों में नाराजगी बहुत ज्यादा है. उन्होंने बताया कि क्षेत्र के निवासी ने सांसद, विधायक और यहां तक की पीएम को भी पत्र लिखा है.
नोएडा प्राधिकरण के सीईओ को नियमित सिटी बस सेवा शुरू करने के लिए ज्ञापन भी दिया गया. लेकिन अब तक कोई स्थाई समाधान सामने नहीं आया. उनका कहना है कि मेट्रो हर बार चुनावी वादों में आती है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम नहीं दिखता.
घोषणा ही नहीं टाइमलाइन चाहिए
ग्रेटर नोएडा वेस्ट की स्प्रिंग मीडो सोसायटी के रहने वाले विकास कटियार का कहना है कि अब लोगों को केवल भाषण या हवा- हवाई वादे नहीं चाहिए. उनके अनुसार क्षेत्र में लाखों लोग रह रहे हैं और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की समस्या रोजमर्रा की चुनौती बन चुकी है. उन्होंने बताया कि इस बार मेट्रो परियोजना की स्पष्ट समय सीमा घोषित होनी चाहिए.
यदि सरकार गंभीर है तो निर्माण कार्य की तारीख और चरणबद्ध योजना सार्वजनिक की जाए. उनका मानना है कि जब तक मेट्रो नहीं आती है. तब तक मजबूत और नियमित सिटी बस सेवा शुरू की जानी चाहिए ताकि लोगों को राहत मिल सके.
क्या है प्रमुख मांगे?
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासियों की मांग है कि मेट्रो परियोजना की स्पष्ट टाइमलाइन सार्वजनिक की जाए और बताया जाए की फाइल किस स्तर पर लंबित है. अंतिम समाधान के रूप में बेहतर और नियमित सिटी बस सेवा शुरू की जाए. साथ ही ट्रैफिक प्रबंधन और वैकल्पिक सार्वजनिक परिवहन को मजबूत किया जाए.
क्षेत्र में चर्चा है कि इस बार मेट्रो केवल चुनावी मुद्दा बनकर नहीं रहनी चाहिए. कई लोगों का तो यह भी कहना है कि इस बार मेट्रो का मुद्दा फिर से गर्मराया हुआ है, लेकिन इस बार ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासियों ने जंतर मंतर पर आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है. उनका साफ संदेश है कि सिर्फ आश्वासन नहीं धरातल पर दिखने वाली ठोस कार्रवाई चाहिए.
सिर्फ चुनावी वादों में मेट्रो, ट्रैक से कोसों दूर… ग्रेनो वेस्ट के लोग बोले- जाम झेल रही 5 लाख की आबादी
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