World News: होर्मुज पर जंग का काउंटडाउन! क्या ईरान जला देगा पूरा अरब? मुज्तबा की वॉर्निंग से दहली दुनिया – INA NEWS

ईरान के मोर्चे पर जंग और भी भीषण होती जा रही है. अमेरिका दबाव बनाने के लिए ग्राउंड ऑपरेशन शुरू करने का ऐलान कर चुका है तो वहीं ईरान ने भी अमेरिका के बढ़ते कदमों को रोकने के लिए बहुत खतरनाक रणनीति बना ली है और ये रणनीति को सीक्रेट नहीं है, बल्कि इस रणनीति का खुलासा ईरान के सुप्रीम लीडर ने खुद चेतावनी के रूप में किया है. अब सवाल ये है कि ईरान की रणनीति में टारगेट क्या है? और ये रणनीति किस तरह कामयाब होगी? आइए जानें इन सवालों के जवाब.
मिडिल-ईस्ट का नया और सबसे खौफनाक चैप्टर खुल चुका है. मुज्तबा खामेनेई का अल्टीमेटम आ चुका है. ईरान ने अमेरिका की आंखों में आंखें डालकर वो फाइनल वॉर्निंग दे दी है, जिससे पूरी दुनिया की सांसें अटक गई हैं. चेतावनी साफ है कि अगर अमेरिका ने होर्मुज में घुसपैठ की तो पूरा अरब राख का ढेर बन जाएगा.
और ये सिर्फ गीदड़भभकी नहीं है. महज ट्रंप की तरफ से प्लान-G यानी ग्राउंड ऑपरेशन को हरी झंडी मिलते ही ईरान ने ‘अरब दहन’ की शुरुआत भी कर दी है.
अरब देशों में ईरान के हमले शुरू
सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, कुवैत से लेकर ओमान और जॉर्डन तक, ईरान की मिसाइलों और ड्रोन्स ने पूरे अरब के आसमान को रणक्षेत्र में तब्दील कर दिया है. अमेरिका की सुप्रीमेसी को चुनौती देते हुए ईरान ने खाड़ी देशों के सीने पर सीधा प्रहार शुरू कर दिया है.
दरअसल ईरान का पहला टारगेट वो अरब देश हैं, जो अमेरिकी सेना को पनाह दे रहे हैं. इसलिए ईरान ने सऊदी अरब के अल-खर्ज में मौजूद ‘प्रिंस सुल्तान एयर बेस’ पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन्स की ऐसी बारिश की, जिसने अमेरिका को हिला कर रख दिया. बेस पर खड़े कई अमेरिकी ‘बोइंग KC-135 स्ट्रैटोटैंकर’ तबाह हो गए हैं.
यही नहीं दावा ये भी है कि कुवैत के बुबियान द्वीप पर भी ईरान ने मिसाइलें दागी हैं. इराक के बगदाद में कैंप विक्टोरिया को भी ईरान ने तबाह कर दिया और जॉर्डन के जॉर्डन के मुवफ्फक साल्ती एयर बेस को बैलिस्टिक मिसाइल से छलनी कर दिया. और ये कहर सिर्फ उन सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं थे, जहां अमेरिकी सेना का जमावड़ा था, बल्कि ईरान ने खाड़ी देशों के कमर्शियल हब भी तबाह करने में कोई करस नहीं छोड़ी.
कुवैत के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले
कुवैत के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले हुए, जिसमें कुवैत में खड़ा अमेरिकी रडार सिस्टम नष्ट हो गया. इसके अलावा शुवैख पोर्ट और मुबारक पोर्ट भी ईरानी बमबारी में धधकने लगे. ठीक ऐसे ही UAE के अबू धाबी में मौजूद खलीफा आर्थिक क्षेत्र को भी निशाना बनाने की कोशिश हुई, हालांकि यहां ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर लिया गया.
लेकिन ओमान के सलालाह पोर्ट पर बरसे ड्रोन टारगेट हिट करने में कामयाब रहे, जबकि बहरीन में हुए हमलों ने सायरन की चीखें रुकने नहीं दी और सऊदी का रियाद 6 बैलिस्टिक मिसाइल हमलों से दहल गया. यानी पूरा अरब इस वक्त बंकरों में कैद है, लेकिन ये अरब का खौफ यहीं तक सीमित नहीं है.
अरब देशों की आर्थिक रीढ़ पर हमले की चेतावनी यानी अमेरिका ने अगर होर्मुज स्ट्रेट में ऑपरेशन शुरू किया तो अरब के तेल और गैस ठिकानों को भस्म करने में ईरान जरा भी संकोच नहीं करेगा, लेकिन वो देश होंगे कौन से? और ईरान के प्राइमरी टारगेट पर कौन से ठिकानें होंगे?
ईरान ने अमेरिका के ग्राउंड ऑपरेशन प्लान को देखते हुए बहुत ही घातक प्लान तैयार किया है. इस प्लान में जैसे ही अमेरिकी सैनिक ईरान की जमीन पर यानी ईरान के द्वीपों पर उतरेंगे, उन्हें कब्जे में लेने की कोशिश करेंगे, वैसे ही ईरान भी जवाब देगा, जिसके लिए ईरान ने अपनी मिसाइलों को तैयार कर लिया है. ये मिसाइलें उनकी क्षमता के आधार पर टारगेट पहले ही लॉक कर चुकी है और इन मिसाइलों के टारगेट पर वो खाड़ी देश हैं, जहां अमेरिका का हित है और ये ईरानी मिसाइल की रेंज में भी हैं.
तेल ठिकानों पर ईरान के हमले
इनमें पहला हमला होगा सऊदी अरब के अब्कैक प्लांट पर, जो दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल प्रोसिंग प्लांट है. सऊदी अरब का 70% कच्चा तेल यहीं पहुंचता है. इसकी क्षमता भी 70 लाख बैरल प्रतिदिन है. टारगेट पर सऊदी अरब की ही रास तनुरा रिफाइनरी भी है, जो दुनिया के सबसे बड़े समुद्री तेल टर्मिनलों में से एक है. इसकी क्षमता 65 लाख बैरल प्रतिदिन है.
तीसरा टारगेट बनेगा कुवैत का अल-अहमदी पोर्ट, क्योंकि कुवैत का ये पोर्ट मुख्य तेल निर्यात केंद्र है, जहां से विश्व के बाजार में तेल जाता है, इसकी क्षमता 20 लाख बैरल प्रतिदिन है. इसके अलावा UAE का दास द्वीप भी टारगेट है, क्योंकि ये UAE का मुख्य तेल और गैस निर्यात केंद्र है, जिसकी क्षमता 15 लाख बैरल प्रतिदिन है.
यही नहीं, दुनिया की चौथी सबसे बड़ी UAE की रुवैस रिफाइनरी भी टारगेट पर है, जिसकी क्षमता 8.3 लाख बैरल प्रतिदिन है, जबकि ईरान का छठा टारगेट हो सकता है इराक का बसरा तेल टर्मिनल, जहां से इराक तेल बड़ी संख्या में निर्यात होता है. इसकी क्षमता 34 लाख बैरल प्रतिदिन है. और कुवैत की अहमदी रिफाइनरी भी टारगेट पर है, क्योंकि ये क्षेत्र तेल ही नहीं गैस के उत्पादन के लिए भी जाना जाता है, और इसकी क्षमता भी लाखों टन गैस-तेल उत्पादन की है.
7 सबसे बड़े ‘ऑयल हब ईरान के निशाने पर
होर्मुज में अगर अमेरिका ने ऑपरेशन शुरू किया, तो फिर ईरान की मिसाइलों के रडार पर मध्य-पूर्व के ये 7 सबसे बड़े ‘ऑयल हब’ है और इन पर हमला होने का मतलब है, अरब देशों की आर्थिक तबाही की शुरुआत होगी, जिसे दुनिया को हिला देंगे.
यानी ईरान ने जिन दिशाओं में अपनी मिसाइलों का मुंह खोल रखा है, वो वैश्विक अर्थव्यवस्था को चंद घंटो में ही घुटों पर ला देगा, लेकिन सवाल ये है कि ईरान ऐसा करेगा कैसे? क्या अरब देशों में तैनात हाईटैक पैट्रियट और दूसरे एयर डिफेंस सिस्टम ईरान तबाह कर चुका है? इस सवाल का जवाब अब तक हुए ईरानी हमलों की कामयाबी से मिलता है.
दरअसल ईरान का विनाशकारी शस्त्रागार में अभी शाहेद-136 ड्रोन का बड़ी संख्या मेंं भंडार है और ये ड्रोन कामयाब इसलिए हैं, क्योंकि ये सस्ते ड्रोन झुंड में हमला करते हैं और इस तरह स्वार्म ड्रोन अटैक एयर डिफेंस को चकमा देने में कामयाब हो जाते हैं.
ऐसा ही दूसरा हथियार है, होवेजेह क्रूज मिसाइलें, जिसका बड़ा भंडार ईरान के पास है. ये मिसाइल जमीन से कुछ ही ऊंचाई पर उड़ान भरती है, जिससे इन मिसाइलों को ट्रैक कर पाना ही लगभग नामुमकिन होता है.
अमेरिका को ईरान का जवाब
इसके अलावा ईरान का ब्रह्मास्त्र है फतह हाइपरसोनिक मिसाइल जो बड़ी संख्या में लॉन्च रेडी हैं. ये मिसाइल आवाज से गई गुना तेज रफ्तार से टारगेट पर हमला करती हैं और इनकी गति किसी भी महंगे एयर डिफेंस सिस्टम को नाकाम कर सकती हैं.
यानी ईरान ने आक्रामक रणनीति तैयार कर ली है, लेकिन क्या ईरान के अरब दहन कार्यक्रम के बीच अमेरिका खामोश रहेगा? दरअसल पेंटागन ने अपना महाबली जंगी बेड़ा USS त्रिपोली खाड़ी में उतार दिया है, जिसमें 2500 अमेरिकी मरीन कमांडो ग्राउंड ऑपरेशन के लिए आगे बढ़ रहे हैं. यही नहीं बेड़े पर तैनात F-35B फाइटर जेट्स और ऑस्प्रे विमानों का जत्था भी ईरान पर टूट पड़ने के लिए तैयार है.
इसका मतलब ये है कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ऐसे ही नहीं कहा कि ये युद्ध महीनों में नहीं बल्कि हफ्तों मेंं खत्म हो जाएगा. ये बयान तैयारी के मोर्चे पर ही आया है और तैयारी है खार्ग द्वीप पर 10 हजा़र ग्राउंड ट्रूप्स की तैनाती के साथ बैकडोर चैनल खोलने की, लेकिन जमीनी हालात बता रहे हैं कि कूटनीति का वक्त शायद निकल चुका है. इसलिए मुज्तबा खामेनेई ने अल्टीमेटम जारी कर दिया है, वो अल्टीमेटम जिसका मतलब है, तीसरे विश्वयुद्ध के लिए होर्मुज में व्यूह रचना करना.
ब्यूरो रिपोर्ट, टीवी 9 भारतवर्ष
ये भी पढ़ें- अमेरिका की 15 वर्सेज ईरान की 10जंग रोकने के लिए किसकी शर्तें ज्यादा टफ?
होर्मुज पर जंग का काउंटडाउन! क्या ईरान जला देगा पूरा अरब? मुज्तबा की वॉर्निंग से दहली दुनिया
देश दुनियां की खबरें पाने के लिए ग्रुप से जुड़ें,
#INA #INA_NEWS #INANEWSAGENCY
Copyright Disclaimer :-Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing., educational or personal use tips the balance in favor of fair use.
Credit By :-This post was first published on https://www.tv9hindi.com/, we have published it via RSS feed courtesy of Source link,





