खबर शहर , Agra News: रेणुका धाम और बिचपुरी आरओबी के लिए पेड़ काटने की सुप्रीम मंजूरी – INA

आगरा। यमुना नदी पर रेणुका धाम से बलदेव के बीच अधूरे पड़े पुल का निर्माण अब पूरा हो सकेगा। इसी के साथ बिचपुरी में रेल ओवरब्रिज के निर्माण में बाधा बन रहे पेड़ों को काटने की सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को मंजूरी दे दी। रेणुका धाम पुल और बिचपुरी आरओबी में पेड़ काटने की सिफारिश सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी ने बीते साल की थी।
बृहस्पतिवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने दोनों पुलों के निर्माण के लिए 313 पेड़ काटने की मंजूरी दी है और इसके एवज में दस गुना यानी 3130 पेड़ लगाने का आदेश दिया है। बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने रेणुका धाम से बल्देव के लिए और बिचपुरी रेल ओवरब्रिज के लिए 313 पेड़ काटने की अनुमति इस शर्त पर दी है कि सभी शर्तों का पालन किया जाएगा।
सीईसी ने कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल की थी कि सेतु निगम ने पर्यावरण प्रतिपूर्ति के लिए 3,130 पेड़ लगा दिए हैं। वन विभाग ने 9.699 हेक्टेयर जमीन पर पौधरोपण किया है। इसके लिए एक करोड़ रुपये वन विभाग को दिए गए हैं। दस साल के रखरखाव की जिम्मेदारी भी सेतु निगम निभाएगा, जिसके लिए वन विभाग के खाते में लागत जमा कराई गई है। कोर्ट के आदेश के बाद इन दोनों पुलों के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।
दोनों पुलों के जरिये लाखों लोगों को आवागमन की सुविधा हो जाएगी। बिचपुरी रेल फाटक पर लोगों को घंटों का जाम नहीं झेलना होगा। इस पुल के बनने से आरबीएस इंजीनियरिंग कॉलेज, कृषि विभाग के हजारों छात्रों को आसानी हो जाएगी।
सेतु निगम पर पांच लाख रुपये का लगाया था जुर्माना
सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल सुनवाई में सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सेतु निगम पर बिना अनुमति पुल निर्माण शुरू करने पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। सेतु निगम ने यमुना नदी में आधे से ज्यादा पिलर खड़े कर दिए थे और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट से पेड़ काटने की अनुमति मांगी थी। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार को आदेश दिया था कि भविष्य में कोई भी प्रोजेक्ट पेड़ काटने की अनुमति मिलने के बाद ही शुरू कराया जाए। लापरवाही के लिए पांच लाख का जुर्माना सेतु निगम से जमा कराया गया था।
कोर्ट में दाखिल की गई प्रभाव आकलन रिपोर्ट
नई दिल्ली। बृहस्पतिवार को हुई सुनवाई में उद्योेग मामले में बेंच को अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने बताया कि उद्योगों पर संचयी प्रभाव आकलन (सीआईए) रिपोर्ट टीटीजेड प्राधिकरण को सौंप दी गई है। अदालत ने टीटीजेड प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वह गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों के आवेदनों पर विचार करते समय शीर्ष अदालत की ओर से नियुक्त सीईसी और नीरी के विशेषज्ञों को साथ जोड़े। पीठ ने कहा कि उद्योग स्थापित करने के लिए इन आवेदनों की जांच उसके 23 जुलाई के आदेश के तहत ही की जाएगी। किसी भी आपत्ति की स्थिति में आवेदन को अदालत की अनुमति के बिना स्वीकार नहीं किया जाएगा।